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आरुषि मर्डर मिस्ट्री: उस रात की सुबह नहीं...

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अक्टूबर 12 , 2017 , 18:52 IST | नई दिल्ली

15 मई 2008 की रात फ्लैट नंबर L-32 में जो कुछ हुआ, उसका खुलासा अभी तक नहीं हो पाया है। हम बात कर रहें है आरुषि हेमराज मर्डर मिस्ट्री की जो देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री बन गई है। इस मर्डर मिस्ट्री में 2 हत्याएं, 2 किस्से, 2 तरह के सुराग सामने आए। जिन्होंने 2 तरह की संभावनाएं पैदा कर इस हत्याकांड को और भी संजीदा कर दिया।

9 साल पुराने इस हत्याकांड में अभी तक हत्यारों का पता नहीं चल पाया है। अब हम आपको उस रात के बारे में बताने जा रहे है, जहां रची गई मर्डर मिस्ट्री।

15 मई, 2008 की रात आरुषि तलवार चेतन भगत की किताब 3 मिस्टेक्स ऑफ माइ लाइफ पढ़ने का प्रयास कर रही थी। इस वक्त पिता राजेश का लैपटॉप काम नहीं रहा था, तो वो आरुषि के कमरे में रखे कम्प्यूटर में थोड़ी देर काम करते है। इस दौरान मां-बेटी कुछ देर तक आपस में बातें करती रहीं। इसके बाद ये लोग चले गए और हर रात की तरह बाहर से ताला लगाना भूल गए।

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16 मई, 2008 दिन बुधवार, नोएडा। रोजाना की तरह घर में काम करने वाली भारती घंटी बजाती है तो हेमराज दरवाजा खोलता था। लेकिन, 16 मई के दिन ऐसा नहीं हुआ। भारती बार-बार घंटी बजाती रहीं उसके साथ ही दरवाजा भी खटखटाया। जिसके बाद नूपुर तलवार ने आंख मलते हुए लकड़ी का दरवाजा खोलती हैं और लोहे के दरवाजे से पूछती हैं कि हेमराज कहां है?

जिसके बाद भारती ने कहा कि क्या आप चाबी नीचे फेंक देंगी। जब वह आई तो देखा कि बाहर लोहे का ग्रिल बंद नहीं है। मगर, भीतर का ग्रिल दरवाजा बाहर से बंद था। इसके बाद जैसे ही भारती घर के भीतर आती है तो देखती है कि राजेश और नूपुर रो रहे है।

इसके बाद नूपुर भारती के सीने से लग गईं और रोते हुए कहा आरुषि के कमरे में जाओ और देखो कि क्या हुआ। भारती अंदर जाती है और नूपुर जब चादर हटाती है तो भारती को आरुषि के गले पर खून की पतली धार दिखती है। नूपुर रो रही है और कहती है कि देखो हेमराज ने क्या किया। भारती पूछती है कि पड़ोसियों को बुलाऊं? नूपुर ने कहा, हां, बुलाओ।

इस घटनाक्रम के बाद करीब सुबह 7 बजे पुलिस आ जाती है। जिसके बाद आरुषि का शव पोस्टमार्टम के लिए ले जाया जाता है।

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- 17 मई के दिन हेमराज का शव घर के टैरेस पर मिला।

- 23 मई को दोहरी हत्या के आरोप में डॉ राजेश तलवार को गिरफ़्तार किया गया।

- 1 जून के दिन सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ले ली।

- 13 जून को डॉ तलवार का कंपाउंडर कृष्णा गिरफ़्तार हो गया।

- 12 जुलाई के दिन राजेश तलवार को डासना जेल से ज़मानत पर रिहा होते है।

कंपाउंडर के गिरफ्तार होने के बाद राजकुमार और विजय मंडल भी गिरफ्तार हो गए। इस हत्याकांड में तीनों को हत्या का आरोपी बनाया गया।

10 सितंबर, 2009 को मामले की जांच के लिए नई सीबीआई टीम को चुना जाता है। इसके बाद 12 सितंबर को कृष्णा,राजकुमार और मंडल को ज़मानत मिल जाती है और सीबीआई 90 दिन में चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाती है। इस मामले में 25 नवंबर, 2013 को विशेष अदालत ने तलवार दंपत्ति को दोषी करार देते हुए उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी।

हालांकि इस मामले में 12 अक्टूबर 2017 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए तलवार दंपति को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि जांच के दौरान सीबीआई तलवार दंपति के खिलाफ ऐसे सबूत पेश नहीं कर पाई जिसमें उन्हें सीधे दोषी माना जा सके। कोर्ट ने ये भी कहा ऐसे मामलों में तो सुप्रीम कोर्ट भी बिना पर्याप्त तथ्यों और सबूतों के किसी को इतनी कठोर सजा नहीं सुनाता।


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