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सोलर घोटाला: जांच आयोग ने केरल के पूर्व CM चांडी को दोषी ठहराया

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| नवंबर 10 , 2017 , 11:18 IST | तिरुअनंतपुरम

केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष यूडीएफ को तगड़ा झटका लगा है। केरल की राजनीति में भूचाल लाने वाले सोलर घोटाले पर गुरुवार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया। इस सत्र में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने घोटाले की जांच के लिए बनाई गई न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पेश की। विजयन ने बताया कि रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी और उनके कर्मचारियों ने सरिता एस नायर और उनकी कंपनी को लोगों से धोखाधड़ी करने के लिए मदद पहुंचाई।

घोटाले की जांच करने वाले न्यायमूर्ति जी. श्रीवराजन आयोग की चार खंडों में आई 1073 पन्नों की रिपोर्ट मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने विधानसभा के विशेष सत्र में पेश की। केरल विधानसभा के इतिहास में ऐसा पहली बार है जब न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पेश करने के लिये विशेष सत्र बुलाया गया।

जांच पैनल ने पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी पर टीम सोलर कंपनी से रिश्वत लेने के स्पष्ट आरोप लगाए हैं। यह कंपनी बिजू राधाकृष्णन और सरिता ने स्थापित की थी। ओमन के किये गये दावों के विरुद्ध जांच में यह सामने आया कि वे सरिता से मिले थे और बिजू और सरिता ने 2.16 करोड़ की रिश्वत चांडी को किश्तों के जरिए दी थी। कमीशन को पूर्व मंत्री अरायादन मोहम्मद, एपी अनिलकुमार और पूर्व केंद्रीय मंत्री एसएस पलानिमानिकम पर भी रिश्वत लेने की सबूत मिले हैं। कमीशन ने इन मंत्रियों पर सतर्कता जांच की सिफारिश की है।

हालांकि कमीशन ने दो महत्वपूर्ण बिंदुओं पर कुछ नहीं बोला, जो जांच का विषय हो सकते थे। पहला सोलर घोटाले के परिणामस्वरूप सरकारी खजाने में किसी तरह की संभावित हानि की जांच और दूसरा अब तक स्पष्ट नहीं है कि तत्कालीन यूडीएफ सरकार ने अनुचित लाभ के लिए टीम सोलर की किसी तरह की मदद की हो।

चांडी ने खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर रिपोर्ट में रत्ती भर भी सच हुआ तो वह सार्वजनिक जीवन छोड़ देने को तैयार हैं। चांडी ने कहा कि यह एलडीएफ सरकार का राजनीतिक प्रतिशोध है। उन्होंने पूछा कि यह 'सोलर रिपोर्ट' है या 'सरिता रिपोर्ट' है। उन्होंने कहा कि आयोग ने जांच आयोग अधिनियम के सामान्य नियमों का संज्ञान लिये बिना ही बहुत गलत तरीके से काम किया है। आयोग ने यह भी कहा कि पूर्व गृह और सतर्कता मंत्री तिरुवंचूर राधाकृष्णन ने यह सुनिश्चित करने के समस्त प्रयास किये कि चांडी अपने अधीन आने वाले पुलिस अधिकारियों के माध्यम से आपराधिक जवाबदेही से बाहर निकल जाएं।

पिछले साल मई में चांडी सरकार के जाने से पहले इस घोटाले ने उसे हिलाकर रख दिया था। जून 2013 में खबरें आई थीं कि मुख्यमंत्री कार्यालय के तीन कर्मी घोटाले में शामिल थे। सोलर पैनल सॉल्यूशन मुहैया कराके सरिता नायर और उनके सहयोगी बीजू राधाकृष्णन ने कई लोगों के साथ कथित तौर पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की थी। आयोग ने राज्य सरकार से यह सिफारिश भी की है कि भ्रष्टाचार के आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के प्रावधानों को लागू करने पर गंभीरता से विचार किया जाए। आयोग ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमन चांडी और उनके निजी स्टाफ- टेनी जोप्पन, जे जैकब, अंगरक्षक सलीमराज तथा दिल्ली में उनके सहयोगी थॉमस कुरुविल्ला के माध्यम से टीम सोलर की आरोपी सरिता एस नायर और उनकी कंपनी को उनके ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी करने देने में मदद की गयी थी।


क्या है सोलर स्कैम-

केरल में टीम सोलर एनर्जी के सर्वेसर्वा बीजू राधाकृष्णन और सरिता एस नायर ने पिछली सरकार के कार्यकाल में सत्ता में प्रभावशाली लोगों तक पहुंच बनाने के लिए महिलाओं का प्रयोग किया। आरोपों के मुताबिक इसमें पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी तक शामिल थे। सौर घोटाले में सरकारी मशीनरी का फायदा उठाते हुए लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की गई थी। यह घोटाला उस समय सामने आया जब एक ग्राहक ने इस कंपनी के खिलाफ केस दर्ज कराया था। आरोप है कि बीजू और सरिता ने तत्कालीन सरकार में ठेके हासिल करने के लिए कई बड़े नामों का इस्तेमाल किया।


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