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कौन और कैसी थी आरुषि? नानी की जुबानी जानिये खूबसूरत परी की कहानी

अर्चित गुप्ता | 0
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| अक्टूबर 12 , 2017 , 16:24 IST | नई दिल्ली

बहुचर्चित आरुषि-हेमराज मर्डर केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डॉ. राजेश और नूपुर तलवार को बरी कर दिया है। हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए दंपति को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि जांच के दौरान सीबीआई तलवार दंपति के खिलाफ ऐसे सबूत पेश नहीं कर पाई जिसमें उन्हें सीधे दोषी माना जा सके। कोर्ट ने ये भी कहा ऐसे मामलों में तो सुप्रीम कोर्ट भी बिना पर्याप्त तथ्यों और सबूतों के किसी को इतनी कठोर सजा नहीं सुनाता। नूपुर की मां और आरुषि की नानी लता हाईकोर्ट के इस फैसले से बहुत खुश हैं। उन्हें विश्वास था कि उनकी बेटी और दामाद बेगुनाह साबित होकर घर लौट आएंगे।

आरुषि की नानी लता जी ने बताया कि डॉ. राजेश तलवार और नूपुर तलवार की शादी के करीब चार साल बाद आरुषि का दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में जन्म हुआ। उस समय तलवार दंपति साउथ दिल्ली के एक अपार्टमेंट में रहते थे। लेकिन आरुषि के पैदा होने के बाद नोएडा के जलवायु विहार में शिफ्ट हो गए। नूपुर की मां यही रहती थीं। दोनों वर्किंग थे, ऐसे में आरुषि की देखभाल का जिम्मा नानी का ही था।

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आरुषि को अपनी मम्मी से बहुत लगाव था:

आरुषि अपने मम्मी के साथ बहुत अटैच थी। स्कूल से आने के बाद वह नानी के घर जाती थी। खाना खाने के बाद वह तुरंत पढ़ने बैठ जाती थी। टीवी कम ही देखती थी, लेकिन उसे एमटीवी के म्युजिक शो बहुत पसंद थे। वह टीवी पर गाना सुनकर डांस किया करती थी। शाम को दूध पीने के बाद पड़ोस में खेलने चली जाती थी।

नानी की देखरेख में रहती थी आरुषि:

आरुषि की नानी के मुताबिक़ आरुषि पढ़ने में बहुत तेज थी। माता-पिता के क्लिनिक चले जाने के बाद वह नानी के घर आ जाती थी। शाम को वापस आते वक्त नूपुर उसे नानी के घर से लेकर आती थी। आरुषि उनके ज्यादा करीब थी। आरुषि के बाद उन्होंने कभी बच्चा नहीं चाहा। उनका कहना था कि आरुषि के पति को ही अपना बेटा मानेंगी।

गॉड गिफ्टेड और स्पेशल थी आरुषि:

आरुषि की नानी लता जी कहती हैं, 'मैं नूपुर से कहती थी कि ये लड़की गॉड गिफ्टेड है। उसके अंदर कुछ स्पेशल था। वह बहुत समझदार थी। मैं आधे घंटे के लिए भी यदि बाहर जाती, तो उससे बोल देती थी कि बेटी घर का दरवाजा बंद रखना कोई अनजान आए तो दरवाजा मत खोलना। मजाल क्या मेरे आए बिना कोई भी अनजान गेट खुलवा ले।

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आरुषि को पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज, पनीर था पसंद:

आरुषि रोज घर से पानी ले जाकर उस पेड़ में पानी डालती थी। जैसे-जैसे पेड़ बढ रहा था, वह कहती देखो गजल अब बड़ी हो रही है, वह तो मेरे साथ बात करती है। अरुषि बहुत चंचल थी। उसके कई दोस्त थे. वह उनके साथ मस्ती करती रहती थी। वीकेंड पर सभी बच्चों इकठ्ठे हो कर खेलते थे। आरुषि को पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज, पनीर बहुत पसंद था।

दोस्त की मौत पर कई दिनों तक रोई:

आरुषि के एक दोस्त थी गजल। दोनों बहुत ही अच्छे दोस्त थे। एक दुर्घटना में गजल की मौत हो गई। इसके बाद आरुषि को बहुत दुख हुआ। वह कई दिनों तक उसके लिए रोती रही। स्कूल भी नहीं गई। उसे गजल के बिना स्कूल जाना अच्छा नहीं लग रहा था। फिर फैमली स्कूल में गजल के नाम का एक पेड़ लगवा दिया, ताकि उसका एहसास उसे रहे।

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