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सब्जेक्ट योगी का, परीक्षा भी योगी की, फेल भी योगी!

icon अनिल राय | 0
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| जून 16 , 2017 , 13:24 IST | नयी दिल्ली

अभी तीन महीने भी तो नहीं हुए हैं। योगी सरकार से हिसाब मांगा जा रहा है। हिसाब इस बात का कि- योगी जी यूपी की सड़कों के गड्ढे क्यों नहीं भरे? 15 जून की तारीख आते ही आपको 15 और दिन की डेडलाइन क्यों देनी पड़ गई? और इस मोहलत के बाद भी आपके एक मंत्री चेतन चौहान (हालांकि इनके मंत्रालय का गड्ढे भरने से कोई ताल्लुक नहीं है) क्यों कह रहे हैं कि अब मौसम बरसात का आ चुका है और गड्ढे भरना मुमकिन ही नहीं है? क्यों आपके मंत्री फंड और जरूरी मैटिरियल का रोना रो रहे हैं? 

अगर ऐसे सवाल हैं, तो इन सवालों को न्योता खुद योगी आदित्यनाथ ने ही दिया है। वादा था कि 15 जून तक राज्य की सड़कें गड्ढों से मुक्त हो जाएंगी। ये खुद सीएम का वादा था। लिहाजा सवाल तो किए ही जाएंगे। किए जा भी रहे हैं। 5 साल के लिए चुनी हुई सरकार पर इतनी जल्दी सवाल उठाना ठीक नहीं है। लेकिन जब परीक्षा की तारीख कुछ परीक्षार्थी ने तय कर दी हो, तो परीक्षक भला क्या कर सकता है? लेकिन सवाल सिर्फ ये नहीं है कि योगी जी परीक्षा में फेल हो गए। सवाल ये है कि फेल हुए क्यों?  क्या जमीनी हकीकत को समझे बिना योगी जी ने गप्पें मार दीं? या मंत्रियों और अफसरों की कमजोर इच्छाशक्ति ने योगी के वादे को गड्ढे में डाल दिया?  

इसके कई कारण हो सकते हैं, लेकिन सरकार ने जो आंकड़े जारी किए हैं वो चौंकाने वाले हैं। क्योंकि सरकार के जिस मंत्री पर सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे थे, उसका दावा है कि उन्होंने अव्वल दर्जे में परीक्षा पास कर कर ली है। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और लोक निर्माण विभाग का जिम्मा संभाल रहे केशव प्रसाद मौर्य के विभाग ने 82 फीसदी सड़कों के गड्ढा मु्क्त होने का दावा किया है। इसी तरह अलग-अलग विभागों के अलग-अलग दावे हैं। लेकिन इस लिस्ट में 3 विभागों की रिपोर्ट सबको चौंका रही है। और इसमें पहला है सिंचाई विभाग। सिंचाई विभाग ने अपनी 9668 किलोमीटर सड़क में एक भी किलोमीटर सड़क को गड्ढ़ा मुक्त नहीं किया। ऐसे में इस विभाग के मंत्री और आला अधिकारियों की नीयत पर सवाल उठना लाजिमी है। क्योंकि सिंचाई विभाग का जिम्मा जिन धर्मपाल सिंह जी के पास है, उनकी गिनती उत्तर प्रदेश बीजेपी के बड़े नेताओं में होती है और विभाग के प्रमुख सचिव सुरेश चन्द्रा भी सरकार के करीबी अफसरों में माने जाते हैं।

गड्ढा मुक्त सड़कों की जो लिस्ट आई है, उसमें नीचे से दूसरा नाम है पंचायती राज विभाग का। विभाग अपनी सड़कों में से सिर्फ 9 फीसदी को गड्ढ़ा मु्क्त कर पाया है। इस विभाग के मंत्री हैं भूपेन्द्र सिंह और प्रमुख सचिव हैं चंचल तिवारी। इसी तरह लिस्ट में नीचे से तीसरे नंबर पर पर जो विभाग है, वो है गन्ना विभाग। इस विभाग ने लिट्स में नीचे से तीसरे नंबर पर अपनी जगह बनाई है। ख़ास बात ये है कि इस विभाग के प्रमुख सचिव का जिम्मा मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने अपने पास खुद रखा है। जबकि  विभाग के मंत्री हैं सुरेश राणा।

अब सवाल ये है कि हम इन तीन विभागों पर ही चर्चा क्यों कर रहे हैं। तो ये बताना जरूरी है कि ये वही विभाग हैं, जिन पर प्रदेश के किसानों के जिम्मेदारी है। किसानों की मूल जरूरतों पर नज़र डालें, तो सिंचाई, खाद-बीज और फसल की उचित कीमत का भुगतान उनकी प्राथमिक जरूरत है और इन जरूरतों को पूरा करने का काम सिंचाई विभाग, पंचायती राज विभाग और गन्ना विभाग का है।

हालांकि इस बार काम सीधे किसानों से जुड़ा नहीं था, लेकिन ये तो तय हो गया कि मुख्यमंत्री की पहली परीक्षा में ही ये विभाग फिसड्डी साबित हुए हैं। ऐसे में प्रदेश के किसानों का आगे क्या हाल होने वाला है इसकी चिंता लाज़िमी है। जिस सिंचाई विभाग के मंत्री और अधिकारिय़ों को याद भी नहीं है कि उनके पास कुछ सड़कों को गड्ढ़ा मु्क्त करने का जिम्मा भी है ! फिर उऩसे ये कैसे उम्मीद की जा सकती है कि नहरों में तय समय से पानी आ जाएगा? जो पंचायती राज विभाग अपने लिए तय समय में सिर्फ 9 फीसदी सड़कों की मरम्मत करा पाया है क्या वो किसानों को सही समय से खाद और बीज उपलब्ध करा पाएगा? गन्ना या कहें चीनी विभाग जिसकी कमान मुख्य सचिव साहब खुद संभाल रहे हैं उसने 100 में से 13 नंबर पाया है। ये आंकड़ें तब हैं जब लक्ष्य बहुत छोटा था। लेकिन किसानों को सिंचाई, खाद-बीज और फसलों का भुगतान दिलाने का काम सड़कों के छोटे-मोटे गड्ढे भरने के लक्ष्य से कहीं बहुत बड़ा होगा। बहाने ये बनाए जा सकते हैं कि दोनों कामों में फर्क है। लेकिन अगर फितरत ही काम न करने की ही हो, तो फिर उनसे रातोंरात सुधरने की उम्मीद कैसे की जा सकती है? ऐसे में योगी जी यदि चाहते हैं कि किसानों का भला हो, तो उनको इन तीन विभाग के मंत्रियों और अफसरों के पेंच अभी से टाईट करने ही पड़ेंगे। क्योंकि हमारी परीक्षा में एक विषय में फेल होने वाले को फेल माना जाता है, आगे तो अभी 3-3 सब्जेक्ट सामने पड़े हैं।


krishna

nice article