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बाबरी केस: सप्रीम कोर्ट के आदेश से आडवाणी, जोशी के राष्ट्रपति बनने के सफर पर लगेगा ब्रेक?

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 19 , 2017 , 13:11 IST

इसी साल जुलाई में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना है। कयास लगाये जा रहे हैं कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी इस पद के लिए प्रबल दावेदार हैं। लेकिन अब बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इन दोनों दावेदारों को लगभग दौड़ से बाहर कर दिया है।

कोर्ट के फैसले के मुताबिक अब जोशी और आडवाणी समेत बीजेपी के 13 नेताओं पर आपराधिक षडयंत्र रचने का मुकदमा चलाया जाएगा।

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इससे पहले बीजेपी की तरफ से लगातार संकेत दिए जा रहे थे कि आडवाणी या मुरली मनोहर जोशी में से किसी एक को देश का नया राष्ट्रपति बनाया जा सकता है। राजनीतिक हल्कों में माना जा रहा था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) जोशी की दावेदारी पर विचार कर रही थी और जल्द ही इस नाम पर आम सहमति बनाने की कोशिश की जानी थी। 

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लालकृष्ण आडवाणी

अभी तक राष्ट्रपति की रेस में लालकृष्ण आडवाणी शामिल माने जा रहे थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद उनके लिए ये राह मुश्किल लग रही है। खुद उनका नैतिक अतीत उनके लिए रोड़ा है। जब 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी पीएम बने तब आडवाणी जैन हावाला कांड में नाम आने के कारण उनकी कैबिनेट का सदस्य रहना गवारा नहीं किया।

अब सवाल है कि क्या आडवाणी खुद ही राष्ट्रपति की रेस से बाहर होने का एलान करेंगे। नैतिक दबाव के साथ ही आडवाणी पर कानूनी दबाव भी है।

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उमा भारती

उमा भारती इस वक़्त मोदी कैबिनेट में मंत्री हैं और इस केस में वो भी नामज़द हैं ऐसे में उनपर भी नैतिक दबाव है कि क्या वो अपने मंत्री पद से इस्तीफा देती हैं। उनका अपना नैतिक आचरण भी यही बताता है कि उनके लिए पद पर रहना आसान नहीं होगा। बता दें कि जब 2004 में उमा भारती का नाम हुबली दंगे में आया तो उन्होंने मध्यप्रदेश की सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। अब उनके सामने सवाल है कि क्या अब वो अपने पद से इस्तीफा देंगीं?

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कल्याण सिंह

कल्याण सिंह इस वक़्त राजस्थान के राज्यपाल हैं। इस केस में वो भी नामजद हैं, लेकिन बतौर राज्यपाल उनपर कानूनी इम्यूनिटी मिली हुई है। लेकिन उनपर भी नैतिक दबाव है कि वो क्या फैसला लेते हैं।

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मुरली मनोहर जोशी को अभी मिला है पद्म विभूषण

गौरतलब है कि इसी साल मोदी सरकार ने जोशी को पद्म विभूषण सम्मान दिया है। दोनों जोशी और लालकृष्ण आडवाणी बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य हैं। हालांकि दोनों नेता शुरुआत में मोदी सरकार से असहमति के संकेत देते रहे लेकिन हाल में इन नेताओं से संबंध मोदी और अमित शाह से सुधर रहे थे।

भुवनेश्वर में पीएम ने जोशी के साथ किया था डिनर

हाल ही में भुवनेश्वर में हुई पार्टी कार्यकारिणी में पीएम मोदी और मुरली मनोहर जोशी ने अमित शाह के आमंत्रण पर एक साथ डिनर किया था। इससे पहले जून 2016 में इलाहाबाद में हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के मौके पर भी दोनों नेताओं में बढ़ती करीबी का संकेत दिया गया था। इन संकेतों के बाद माना जा रहा था कि पीएम मोदी और पार्टी अध्यक्ष उनकी उम्मीदवारी पर मुहर लगवाने की कोशिश में हैं।

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