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असम और अरुणाचल से आंशिक तौर पर गृह मंत्रालय हटा सकता है AFSPA!

अनुराग गुप्ता, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 5 , 2017 , 12:40 IST | नई दिल्ली

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट (अफ्स्पा) को असम और अरुणाचल प्रदेश से हटाने की उम्मीद जताई है। अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय ने बीजेपी शासित प्रदेश असम और अरुणाचल में मौजूदा सुरक्षा स्थिति में सुधार को देखते हुए यह फैसला किया है।

एक अधिकारी ने बताया कि दोनों राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति में सुधार देखते हुए यह पहल की गई है। उन्होंने बताया कि आंकलन रिपोर्ट से स्पष्ट है कि दोनों राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था पहले से बेहतर हुई है। जिसके मुताबिक अफ्स्पा को आंशिक रूप से हटाए जाने के लिए प्रदेश सरकारों से राय ली गई।

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बता दें कि कुछ वक्त पहले इन राज्यों में अफ्सपा की समय सीमा को घटाने की भी पहल की गई थी। हालांकि मई के महीनें में केंद्र सरकार ने अफस्पा की अवधि में तीन महीने का इजाफा करते हुए असम को अशांत राज्य घोषित कर दिया।

वहीं केंद्र सरकार की एक अन्य अधिसूचना के जरिए अरुणाचल प्रदेश के तीन जिलों (तिराप, चांगलांग व लागडिंग) को अशांत माना। दरअसल, यह कानून अरुणाचल में जनवरी 2016 से अमल में आया।

क्या है अफ्स्पा?

सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम यानी आफ्स्पा एक कठोर कानून है, जो पूर्वोत्तर के सभी सात राज्यों मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, अरूणाचल प्रदेश, असम और त्रिपुरा में लागू है। जिसे संसद ने ग्यारह सितंबर 1958 को लागू करने की मंजूरी दी थी। फिर 1990 में जम्मू-कश्मीर में भी ‘आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर एक्ट’ लागू हो गया।

सेना को विशेषाधिकार : 

इस कानून के तहत सेना को विशेषाधिकार हासिल है। संदेह के आधार पर बिना वारंट के किसी की भी तालाशी ली जा सकती है और गिरफ्तार किया जा सकता है। इतना ही नहीं शक होने पर किसी पर भी गोली भी चलाई जा सकती है।

दरअसल नागा विद्रोहियों को ‘नियंत्रित’ करने के लिए बाईस मई 1958 को इस कानून को अमल में लाया गया था। हालांकि नागा जनता ने आफ्सपा का विरोध किया था वहीं सरकार ने भरोसा दिया था कि इसे जल्द ही हटा लिया जायेगा, पर ऐसा हुआ नहीं।

AFSPA

आफ्स्पा का व्यापक विरोध : र्चित कानून आफ्स्पा की राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा हुई। मानवाधिकार संगठनस्वतंत्र जांच आयोग और सरकार द्वारा गठित आयोग सभी ने आफ्स्पा को हटाने की अनुशंसा की है।  

आयरन लेडी के नाम से मशहूर इरोम शर्मिला चानू ने इस कानून के विरोध में करीब 16 वर्षों तक अनशन किया। संयुक्त राष्ट्र ने भी इरोम की मांग को वाजिब ठहराते हुए इस आफ्स्पा को पहले ही हटाने का आग्रह कर चुका है।


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