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कैबिनेट का फैसला: सिंगल ब्रांड रिटेल में 100% FDI को मंजूरी, एयर इंडिया का होगा विनिवेश

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 10 , 2018 , 14:09 IST | नई दिल्ली

कैबिनेट ने सिंगल ब्रांड रिटेल में ऑटोमैटिक रूट से 100 फीसदी विदेशी निवेश को मंजूरी दे दी गई है। साथ ही एविएशन सेक्टर से भी बड़ी खबर आ रही है। एविएशन सेक्टर में 49 फीसदी एफडीआई का रास्ता साफ हो गया है। कैबिनेट की बैठक में करीब 6 सेक्टर में विदेशी निवेश के नियम आसान करने पर फैसला लिया गया है। अब एयर इंडिया जैसी घरेलू एयरलाइन में विदेशी एयरलाइन 49% तक निवेश कर सकती है। 

कंस्ट्रक्शन सेक्टर में भी एफडीआई को मंजूरी

फॉरन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (एफडीआई) के नियमों में बदलावों को बुधवार को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई। इसमें सिंगल ब्रैंड रीटेल में ऑटोमेटिक रूट से 100 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी दी गई है। पहले 49 प्रतिशत तक निवेश की अनुमति थी, उसके ऊपर के निवेश के लिए सरकार की इजाजत चाहिए होती थी। एविएशन , कंस्ट्रक्शन सेक्टर में भी FDI के नियमों में ढील दी गई है। कंस्ट्रक्शन सेक्टर में भी ऑटोमेटिक रूट से 100 प्रतिशत विदेशी निवेश को मंजूरी दे दी गई है।

एअर इंडिया में अब विनिवेश होगा आसान

वहीं एयर इंडिया के लिए 49 प्रतिशत निवेश की मंजूरी दी गई है। माना जा रहा है कि इससे एयर इंडिया में विनिवेश करने में आसानी होगी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि एयरइंडिया की बडी हिस्सेदारी भारतीय नागरिक के हाथों में बनी रहेगी। सूत्र ने यह भी बताया कि एयर इंडिया मंत्रिमंडल ने सरकारी प्रस्ताव को मंजूरी भी दे दी है।

बता दें कि 2014 में सिंगल ब्रैंड रीटेल में 100 प्रतिशत एफडीआई को मंजूरी दी गई थी, तब नाइक जैसी कई बड़ी ग्लोबल कंपनियों ने भारत का रुख किया था। माना जा रहा है कि ऑटेमैटिक रूट से इजाजत मिलने के बाद अब बाकी कई कंपनियां भी भारत की तरफ आकर्षित होंगी क्योंकि अब क्लियरंस लेने में आसानी होगी। इससे विदेशी कंपनियों के लिए काम करने का बेहतर माहौल तैयार होगा जिससे अर्थव्यवस्था को फायदा होगा और नौकरियों के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। फिलहाल मल्टी ब्रैंड रीटेल के बारे में कुछ नहीं कहा गया है क्योंकि उसका कई राजनीतिक पार्टियों और व्यापार संगठनों द्वारा विरोध किया जा चुका है।

एफडीआई का विरोध शुरू

सिंगल ब्रैंड रीटेल में ऑटोमैटिक रूट से 100 प्रतिशत एफडीआई की इजाजत दी जाने का विरोध शुरू हो गया है। ऑल इंडिया ट्रेडर्स कंफेडेरशन (महासंघ) (CAIT) ने इसका विरोध करते हुए कहा है ऐसा करके बीजेपी ने अपना चुनावी वादा तोड़ा है क्योंकि इससे बाहर की बड़ी कंपनियां भारत की मार्केट पर कब्जा कर लेंगी।

फिलहाल अभी 49 फीसदी ज्यादा एफडीआई के लिए मंजूरी लेनी पड़ती है। अब एफडीआई वाले फूड रिटेल स्टोर को बड़ी राहत मुमकिन है। जिसके तहत 25 फीसदी नॉन-फूड आइटम बेचने की छूट पर विचार किया जा रहा है।

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जानकारी के मुताबिक निवेश में अड़चन वाले नियमों में ढील संभव है।

कंस्ट्रक्शन में एफडीआई के नियम आसान हो सकते हैं। कुल 6 सेक्टर्स में एफडीआई के नियमों को आसान किया गया है। एयरलाइंस में भी 100 फीसदी एफडीआई नियमों में बदलाव किए गए हैं। इस सेक्टर में विदेशी निवेशकों को मैनेजमेंट कंट्रोल भी मिल सकेगा।

बता दें कि अभी मैनजमेंट कंट्रोल विदेशी हाथों में नहीं जा सकता।

गौरतलब है कि पिछले बजट में सरकार ने एफडीआई नियमों में ढील का एलान किया था। जिसको देखते हुए नए बजट से पहले फैसला लेना जरूरी है। इसके अलावा राज्यों के चुनाव खत्म हो गए हैं जिससे रिटेल एफडीआई पर फैसला लेना आसान है। इसके अलावा पीएम मोदी दावोस बैठक में हिस्सा लेने जा रहे हैं। दावोस बैठक से पहले सरकार बड़ा संदेश देना चाहती है।


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