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भारत-पाक जंग के हीरो रहे मार्शल अर्जन सिंह का निधन, आर्मी अस्पताल में थे भर्ती

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 16 , 2017 , 21:17 IST | नई दिल्ली

98 वर्षीय भारतीय वायुसेना के मार्शल अर्जन सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे। बता दें कि मार्शल अर्जन सिंह दिल्ली के आरआर अस्पताल में भर्ती थे। मिली जानकारी के मुताबिक मार्शल अर्जन सिंह को हार्ट अटैक आया था जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस दौरान उन्हें देखने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री अस्पताल पहुंचे है।

मार्शल अर्जन सिंह भारत के केवल तीन फाइव-स्टार सैन्य अधिकारियों में से एक थे। इनके अलावा फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ और फील्ड मार्शल के एम करियप्पा फाइव-स्टार सैन्य अधिकारी थे। ये तीनों ही ऐसे सेनानी हैं, जो कभी सेना से रिटायर नहीं हुए।

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मार्शल अर्जन सिंह का जीवन एक सार्थक जीवन रहा जिसमे वह सदैव अजेय रहे। उनकी कूटनीति और रणनीति से वायुसेना को कभी हार का मुंह नही देखना पड़ा। मात्र 19 वर्ष की उम्र में उन्हें आर.ए.एफ क्रैनवेल में एम्पायर पायलट प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के लिए चुना गया। वहाँ से उन्होंने अपनी उड़ान के साथ भारतीय वायुसेना को उस शिखर पर पहुंचाया की आज वह नौजवानों के लिए मिसाल बन चुके हैं।

भारतीय सेनाओं के ग्रैंड-ओल्ड मैन कहे जाने वाले और मार्शल ऑफ एयरफोर्स अर्जन सिंह के सम्मान में पश्चिम बंगाल के पानागढ़ एयरबेस को ‘अर्जन सिंह एयरबेस’ नाम दिया गया है।

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मार्शल अर्जन सिंह का जन्म 15 अप्रैल 1919 को लायलपुर (अभी फैसलाबाद, पाकिस्तान) में हुआ था और उन्होंने अपनी शिक्षा मोंटगोमरी (अभी साहिवाल, पाकिस्तान) में पूरी की। वह 19 वर्ष की उम्र में पायलट ट्रेनिंग कोर्स के लिए चुने गए। वर्ष 1944 में उन्होंने अराकन अभियान और इमफाल अभियान में स्कवाड्रन लीडर के तौर पर अपने स्कवाड्रन का नेतृत्व किया। उनके कुशल नेतृत्व के लिए उन्हें विशिष्ट फ्लाइंग क्रॉस से सम्मानित किया गया। आजादी के दिन 15 अगस्त 1947 को मार्शल ने वायु सेना के सौ से भी अधिक विमानों के लाल किले के उपर से फ्लाई -पास्ट का भी नेतृत्व किया। 

विंग कमांडर बनने के बाद वह रॉयल स्टाफ कॉलेज ब्रिटेन में प्रशिक्षण के लिए चुने गए। ग्रुप कैप्टन के तौर पर उन्होंने अंबाला क्षेत्र की कमान संभाली। एयर कमोडोर बनने के बाद उन्हें एक संचालन बेस का प्रमुख बनाया गया, जो बाद में पश्चिमी वायु कमान के नाम से जाना गया। चीन के साथ 1962 की लडाई के बाद 1963 में उन्हें वायु सेना का उप प्रमुख बनाया गया।

एक अगस्त 1964 को जब वायु सेना अपने आप को नई चुनौतियों के लिए तैयार कर रही थी, उस समय एयर मार्शल के रूप में अर्जन सिंह को इसकी कमान सौंपी गई, तब उनकी आयु केवल 44 वर्ष थी। उनके कौशल और क्षमता को देखकर उनकी प्रशंसा करते हुए तत्कालीन रक्षा मंत्री वाई बी चव्हाण ने कहा था की एयर मार्शल अर्जन सिंह एक हीरा हैं।

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वह पहले ऐसे वायु सेना प्रमुख हैं, जिन्होंने इस पद पर पहुंचने तक विमान उड़ाना नहीं छोड़ा था और अपने कार्यकाल के अंत तक वह विमान उड़ाते रहे। अपने कई दशकों के करियर में उन्होंने 60 प्रकार के विमान उड़ाए।

पाकिस्तान के खिलाफ लडाई में उनकी भूमिका के बाद वायु सेना प्रमुख के रैंक को बढाकर पहली बार एयर चीफ मार्शल किया गया। उन्हें नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया। सेवानिवृत होने पर उन्हें स्विटजरलैंड का राजदूत बनाया गया। वायु सेना में उनकी सेवाओं के लिए सरकार ने उन्हें जनवरी 2002 में वायु सेना के मार्शल के रैंक से नवाजा। यह उपलब्धि पाने वाले वह वायु सेना के एक मात्र अधिकारी हैं।


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