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11 मई 1998: आज ही के दिन पोकरण में हुआ था परमाणु परीक्षण, जानें पूरी कहानी

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मई 11 , 2018 , 11:37 IST

साल 1998, प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने आज ही के दिन राजस्थान के पोकरण में परमाणु परीक्षण कर दुनिया को चौंका दिया था। अचानक किए गए इन परमाणु परीक्षणों से अमेरिका, पाकिस्तान समेत कई देश दंग रह गए थे। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की अगुआई में यह मिशन कुछ इस तरह से अंजाम दिया गया कि अमेरिका समेत पूरी दुनिया को इसकी भनक तक नहीं लगी। इससे पहले 1974 में इंदिरा गांधी की सरकार ने पहला परमाणु परीक्षण (पोकरण-1) कर दुनिया को भारत की ताकत का लोहा मनवाया था, इसे ऑपरेशन 'स्माइलिंग बुद्धा' नाम दिया गया था।

पोकरण परमाणु परीक्षण के 20 साल पूरे होने के मौके पर आज बीजेपी की युवा ईकाई कई कार्यक्रम आयोजित कर युवाओं को परीक्षण की प्रक्रिया, आवश्यकताओं और उससे उपजे 'स्वाभिमान' के भाव से अवगत कराएगी।

आइए जानते हैं कि 20 साल पहले आज ही के दिन कैसे बड़े ही गोपनीय तरीके से भारत ने किया था यह बड़ा परमाणु विस्फोट:

- दरअसल, अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA भारत पर नजर रखे हुए थी और उसने पोकरण पर निगरानी रखने के लिए 4 सैटलाइट लगाए थे। हालांकि भारत ने CIA और उसके सैटलाइटों को चकमा देते हुए परमाणु परीक्षण कर दिया।

- इस प्रॉजेक्ट के साथ जुड़े वैज्ञानिक कुछ इस कदर सतर्कता बरत रहे थे कि वे एक दूसरे से भी कोड भाषा में बात करते थे और एक दूसरे को छद्म नामों से बुलाते थे। ये झूठे नाम इतने हो गए थे कि कभी-कभी तो साथी वैज्ञानिक एक दूसरे का नाम भूल जाते थे।

सेना की वर्दी में वैज्ञानिक

उस दिन सभी को आर्मी की वर्दी में परीक्षण स्थल पर ले जाया गया था ताकि खुफिया एजेंसी को यह लगे कि सेना के जवान ड्यूटी दे रहे हैं। 'मिसाइलमैन' अब्दुल कलाम भी सेना की वर्दी में वहां मौजूद थे। बाद में इसकी तस्वीरें भी सामने आई थीं, जिसमें पूरी टीम सेना की वर्दी में दिखाई पड़ी। पोकरण परमाणु परीक्षण के 20 साल पूरे होने के मौके पर आज बीजेपी की युवा ईकाई कई कार्यक्रम आयोजित कर युवाओं को परीक्षण की प्रक्रिया, आवश्यकताओं और उससे उपजे 'स्वाभिमान' के भाव से अवगत कराएगी। 

परीक्षण के बाद वाजपेयी ने ऐलान किया, 'आज, 15.45 बजे भारत ने पोकरण रेंज में अंडरग्राउड न्यूक्लियर टेस्ट किया'। वह खुद धमाके वाली जगह पर गए थे।कलाम ने टेस्ट के सफल होने की घोषणा की थी।

कलाम ने बताया, भारत पर था दबाव

कलाम ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उस समय भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव काफी ज्यादा था लेकिन तत्कालीन पीएम वाजपेयी ने तय किया था कि वह आगे बढ़कर परीक्षण करेंगे। इसके साथ ही भारत एक परमाणु ताकत बना।

भारत के इन परमाणु परीक्षणों की सफलता से दुनियाभर में भारत की धाक जम गई। केंद्र में वाजपेयी की सरकार बने सिर्फ तीन महीने हुए थे और हर कोई इस बात से हैरान था कि इतनी जल्दी वाजपेयी ने इतना बड़ा कदम कैसे उठा लिया।

हालांकि वाजपेयी ने यह भी कहा था कि हम पहले परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। जिन देशों के पास परमाणु हथियार नहीं हैं, भारत उनके खिलाफ इन हथियारों का इस्तेमाल कभी नहीं करेगा।


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