राजनीति

बुरे फंसे मनीष सिसोदिया: पहले बताया अन्ना को बीजेपी का एजेंट, अब कहा ये

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 29 , 2017 , 12:51 IST | नई दिल्ली

अन्ना हजारे के आंदोलन से दिल्ली की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी के नेता अब अन्ना हजारे पर ही अशोभनीय टिप्पणियां करने लगे हैं। दिल्ली के MCD चुनाव में आम आदमी पार्टी की हार पर प्रतिक्रिया देने के बाद समाजसेवी अन्ना हजारे आप समर्थकों की आलोचनाओं का शिकार हो रहे हैं। वैसे यह कोई नई बात नहीं है।

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दरअसल, दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एक ऐसे ट्वीट को रिट्वीट कर दिया है, जिसमें अन्ना को बीजेपी का एजेंट कहा गया है।

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हालांकि सिसोदिया ने कहा कि, मेरा अकाउंट हैक कर लिया गया है। कोई मेरे अकाउंट से अन्ना हजारे के खिलाफ ट्वीट को रिट्वीट कर रहा है।

उन्होंने कहा है कि,

कृपया उन पर विश्वास नहीं करें। मैं अन्ना जी का सम्मान करता हूं। उनके खिलाफ ऐसी बातें कभी नहीं कह सकते

गौरतलब है कि दिल्ली एमसीडी चुनाव में आप की करारी हार के बाद अन्ना ने एक बयान दिया था। जिसके खिलाफ एक ट्विटर यूजर ने ट्वीट किया कि ये बात वो फ्रॉड कह रहा है, जिसने लोकपाल को लेकर देश को ख्वाब दिखाया और अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद खामोश है।

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इस ट्वीट का जवाब देते हुए दूसरे ट्विटर यूजर ने लिखा कि इसमें कोई शक नहीं है कि उसने लोकपाल का ख्वाब दिखाया। अब मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हूं कि वो बीजेपी के एजेंट है। और हैरानी की बात यह है कि इन आप समर्थकों की टिप्पणियों को दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने रीट्वीट भी किया है।

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अन्ना हजारे ने कहा था आप को सत्ता की भूखी

गौरतलब है कि 2 दिन पहले MCD चुनाव का रिजल्ट आने के बाद अन्ना हजारे ने AAP की शर्मनाक हार पर कहा था कि पार्टी सत्ता की भूखी है और अपनी विश्वसनीयता खो चुकी है। चुनाव लड़ने के फैसले से लेकर सभी सुख-सुविधाएं हासिल करने के लिए उन्होंने कभी अपने चेले रहे और वर्तमान में दिल्ली के मनीष सिसोदिया ने केवल यही ट्वीट रीट्वीट नहीं किया बल्कि एक और ट्वीट भी रीट्वीट किया है जिसमें कहा गया है कि अन्ना केजरीवाल को कोसने का कोई मौका नहीं छोड़ते लेकिन लोकपाल नियुक्त करने की मोदी की असफलता पर वह क्यों खामोश हैं।

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अन्ना आंदोलन से ही आम आदमी पार्टी का जन्म

गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी और केजरीवाल, सिसोदिया और गोपाल राय जैसे नेता अन्ना हजारे के आंदोलन की ही उपज हैं लेकिन समय के साथ-साथ इनके बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं। अन्ना तभी से केजरीवाल के खिलाफ हैं जबसे केजरीवाल ने आंदोलन की राह छोड़कर राजनीति में उतरने का फैसला किया था।

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