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काले हिरणों की खातिर...

icon अश्विनी कुमार | 8
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| अप्रैल 11 , 2018 , 19:05 IST

 5 साल जेल और 10,000 जुर्माने से बदलेगी जानवरों को लेकर सोच?

सलमान खान को 5 साल कैद की सजा हुई। दो रात जेल में गुजारने के बाद ‘भाईजान’ को जमानत भी मिल गई। उनके खिलाफ काले हिरण की हत्या का जुर्म साबित हो गया है। लिहाजा इस जमानत से न सलमान की जीत हुई है और न ही विश्नोई समाज की हार। माननीय जज देवकुमार खत्री ने अपने आदेश में कहा है कि- "सलमान खान चर्चित कलाकार हैं। उनके किए कामों को आम लोग फॉलो करते हैं। इसके बावजूद उन्होंने दो वन्य जीव यानी काले हिरणों का शिकार किया है।" अदालत कानून के हिसाब से काम करता है और फैसले देता है। जोधपुर की अदालत ने भी वही किया है।

27 दिसंबर 1965 को पैदा सलमान खान ने जब अपराध को अंजाम दिया, तब वे कोई 33 साल के थे। कई हिट फिल्में तब तक सलमान जरूर दे चुके थे, लेकिन उतने बड़े यूथ आइकन भी नहीं थे, जितने कि आज हैं। तब सोशल मीडिया का भी कहीं कोई जलवा भी नहीं था, जिस पर युवा उन्हें फॉलो कर दीवाने हो रहे हों। इन 20 सालों में बहुत कुछ बदल गया। सलमान से सहानुभूति न रखते हुए भी इस बात का जिक्र जरूरी है कि इन वर्षों में सलमान न सिर्फ पर्दे पर अपनी धाक कायम कर सैकड़ों करोड़ के कलेक्शन की गारंटी बने, बल्कि ‘बीइंग ह्यूमन’ जैसी पहल के साथ अपनी एक अलग पहचान भी बनाई। लेकिन आपका कद आपको न जुर्म की छूट देता है और न ही सजा में राहत का हकदार बनाता है। फिर भी अगर किसी समाज में एक खास किस्म का जुर्म बार-बार दोहराया जाता है, तो उस समाज की व्यवस्था और मान्यताओं पर गौर करने की जरूरत भी पैदा होती है। ये भी देखना पड़ जाता है कि ऐसे जुर्म को लेकर क्या समाज ने अपने लोगों को शिक्षित करने की कोई व्यवस्था की है? और हमें मानना पड़ेगा कि जानवरों के प्रति क्रूरता हमारे समाज में बार-बार दोहराया जाने वाला अपराध है।

पिछले साल सितंबर महीने में मद्रास हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा था कि- "एनिमल वेलफेयर से जुड़े कानून और नियम स्कूलों में बच्चों को पढ़ाए जाएं। देश में जानवरों के प्रति बढ़ती हिंसा इस वजह से है क्योंकि हमारे समाज में जानवरों से जुड़े कानून को नजरअंदाज करने का भाव है। इस बारे में CBSE ने सहमति भी दी है लेकिन राज्य सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला।" मद्रास हाईकोर्ट का आदेश ये समझने के लिए काफी है कि अपने देश में जानवरों के अधिकारों को लेकर कितना अनमनापन है। दरअसल, सच तो ये है कि जानवरों के अधिकारों को लेकर हमारे अंदर कहीं-न-कहीं तिरस्कार का भाव है। जानवरों की रक्षा को लेकर लड़ रहे संगठन भी मानते हैं कि हमारी बुनियाद में ही जानवरों को लेकर सहानुभूति जैसी कोई बात नहीं है (पालतू जानवरों को छोड़कर)। क्योंकि स्कूलों में हम अपने बच्चों को ऐसा कोई पाठ नहीं पढ़ाते।

जानवरों को लेकर कितने असंवेदनशील हैं हम

शायद ये भी वजह है कि सर्वोच्च अदालत से जल्ली-कट्टू खेल पर प्रतिबंध के बावजूद सरकार पब्लिक की भावनाओं के नाम पर उसे रोकने का साहस नहीं दिखाती। 20 साल से अदालती रोक के बाद भी गोवा में बैलों को शराब पिलाकर लड़ाया जाता है। कर्नाटक में कंबाला का खेल खुलेआम होता है। इसमें गायों को पानी की तेज धार में दौड़ाते हुए उनकी पिटाई तक की जाती है और इस दौरान कई गायें जख्मी होकर मारी भी जाती हैं। असम में कोर्ट से रोक के बाद भी बुलबुलों की लड़ाई कराई जाती है, तो गुजरात में पतंग उत्सव के दौरान हजारों पक्षी उन मांझे से कटकर मारे जाते हैं, जिन पर रोक लगी हुई है। आंध्र प्रदेश में मुर्गों को पिंजरों में रखकर तब तक परेशान किया जाता है, जब तक कि वो हिंसक न हो जाएं। इसके बाद इनके पंजों में धारदार ब्लेड बांधकर मुर्गों की लड़ाई कराई जाती है। मुर्गों के शरीर से खून बह रहा होता है। इंसान तालियां बजा रहा होता है।

ऐसे उदाहरणों की फेहरिस्त शायद सैकड़ों में हैं। तो क्या इनकी बिना पर सलमान को माफी मिल जानी चाहिए? बिल्कुल नहीं। लेकिन सवाल है कि जानवरों के खिलाफ हिंसा की एवज में जेल से उन जानवरों को कितना भला हो सकता है? क्या सजा की शक्ल में ऐसे और विकल्प नहीं हो सकते, जिनसे काले हिरण या दूसरे जानवरों का बेहतर संरक्षण और संवर्धन हो सके?

