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नोटबंदी एक ऐतिहासिक फैसला, इकोनॉमी का भविष्य बदलने के लिए जरूरी था: जेटली

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| नवंबर 7 , 2017 , 15:57 IST | नई दिल्ली

नोटबंदी के एक साल पूरा होने पर फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि नोटबंदी का फैसला अभूतपूर्व था। सरकार ने इसके जरिए अर्थव्यवस्था के भविष्य को बदलने का काम किया है। इसके पहले जेटली ने ब्लॉग लिखकर नोटबंदी से हुए फायदे गिनाए। बता दें कि पिछले साल 8 नवंबर को मोदी सरकार ने 500 और 1000 रुपए के नोट चलन से बाहर करने का एलान किया था। तब केंद्र की ओर से कहा गया था कि ये फैसला कालेधन, जाली करंसी और टेरर फंडिंग पर रोक लगाने के लिए लिया गया है। उधर, कांग्रेस नोटबंदी को फेल बताती रही है और बुधवार को 'ब्लैक डे' मनाएगी।

एक साल पहले का यथार्थ बदलना था

जेटली ने कहा, "सरकार का ये आदेश हुआ था कि जो बड़े नोट हैं वो लीगल टेंडर नहीं रहेंगे। कुछ वक्त के लिए, कुछ चीजों के लिए उस करंसी का प्रयोग हो सकता था। इसके बाद रिजर्व बैंक ने नई करंसी अनाउंस की थी।

उन्होंने कहा कि ये एक वॉटरशेड मूवमेंट था हमारी अर्थव्यवस्था के लिए। पूरे साल इस पर चर्चा होती रही। बीजेपी की ओर से हम लोग ये मानते हैं कि देश की अर्थव्यवस्था और देश के व्यापक भविष्य के लिए जो यथार्थ था उसे बदलना था। किसी भी अर्थव्यवस्था में कैश का डोमिनेशन 12.2 फीसदी हो और उसमें भी 86 फीसदी बड़े नोट हों। एक स्वाभाविक विचार है कि अगर कैश ज्यादा होता हो तो टैक्स इवेजन ज्यादा होता है।

इससे ये होता कि जो टैक्स देता है वो उसका भी देता है जो टैक्स नहीं देता। यानी वो दोहरा कर देता है। क्योंकि टैक्स तो देना ही है। इसलिए साधन संपन्न आदमी जब साधन को जेब में रख लेता है तो ये अन्याय है। क्योंकि ये गरीब का हक है।

राजनीति में ज्यादा कैश करप्शन की वजह

राजनीतिक व्यवस्था में जब ज्यादा कैश होता है तो ये एक भ्रष्टाचार का केंद्र और कारण बनता है। लेकिन, इस पर रोक लगाना कठिन होता है। सरकार ने एक के बाद एक कदम उठाए। एसआईटी, ब्लैक मनी लॉ, विदेशों से ट्रीटी को संशोधित करना। ट्रांसपेरेंसी ज्यादा लाना। खर्च किस तरह से हो। उस पर कंडीशन लगाना, बेनामी कानून लाना। इन डायरेक्ट व्यवस्था बदलना। इसके कई स्वाभाविक परिणाम हमने साल भर में देखे हैं।

कैश का बैंकों के अंदर आना। इसलिए चाहे उसका एक्सपेंडिचर म्युचुअल फंड में हो, इंश्योंरेंसेज में हो। इन सब क्षेत्रों में अगर हम देखें तो पिछले एक साल में रिर्सोस बढ़े हैं। बैंकों के पास पैसा आया। फॉर्मल इकोनॉमी में पैसा और सुधार आया। नोटबंदी हर समस्या का हल नहीं है। लेकिन, इसने एजेंडा बदला।


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