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रमजान में आतंकियों पर रहम क्यों? J&K में 1 महीने बंद रहेगा 'ऑपरेशन ऑलआउट'

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मई 16 , 2018 , 17:27 IST

रमजान महीने के दौरान सेना जम्मू-कश्मीर में अपना ऑपरेशन स्थगित रखेगी। सेना इस दौरान किसी तरह का ऑपरेशन नहीं चलाएगी लेकिन उस पर इस दौरान हमला होता तो वह जवाबी करने के लिए आजाद होगी। गृह मंत्रालय ने इस बारे में ट्वीट कर जानकारी दी है।

सीएम महबूबा मुफ्ती ने एकतरफा सीजफायर की मांग की थी

गृह मंत्रालय का कहना है कि अगर निर्दोष लोगों को आतंकियों ने निशाना बनाने की कोशिश की तो सुरक्षाबलों को कार्रवाई करने का अधिकार होगा। सरकार को उम्मीद है रमजान के पवित्र दिनों में सरकार और सुरक्षाबलों को लोग सहयोग देंगे। सरकार की तरफ से जम्मू-कश्मीर में शांति कायम करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। इसके पहले जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने घाटी में रमजान के दौरान एकतरफा सीजफायर की मांग की थी।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ये जरूरी है कि जो लोग इस्लाम के नाम पर बेगुनाहों का खून बहाते हैं, उन्हें समाज से अलग किया जाए। बिना किसी वजह किसी का खून बहाना या भय का माहौल पैदा करना सामान्य जीवनशैली के खिलाफ है।

700 से ज्यादा बार हो चुका है सीजफायर का उल्लंघन

पाकिस्तान ने इस साल जम्मू कश्मीर में इंटरनेशनल बॉर्डर और लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पास 720 से अधिक बार सीजफायर का उल्लंघन किया है। सीजफायर उल्लंघन की यह घटना पिछले 7 साल में सबसे अधिक है।केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने इस साल अक्टूबर तक इंटरनेशनल बॉर्डर और लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पास 724 बार सीजफायर उल्लंघन किया है जबकि वर्ष 2016 में यह संख्या 449 थी।गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने आंकड़े का हवाला देते हुए कहा कि अक्टूबर तक सीमा पार से हुई गोलीबारी में कम से कम 12 स्थानीय नागरिक मारे गए और 17 सुरक्षा कर्मी शहीद हो गए। इसके अनुसार सीमा पार से हुई गोलीबारी में कुल 79 स्थानीय नागरिक और 67 सुरक्षा कर्मी घायल हुए।

11 महीने के दौरान ऑपरेशन ऑलआउट में मारे गए 200 आतंकी

कश्मीर घाटी में आतंकियों के सफाए के लिए शुरू किया गया ऑपरेशन ऑल आउट में मारे गए आतंकियों की संख्या डबल सेंचुरी के आंकड़े को पार कर गई। बीते सात साल में यह पहला मौका है, जब किसी एक साल के पहले 11 माह के दौरान जम्मू कश्मीर में मारे गए आतंकियों की संख्या 200 के पार पहुंची हो। वर्ष 2010 में 232 आतंकी मारे गए थे।

ऑपरेशन ऑल आउट का असर सिर्फ आतंकी संगठनों के भीतर ही नहीं, कश्मीर के गली-मोहल्लों में सक्रिय उनके समर्थकों और ओवरग्राउड नेटवर्क पर भी नजर आ रहा है। मुठभेड़ के समय आतंकियों को बचाने के लिए घरों से बाहर निकलने वाली हिंसक भीड़ भी गत जुलाई के बाद लगातार कम होती जा रही है। अधिकांश ओवरग्राउंड वर्कर भूमिगत हो चु़के हैं और कई खुद ही पुलिस के समक्ष सरेंडर करने पहुंच रहे हैं, जबकि 40 से ज्यादा ओवरग्राउंड वर्कर पकड़े जा चुके हैं।


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