राजनीति

केरल RSS कार्यकर्ता हत्या : जेटली बोले- ऐसे तो आतंकी को भी नहीं मारा जाता

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 6 , 2017 , 19:20 IST | तिरुअनंतपुरम

केरल पहुंचे वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि जिस तरह की हिंसा केरल में हो रही है, अगर वह बीजेपी या एनडीए शासित किसी राज्य में होती तो देश में अवॉर्ड वापसी का दौर शुरू हो जाता और संसद को ठप कर दिया जाता। उन्होंने पूछा कि आखिर एलडीएफ (लेफ्ट डेमोक्रैटिक फ्रंट) के सत्ता में आते ही इस तरह की हिंसा क्यों शुरू हो जाती है। वित्त मंत्री ने कहा कि अगर पुलिस और राज्य सरकार ने इस तरह के मामलों में निष्पक्षता के साथ कार्रवाई नहीं की तो प्रदेश में हिंसा का माहौल कभी खत्म नहीं होगा।

जेटली ने यहां आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि,

यह दुखद है कि LDF के सत्ता में आते ही हिंसा की घटनाएं शुरू हो जाती है। राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की हत्या होने लगती है। राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्या होती है और पुलिस मूकदर्शक बनी रहती है। बीजेपी और आरएसएस के कार्यकर्ताओं के घर पर हमले हो रहे हैं। संघ कार्यकर्ता राजेश के शरीर पर जिस तरह के जख्म पाए गए थे, उसे देखकर आतंकवादी भी शर्मा जाते।

 जेटली ने केरल सरकार पर कसा तंज

उन्होंने कहा कि आखिरकार यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि दोषियों पर कार्रवाई हो और उन्हें कड़ी सजा मिले। पुलिस से निष्पक्ष होने की उम्मीद की जाती है।'
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की जाती है तो हिंसा का माहौल कभी खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा, 'मैं यहां आया हूं पीड़ित परिवार के प्रति प्रतिबद्धता जताने के लिए। मैं सभी दलों से अपील करता हूं, खास तौर पर सत्ताधारी दल और राज्य सरकार से कि वे इस तरह के मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई का समर्थन करें।'
वरिष्ठ बीजेपी नेता ने कहा ने केरल में हो रही हिंसा पर कुछ राजनीतिक दलों और बुद्धिजावियों के एक वर्ग की कथित चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए।

दी नसीहत-काडर को रखें अनुशासित

उन्होंने तंज कसते हुए कहा, 'इस तरह की हिंसा के लिए दोहरा रवैया नहीं अपनाया जा सकता। जैसा केरल में हुआ वैसा अगर किसी बीजपी या एनडीए शासित राज्य में हुआ होता तो अवॉर्ड वापसी शुरू हो जाती, संपादकीय लिखे जाते, संसद को चलने नहीं दिया जाता। देश में और देश के बार इसे लेकर कैंपेन शुरू हो जाते। जिन्होंने पहले ऐसा किया था अब वे शांत बैठे हैं। जरूरत निष्पक्षता की है। राज्य सरकार को राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है ताकि वह अपने काडर को अनुशासित रख सके।


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