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'शून्य' की उत्पत्ति पर छिड़ी बहस, क्या ये हमारी सोच से 500 साल पुराना है?

ललिता सेन, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 15 , 2017 , 11:13 IST | नई दिल्ली

पूरे विश्व के लिए '0' यानी शून्य का आविष्कार भारत ने किया है। ये बात पहले ही तय है लेकिन हाल में इससे जड़ी नई जानकारी लोगों के सामने आई है। शून्य की उत्पत्ति हमारी सोच से भी सदियों पुरानी है। लेकिन अब कुछ ऐसे सबूत सामने आए हैं जिसमें शून्य की उम्र 3-4 सदी के होने की पुष्टि होती है। यानि इसका मतलब ये माना जाए कि शून्य अभी तक की मान्यता से भी 500 साल पुराना है।

ब्रिटेन की ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी में शून्य को लेकर प्राचीन भारतीय कृति मिली हैं जिसकी बखशाली पांडुलिपि में शून्य देखने को मिला है। ये बखशाली पांडुलिपि 70 भोजपत्रों पर लिखी है जिसमें गणित और संस्कृत लिखी हुई है। यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफर्ड के मार्कस डु सॉतॉय का कहना है कि यह पांडुलिपि बौद्ध भिक्षुओं के लिए तैयार की गई ट्रेनिंग मैनुअल जैसी प्रतीत होती है।

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ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में गणित के प्रोफ़ेसर मारकुस डू सॉटॉय का कहना है कि यह गणित से भरा पड़ा है, लेकिन इसमें सबसे बड़ी रोमांचक बात ये है कि हमने शून्य को पहचान लिया है, इसलिए मैं ग्वालियर के उस छोटे से मंदिर गया जहां दीवार पर शून्य लिखा है वह 9वीं सदी के मध्य का बताया जा रहा है, उम्मीद थी कि ये पांडुलिपि वहां मिलेगी। लेकिन वहां ऐसा कुछ नहीं मिला, कार्बन डेटिंग के मुताबिक ये पांडुलिपि दूसरी से चौथी शताब्दी के बीच की है, जो सबको हैरान करता है कि इसमें लिखा शून्य कितना पुराना है।

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सन् 1881 में इस पांडुलिपि को सबसे पहले में एक स्थानीय किसान ने खोजा था। जिस गांव में ये पांडुलिपि मिली थी उसी के नाम पर गांव का नाम रखा गया। अब ये गांव पाकिस्तान में है। इस पांडुलिपि को सन् 1902 में ब्रिटेन की ऑक्सफर्ड में बोडलियन लाइब्रेरी ने संग्रहित किया गया था।

इस पांडुलिपि की कार्बन डेटिंग हुई है। पहले माना जा रहा था कि ये पांडुलिपि 9वीं सदी की है लेकिन अब कार्बन डेटिंग के अनुसार इसके कुछ पन्ने 224 ईसवी और 383 ईसवी के बीच के हैं। अभी तक ग्वालियर में एक मंदिर की दीवार पर लिखे शून्य को ही सबसे पुराना अभिलेखीय प्रमाण माना जाता रहा है।

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बता दें कि, अभी तक यही माना जाता रहा कि शून्य के इस संकेत का इस्तेमाल छठी सदी में ब्रह्मगुप्त ने किया था, लेकिन अब इस दस्तावेज से शून्य का इतिहास और भी पीछे चला गया है।


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