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सरदार सरोवर बांध की भेंट चढ़ेंगे 178 गांव, डूब क्षेत्र छोड़ने को राजी नहीं 3 लाख लोग

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 31 , 2017 , 14:52 IST | बड़वानी

सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरदार सरोवर परियोजना के मध्य-प्रदेश में आने वाले डूब क्षेत्र में पूर्ण पुनर्वास के लिए तय की गई डेडलाइन का आज अंतिम दिन है। 31 जुलाई को बड़वानी, धार, खरगोन और अलीराजपुर के 178 गांवों को खाली कराने की आखिरी तारीख है, लेकिन डूब प्रभावित गांव खाली करने को तैयार ही नहीं है।

सरदार सरोवर बांध के डूब क्षेत्र के प्रभावितों के लिये मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कई सौगातों की घोषणा की, बावजूद इसके नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर ने अपना आन्दोलन जारी रखा हुआ है। मेधा ने अपना अनिश्चितकालीन उपवास रविवार को भी जारी रखा। मेधा के अलावा सरदार सरोवर बांध के प्रभावित लोगों ने मांग जारी रखी और प्रदर्शन किया।

बडवानी जिले में कफन सत्याग्रह कर प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया गया। बडवानी जिले के कारंजा इलाके में पांच महिलाएं एवं पांच पुरूषों ने शव के समान जमीन पर लेटकर दो घंटे तक कफन सत्याग्रह कर प्रदर्शन भी किया। इन कफन सत्याग्रह करने वाले लोगों के शरीर को ठीक उसी तरह से सफेद कपडे से ढंका हुआ था, जैसे शवों को ढंका जाता है और उनके उुपर फूल-मालाएं भी रखी गयी थी।

कफन सत्याग्रह करने से पहले इन प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरदार सरोवर बांध के गेटों को बंद करने से डूब की चपेट में आने वाले विस्थापित जल्द ही इस पानी में डूबकर मर जाएंगे। डूब प्रभावितों का कहना है कि जब सरकार हमारी जल हत्या करने पर तुल ही गई है तो हमनें भी अब कफन ओढ़ लिया है। चाहे जल समाधि लेना पड़े, लेकिन बिना संपूर्ण पुनर्वास के हम गांव नहीं खाली करेंगे।

वहीं विस्थापितों के उचित पुनर्वास की मांग को लेकर धार जिले के चिखल्दा गांव के निकट नर्मदा नदी के पानी में बडी तादाद में लोगों ने जल सत्याग्रह कर प्रदर्शन किया। इस दौरान उनके गले-गले तक पानी था और प्रदर्शनकारी कुछ घंटों तक इसी तरह पानी में खडे़ रहे।

गौरतलब है कि नवागाम के पास गुजरात में नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध के गेटों को पिछले महीने बंद करने से मध्यप्रदेश के 40,000 परिवार डूब की चपेट में आ रहे हैं और मध्यप्रदेश सरकार ने उन्हें 31 जुलाई तक अपने-अपने घरों को छोडने को कहा है।

विस्थापितों के लिए लडाई लड रही हिम्शी सिंह ने बताया कि सरदार सरोवर बांध के गेट बंद करने से मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी के आसपास रहने वाले धार, बडवानी, अलीराजपुर एवं खरगौन जिलों के करीब 40,000 परिवारों के घर डूब की चपेट में आ रहे हैं। इन घरों में करीब तीन लाख लोग रहते हैं। वे बेघर हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इन लोगों को सोमवार तक अपने-अपने मकान खाली करने को कहा है।

हिम्शी ने कहा कि प्रदेश सरकार के अधिकारी डूब प्रभावित लोगों को अपने स्थान से हटाकर टीन शेड में रहने के लिये बाध्य कर रहे हैं तथा पुनर्वास स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं तक नहीं दी गयी हैं। टीन शेड के रूप में बने इन अस्थायी घरों में कोई भी नहीं रह सकता है।

उल्लेखनीय है कि यहां पुनर्वास और मुआवजे की मांग को लेकर प्रभावित 18 जुलाई से क्रमिक भूख हड़ताल कर रहे हैं। इधर शनिवार को महिलाओं ने आंशिक जल सत्याग्रह शुरू किया। उनका आरोप है कि अब तक प्रशासन का कोई भी अधिकारी सुध लेने नहीं आया। उनकी मांगें नहीं मानी गई तो वे अनिश्चितकालीन जल सत्याग्रह शुरू करेंगे।

गौरतलब है कि शासन द्वारा डूब प्रभावितों को 31 जुलाई तक हटने के निर्देश दिए गए हैं। शासन ने नावड़ाटौड़ी में 2 मकान व 7 दुकानें डूब क्षेत्र में चिन्हित की हैं जबकि ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावितों की संख्या अधिक है। शासन द्वारा वर्तमान स्थिति को देखते हुए पुन: सर्वे किया जाना था किंतु सालों पूर्व की स्थिति के आधार पर डूब प्रभावितों की संख्या तय की गई है जो गलत है।

क्या है मामला?

बता दें कि नवागाम के पास गुजरात में नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध के गेटों को पिछले महीने बंद कर दिया गया था। इस कारण मध्यप्रदेश के 40,000 परिवार डूब की चपेट में आ रहे हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने लोगों को सोमवार तक अपने-अपने घरों को छोड़ने को कहा है। स्थानीय लोग उचित पुनर्वास की मांग कर कफन प्रदर्शन कर रहे हैं।

यहां बड़वानी और धार के डूब प्रभावित गांव खाली कराने के लिए करीब पांच हजार पुलिस जवानों को लगाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने डूब प्रभावितों के पुनर्वास की डेडलाइन 31 जुलाई तय की है। यानि विस्थापन की डेडलाइन आज की है। बड़वानी के 2392 परिवार अब भी डूब क्षेत्र में ही रह रहें हैं। वे अपने जगह छोड़ने को तैयार नहीं है। हालांकि यहां पर सात हजार 89 परिवारों को विस्थापित करना था। जिसमें से 5 हजार 504 परिवार पुनर्वास स्थल पर शिफ्ट हो चुके हैं,लेकिन इनमें से कई की जमीन इसमें आ रही है। इसलिए उनके से कई परिवार अपनी जमीन से नहीं हट रहे हैं। वहीं धार में 4300 परिवार डूब प्रभावित क्षेत्र से हैं। इसमें से 3900  परिवार शिफ्ट हो चुके हैं, लेकिन 400 परिवार अब भी शिफ्ट होना बाकी है।


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