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पुण्यतिथि विशेष : मधुबाला ने अपनी दिलकश अदाओं से हिंदी सिनेमा को दिलाई थी पहचान

आशुतोष कुमार राय, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| फरवरी 23 , 2018 , 11:42 IST

जिन्होंने अपनी दिलकश अदाओं और दमदार अभिनय से लगभग चार दशक तक सिने प्रेमियों का भरपूर मनोरंजन किया। मधुबाला का मूल नाम मुमताज बेगम देहलवी था। उनका जन्म दिल्ली में 14 फरवरी 1933 को हुआ था और आज के ही दिन यानि 23 फरवरी 1969 को ये दिलकश अदाकारा इस दुनिया से रुखसत हुईं थी।

वर्ष 1942 में मधुबाला को बतौर बाल कलाकार "बेबी मुमताज " के नाम से फिल्म बसंत में काम करने का मौका मिला। बेबी मुमताज के सौंदर्य से अभिनेत्री देविका रानी काफी मुग्ध हुई और उन्होंने उनका नाम "मधुबाला " रख दिया। उन्होंने मधुबाला से बॉबे टाकीज की फिल्म "ज्वार भाटा" में दिलीप कुमार के साथ काम करने की पेशकश भी कर दी लेकिन मधुबाला उस फिल्म में किसी कारणवश काम नहीं कर सकीं।

मधुबाला को फिल्म अभिनेत्री के रूप में पहचान निर्माता निर्देशक केदार शर्मा की वर्ष 1947 मे प्रदर्शित फिल्म "नीलकमल" से मिली। वर्ष 1949 तक मधुबाला की कई फिल्में प्रदर्शित हुई लेकिन इनसे उन्हहें कुछ खास फायदा नहीं हुआ।

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वर्ष 1949 में बांबे टॉकीज के बैनर तले बनी निर्माता अशोक कुमार की फिल्म "महल" मधुबाला के सिने कैरियर में महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुई। रहस्य और रोमांच से भरपूर यह फिल्म सुपरहिट रही और इसी के साथ बॉलीवुड में हॉरर और सस्पेंस फिल्मों के निर्माण का सिलसिला चल पडा।

वर्ष 1950 से 1957 तक का वक्त मधुबाला के सिने कैरियर के लिए बुरा साबित हुआ। इस दौरान उनकी कई फिल्में असफल रही लेकिन वर्ष 1958 मे फागुन,हावडा ब्रिज, कालापानी तथा चलती का नाम गाडी जैसी फिल्मों की सफलता के बाद मधुबाला एक बार फिर से शोहरत की बुलंदियों तक जा पहुंची।

फिल्म हावडाब्रिज में मधुबाला ने क्लब डांसर की सटीक भूमिका अदा करके दर्शकों का मन मोह लिया।इसके साथ ही वर्ष 1958 मे हीं प्रदर्शित फिल्म चलती का नाम गाडी में उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों को हंसाते हंसाते लोटपोट कर दिया।

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मधुबाला के सिने कैरियर मे उनकी जोडी अभिनेता दिलीप कुमार के साथ काफी पसंद की गई । फिल्म "तराना " के निर्माण के दौरान मधुबाला दिलीप कुमार से मोहबत करने लगीं।

पचास के दशक में स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान मधुबाला को अहसास हुआ कि उन्हें हृदय की बीमारी हो चुकी है। इस दौरान उनकी कई फिल्में निर्माण के दौर मे थी। उन दिनों मधुबाला के आसिफ की फिल्म मुगल आजम की शूटिंग में व्यस्त थी। मधुबाला की तबीयत काफी खराब रहा करती थी।

वर्ष 1960 में जब 'मुगले आजम' प्रदर्शित हुई तो फिल्म में मधुबाला के अभिनय से दर्शक मुग्ध हो गए। 60 के दशक में मधुबाला ने फिल्मों मे काम करना काफी कम कर दिया था। चलती का नाम गाडी और झुमरू के निर्माण के दौरान ही मधुबाला किशोर कुमार के काफी करीब आ गई थीं।

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कुछ समय बात दोनों ने शादी कर ली लेकिन शादी के बाद मधुबाला की तबीयत और ज्यादा खराब रहने लगी। हांलाकि इस बीच उनकी पासपोर्ट,झुमरू,बॉय फ्रेंड,हाफ टिकट और शराबी जैसी कुछ फिल्में प्रदर्शित हुई।

वर्ष 1964 में एक बार फिर से मधुबाला ने फिल्म इंडस्ट्री की ओर रुख किया लेकिन फिल्म चालाक के पहले दिन की शूटिंग में मधुबाला बेहोश हो गई और बाद मे यह फिल्म बंद कर देनी पड़ी। अपनी दिलकश अदाओं से दर्शकों के दिल में खास पहचान बनाने वाली मधुबाला 23 फरवरी 1969 को इस दुनिया को अलविदा कह गई।

देखें मधुबाला के बेहतरीन एवरग्रीन गाने-

1)- हावड़ा ब्रिज (आइये मेहरबाँ, बैठिये जाने-जाँ)

2)- मुगल ए आजम (जब प्यार किया तो डरना क्या)

3)- मुगल ए आजम(मोहे पनघट पे नंदलाल)

4)- मुगल ए आजम(तेरी महफिल में किस्मत आजमाकर)

5)- फागुन (इक परदेसी मेरा दिल ले गया)


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