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क्यों मर रहे हैं बाघ? अब नहीं जागे तो आने वाली नस्लें सिर्फ नाम से जानेगी!

अमितेष युवराज सिंह, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 17 , 2017 , 19:20 IST | नयी दिल्ली

देश में बाघों की मौत बड़ी चिंता का कारण बनती जा रही है। आरोप है कि इस साल देश में अभी तक 67 बाघों की मौत हो चुकी है। वन्यजीवों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि वे बाघों की मौत पर उचित कार्रवाई नहीं करते हैं। उनका आरोप है कि वन्यजीव अधिकारी ज्यादातर मामलों पर चुप्पी साध लेते हैं।

अभी तक जितनी मौतें हुईं हैं वे इंसानी बस्तियों में बाघों के घुसने और शिकारियों के हाथों हुई है। बाघों के बचाने के लिए काम करने वाली संस्था डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के पूर्व ट्रस्टी टी भास्करन का कहना है कि भारत में बाघों की मौत की सूचनाओं के मामले में किसी तरह की पारदर्शिता नहीं है।

डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के पूर्व ट्रस्टी टी भास्करन का कहना है,  

वन्य जीवों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं को सबसे ज़्यादा परेशानी मौतों के संदर्भ में रखी जाने वाली गोपनीयता से है। सरकार इसके नाम पर मौतों के बारे में नहीं बताती है। जबकि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के अधिकारियों का कहना है कि 'हर मौत की विशेष जांच चल रही है।

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आपको बता दें कि दुनिया के 60 फीसदी बाघ भारत में पाये जाते हैं। यहां जंगलों के क्षेत्रफल में लगातार आ रही कमी और चीन और एशिया के कुछ हिस्सों में बाघों के शरीर के हिस्से की मांग ने इनके अस्तित्व पर ख़तरा बढ़ा दिया है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस साल जनवरी से जून के बीच 58 मृत बाघ मिले हैं। इसके अलावा नौ बाघों के शरीर के हिस्से भी बरामद किए गए हैं।

एनटीसीए का कहना है कि जब तक यह जांच पूरी नहीं हो जाती मौत के कारणों के बारे में बताया नहीं जा सकता है। फील्ड ऑफिसर मौतों की जांच में लगे हुए हैं। आंकड़ों से अनुमान लगाये जा रहे हैं कि इस साल बाघों की रिकॉर्ड मौत हो सकती है। पिछले साल 120 बाघों की मौतें हुईं थीं जो साल 2006 के बाद सबसे ज़्यादा थी। साल 2015 में 80 बाघों की मौत की पुष्टि की गई थी। इससे पहले साल 2014 में यह संख्या 78 थी।

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अनुमान है कि एक सदी पहले भारत में कुल एक लाख बाघ हुआ करते थे। यह संख्या आज घटकर महज 2000 के आस-पास रह गई है। ये बाघ अब भारत के दो फ़ीसदी हिस्से में रह रहे हैं। जैसे-जैसे जंगलों पर यहां के लोगों का अतिक्रमण बढ़ना शुरू हुआ है, इनकी संख्या घट रही है। बाघों की संख्या में हो रही कमी का दूसरा बड़ा कारण है बाघों की तस्करी।

हालांकि बाघों को संरक्षित करने के लिए साल 2006 में शुरू हुए प्रयासों के बाद इनकी संख्या बढ़ी है। साल 2011 से 2016 के बीच बाघों की संख्या 1706 से 2226 हुई, लेकिन इस दिशा में बहुत कुछ करना बाकी है।


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