दुनिया के कई देशों में जुर्माने पर जोर

तो दुनिया भर के कुछ उदाहरण गौर करने लायक है। हमारे यहां काले हिरण के शिकार के लिए सलमान खान पर 10 हजार का जुर्माना लगाया जाता है, तो मलेशिया में वन्य जीव कानून तोड़ने पर 14 लाख तक का जुर्माना होता है और बेल्जियम में 3 लाख यूरो। ग्रीस में 3 लाख यूरो तक जुर्माने का प्रावधान है। फिनलैंड में सजा सिर्फ 1 साल मिलती है, जबकि जुर्माना 2.5 लाख यूरो तक होता है। आयरलैंड में भी जानवरों पर क्रूरता के लिए एक लाख यूरो तक जुर्माना वसूला जाता है। इन उदाहरणों से साफ है कि इन देशों में जोर दोषी को जेल में डालने से ज्यादा उससे रकम वसूलने और जानवरों के भले के लिए खर्च करने पर होता है। सलमान के मामले में एक तर्क समाज को संदेश देने की जरूर है। तो तय हमें ही करना है कि 5 साल की जेल अगर सख्त संदेश है, तो महज 10 हजार का जुर्माना क्या संदेश देता है?

विश्नोई समाज की निष्ठा कमाल की है

जोधपुर का बिश्नोई समाज काले हिरण को अपने गुरु भगवान जंबाजी का अवतार मानता है। वे काले हिरण और वृक्षों के लिए अपनी जान तक दे सकते हैं। समाज की महिलाएं काले हिरण के अनाथ बच्चों को स्तनपान तक कराती हैं। बिश्नोई समाज मानता है कि वन्य जीव की रक्षा से बैकुंठ मिलता है। वन्य प्राणियों के लिए ये लोग रियासत काल में भी हुकूमत से लड़ते रहे हैं। 1787 में जोधपुर के राजा अभय सिंह के सिपाही पेड़ काटने पहुंचे थे तो पेड़ों की रक्षा के लिए 363 विश्नोई समाज के लोगों ने प्राणों का बलिदान दे दिया था। जाहिर है जानवरों को लेकर ऐसी आस्था रखने वालों की संवेदना पर किसी तरह की ठेस पहुंचाने की हम सोच भी नहीं सकते।

राजस्थान का विश्नोई समाज ही क्यों, उड़ीसा के गंजाम जिसे से काले हिरण का नाता सुनकर आप चौंक जाएंगे। कहते हैं कि एक समय वहां सूखा पड़ने से पूरा इलाका परेशान हो उठा। लोगों के लिए खाने-पीने का कोई स्रोत तक नहीं बचा था। तभी सूखे के दौरान ही दो काले हिरणों को देखा गया। और जिस दिन ये काले हिरण वहां नजर आए उसके ठीक बाद वहां अच्छी बारिश हुई। तब से इलाके में अब तक कभी सूखा नहीं पड़ा है। ये सिर्फ मान्यता हो सकती है, लेकिन विश्नोई समाज की पर्यावरण और जानवरों को लेकर निष्ठा अतुलनीय है।

5 साल जेल और 10 हजार जुर्माना ही विकल्प?

तो रास्ता क्या है? कानून के लिहाज से यकीनन सलमान दोषी हैं। लेकिन देखना ये है कि ऐसे मामलों में आईंदा व्यवस्था क्या होनी चाहिए? जानवरों का भला दोषी को जेल भेज देने भर और उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाकर होगा या उससे उन जानवरों के हक में कुछ जिम्मेदारियां पूरी कराने में। जाहिर है इसके लिए नियम और कानून भी बदलने पड़ सकते हैं। क्या सलमान के मामले से सबक लेते हुए नियम बदलने की पहल होगी? क्या स्कूलों में इस बात का पाठ बच्चों को पढ़ाया जाएगा कि जानवरों के लिए संवेदना कितनी बड़ी बात है और पर्यावरण के लिए ये कितना जरूरी है?

13 साल के बच्चे ने दुखी मन से पूछा- सलमान खान को 5 साल की जेल क्यों हो गई? अब बिग बॉस का अगला सीजन कौन होस्ट करेगा?

मैंने उसे जवाब दिया- सलमान ने काले हिरण की हत्या कर दी थी।

बच्चे ने कहा- हिरण की ही तो हत्या की थी, इसमें ऐसा क्या हो गया?

मैंने कहा- ये बहुत बड़ा अपराध है। इतना बड़ा कि तुम सोच भी नहीं सकते हो।

मैंने जवाब दे दिया। बच्चे ने आगे सवाल भी नहीं किया। लेकिन वो इस बात पर सहमत होता हुआ नहीं दिखा कि सलमान खान ने कोई बड़ा अपराध किया है।

क्यों?

क्योंकि न घर में, न समाज में और न ही स्कूल में उसे इस बात की शिक्षा दी गई है। फिर बड़ा होकर ये बच्चा जानवरों को लेकर कैसे और कितना संवेदनशील बनेगा? यक्ष प्रश्न यही है।