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रियल एस्टेट भी आ सकता है GST के दायरे में, अरुण जेटली ने दिया संकेत

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अक्टूबर 12 , 2017 , 13:35 IST | नई दिल्ली

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि रियल एस्टेट एक ऐसा क्षेत्र है जहां सबसे ज्यादा कर चोरी होती है इसलिए इसे जीएसटी के दायरे में लाने का मजबूत आधार है। जेटली ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में व्याख्यान देते हुए कहा कि इस मामले पर गुवाहाटी में 9 नवंबर को होने वाली जीएसटी की अगली बैठक में चर्चा की जाएगी। जेटली आईएमएफ और वर्ल्‍ड बैंक की सालाना मीटिंग में शामिल होने के लिए हफ्तेभर के अमेरिकी दौरे पर हैं।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, ‘‘अगली बैठक में (जीएसटी परिषद की) में हम इस समस्या पर कम से कम चर्चा तो करेंगे ही। कुछ राज्य इसे (रियल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाना) चाहते हैं और कुछ नहीं। यह दो मत हैं और चर्चा करने के बाद हमारी कोशिश होगी कि एक मत पर सहमति बनायी जाए।’’

उन्होंने कहा कि इसका लाभ उपभोक्ताओं को होगा जिन्हें पूरे उत्पाद पर केवल ‘अंतिम कर’ देना होगा और जीएसटी के तहत यह अंतिम कर लगभग न के बराबर होगा। जेटली ने भारत में टैक्‍स रिफॉर्म्‍स पर ‘एनुअल महिंद्रा लेक्‍चर’ में कहा भारत में रियल एस्टेट एक ऐसा सेक्‍टर है जहां सबसे ज्यादा टैक्‍स चोरी और कैश पैदा होती है और वह अब भी जीएसटी के दायरे से बाहर है। कुछ राज्य इस पर जोर दे रहे हैं। मेरा व्यक्तिगत तौर पर मानना है कि जीएसटी को रियल एस्टेट के दायरे में लाने का मजबूत आधार है।

जेटली ने कहा है कि भारत सरकार बैंकिंग सेक्‍टर की क्षमता के रिकंस्‍ट्रक्‍शन के प्‍लान पर काम कर रही है ताकि यह विकास में योगदान दे सके। उन्होंने यह भी उन्होंने यह भी कहा कि बैंकिंग सिस्‍टम में रिफॉर्म सरकार का शीर्ष एजेंडा है। बोस्टन में हार्वर्ड विश्वविद्यालय के छात्रों से जेटली ने कहा कि आज ग्‍लोबल ग्रोथ की दिशा बदल गई है। हमें बैंकिंग सेक्‍टर की क्षमता का रिकंस्‍ट्रक्‍शन करना होगा। एक सवाल के जवाब में जेटली ने प्राइवेट सेक्‍टर का एक्‍सपेंशन नहीं होने को खारिज किया।

फाइनेंस मिनिस्‍टर जेटली ने कहा कि भारत में एक सुस्त टैक्स सिस्टम है। हम इसमें बदलाव लाने का प्रयास कर रहे हैं। हम टैक्स बेस को बढ़ा रहे हैं, अभी कैश एक बड़ी समस्या है। जेटली ने कहा कि नोटबंदी को लोगों ने ठीक तरीके से नहीं समझा। बैंक में पूरा पैसा आ जाने का मतलब यह नहीं है कि पूरा पैसा लीगल ही हो। हम टैक्स को ऑनलाइन भरने के लिए आसान बना रहे हैं। जेटली बोले कि भारत में सिर्फ 55 लाख लोगों ने ही जीएसटी के तहत टैक्स भरा है। उनमें से भी 40 फीसदी लोगों ने जीरो टैक्स दिया है। भारत में सबसे कम पर्सनल इनकम का ग्राफ है। जेटली ने बताया कि देश में जो लग्‍जरी सेग्मेंट है। उनकी इनकम को अब उनके खर्च के आधार पर ट्रेस किया जा सकेगा।


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