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नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 10 अनसुनी कहानियां

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 23 , 2018 , 01:20 IST

सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 में हुआ था। इनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माता का नाम प्रभावती देवी था। इनको लोग नेता जी के नाम से भी जानते हैं।सुभाष चंद्र बोस भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रणी नेता थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान, अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ने के लिये इन्होने जापान के सहयोग से आज़ाद हिन्द फौज का गठन किया था।

उनके द्वारा दिया गया जय हिन्द का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया। "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा" का नारा भी उनका था जो उस समय अत्यधिक प्रचलन में आया। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि जब नेता जी ने जापान और जर्मनी से मदद लेने की कोशिश की थी तो ब्रिटिश सरकार ने अपने गुप्तचरों को 1941 में उन्हें ख़त्म करने का आदेश दिया था।

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नेता जी ने 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हाल के सामने 'सुप्रीम कमाण्डर' के रूप में सेना को सम्बोधित करते हुए "दिल्ली चलो!" का नारा दिया और जापानी सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश व कामनवेल्थ सेना से बर्मा सहित इम्फाल और कोहिमा में एक साथ जमकर मोर्चा लिया। 21 अक्टूबर 1943 को सुभाष बोस ने आजाद हिन्द फौज के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतन्त्र भारत की अस्थायी सरकार बनायी।

जिसे जर्मनी, जापान, फिलीपींस, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड ने मान्यता दी। 1944 को आजाद हिन्द फौज ने अंग्रेजों पर दोबारा आक्रमण किया और कुछ भारतीय प्रदेशों को अंग्रेजों से मुक्त भी करा लिया। कोहिमा का युद्ध 4 अप्रैल 1944 से 22 जून 1944 तक लड़ा गया यह एक भयंकर युद्ध था। इस युद्ध में जापानी सेना को पीछे हटना पड़ा था और यही एक महत्वपूर्ण मोड़ सिद्ध हुआ।

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6 जुलाई 1944 को उन्होंने रंगून रेडियो स्टेशन से महात्मा गांधी के नाम एक प्रसारण जारी किया जिसमें उन्होंने इस निर्णायक युद्ध में विजय के लिये उनका आशीर्वाद और शुभकामनायें माँगीं। जानकारी के लिए बता दें नेताजी की मृत्यु को लेकर आज भी विवाद है। जहाँ जापान में प्रतिवर्ष 18 अगस्त को उनका जन्म दिन धूमधाम से मनाया जाता है।

वहीं भारत में रहने वाले उनके परिवार के लोगों का आज भी यह मानना है कि सुभाष की मौत 1945 में नहीं हुई। सुभाष चंद्र बोस न केवल सुदर्शन व्यक्तित्व थे, बल्कि जोशीले, जीनियस और कहीं भी लीडर बनकर छा जाने वाले थे ।उनके अंदर खास बात थी, जो उन्हें दूसरों से अलग करती थी।

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सुभाष चंद्र बोस के क्रांतिकारी विचार: 

1- ये हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मोल अपने खून से चुकाएं। हमें अपने बलिदान और परिश्रम से जो आजादी मिले, हमारे अन्दर उसकी रक्षा करने की ताकत होनी चाहिए।

2- आज हमारे अन्दर बस एक ही इच्छा होनी चाहिए, मरने की इच्छा ताकि भारत जी सके! एक शहीद की मौत मरने की इच्छा ताकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीदों के खून से प्रशश्त हो सके।

3- तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा (नेताजी ने यह नारा 4 July, 1944  को बर्मा में भारतीयों के सामने दिए भाषण में दिया था।)

4- याद रखिये सबसे बड़ा अपराध अन्याय सहना और गलत के साथ समझौता करना है।

5- एक सच्चे सैनिक को सैन्य और आध्यात्मिक दोनों ही प्रशिक्षण की जरुरत होती है।

6- भारत में राष्ट्रवाद ने एक ऐसी शक्ति का संचार किया है जो लोगों के अन्दर सदियों से निष्क्रिय पड़ी थी।


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