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जुनैद के अब्बा का आरोप- सीट का तो बहाना था, धर्म के आधार पर बेटे को मार डाला!

राघवेन्द्र द्विवेदी, संवाददाता, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 25 , 2017 , 20:58 IST | बल्लभगढ़

सीट खाली करने की बात से बहस शुरू हुई लेकिन फिर उन्होंने बीफ़ खाने का आरोप लगाते हुए पाकिस्तान जाने की बात कही और मारपीट करने लगे। अचानक उन्होंने चाकू निकाल कर हमला कर दिया। ट्रेन की बोगी में बैठे लोग सिर्फ देखते रहे किसी ने मदद नहीं की। ये बयान है घटना के एक चश्मदीद गवाह मोहसिन का।

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बल्लभगढ़ के खंदावली गांव में रहने वाला मोहसिन जुनैद हत्याकांड का चश्मदीद गवाह है। उस घटना का ज़िक्र आते ही मोहसिन के चेहरे के भाव बदल जाते हैं। डर की लकीरें नज़र आती हैं। ऐसा हो भी क्यों न। उसके दोस्त जुनैद की सरेआम चाकुओं से गोद कर हत्या जो कर दी गई।

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क्या है पूरा मामला

मामला गुरुवार शाम का है जब 16 साल का जुनैद अपने दो भाइयों शाकिर, हाशिम और दोस्त मोहसिन के साथ ईद की खरीदारी करके दिल्ली से वापस बल्लभगढ़ जा रहा था। ये सब सदर बाज़ार से दिल्ली-मथुरा ईएमयू में सवार हुए थे। तुगलकाबाद से कुछ लोग उसी बोगी में चढ़े जिसमें जुनैद अपने भाइयों और दोस्त के साथ बैठा था। उन लोगों ने जुनैद से सीट खाली करने के लिए कहा लेकिन बातचीत में बात बढ़ गई और चाकूबाज़ी तक पहुंच गई।

बोगी में सवार अन्य मुसाफ़िर तमाशबीन बने रहे किसी ने बीच-बचाव नहीं किया। जुनैद का गांव खंदावली बल्लभगढ़ रेलवे स्टेशन के पास पड़ता है लिहाजा जुनैद और उसके साथी बल्लभगढ़ उतरना चाहते थे लेकिन हमलावरों ने उतरने नहीं दिया। किसी तरह ये लोग अगले स्टेशन असावटी उतरे। खून से लथपथ जुनैद ने स्टेशन पर ही दम तोड़ दिया।

बच सकती थी जुनैद की जान

मोहसिन का आरोप है कि एम्बुलेंस सूचना देने के करीब 1 घंटा देर से पहुंची। अगर एम्बुलेंस समय से पहुंच जाती तो जुनैद की जान बच सकती थी। जुनैद का भाई शाकिर भी गंभीर रूप से घायल हुआ है। शाकिर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती है। 'न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया' के संवाददाता राघवेंद्र द्विवेदी ने खंदावली पहुँच कर जुनैद के परिवार से बात की। जुनैद के वालिद जलालुद्दीन का कहना है कि,

ये सीट का मामला नहीं है धर्म का मामला है। कथित गोभक्तों की गुंडई है। बीफ़ (गोमांस) खाने का झूठा आरोप लगा कर मेरे बेटे को मार दिया गया। गुनाहगारों को फांसी पर चढ़ा देना चाहिए

बल्लभगढ़ के मौलाना ज़ाकिर हुसैन जलालुद्दीन की बात को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि,

आजकल माहौल ऐसा हो गया है कि खुद को गोरक्षक कहने वाले जब भी किसी दाड़ी-टोपी वाले को देखते हैं उसे परेशान करना शुरू कर देते हैं

दो लोगों की हुई है गिरफ्तारी

इस मामले में दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है लेकिन ताहिर हुसैन इसे नाकाफी बताते हुए कहते हैं कि हमे इंसाफ़ चाहिए। साबिर खान का कहना है कि अब तक सरकार का कोई व्यक्ति गांव आकर पीड़ित परिवार से नहीं मिला। गांव में अमन-चैन से रहने की बात करने वाले साबिर का कहना है कि इस घटना के बाद भी गांव में शांति है।

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खंदावली बड़ा गांव है। अधिकांश मुस्लिम आबादी है। कुछ हरिजन परिवार भी गांव में रहते हैं। ताहिर हुसैन बताते हैं कि गांव में साम्प्रदायिक तनाव कभी नहीं रहा। सब मिलजुल कर रहते आये हैं लेकिन इस घटना ने सभी को हिला कर रख दिया। भला मुस्लिम होने की ये सज़ा उन्हें कोई कैसे दे सकता है।

ईद की खरीदारी करने जुनैद गया था दिल्ली

गांव के लोगों ने 'न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया' को बताया कि जुनैद बहुत होनहार लड़का था। रमजान के महीने में हर दिन लोगों के सामने क़ुरान का पाठ करने की वजह से हदिया में उसे इनाम के तौर पर जो रुपये मिले थे उन रुपयों से जुनैद ईद के लिए खरीदारी करने दिल्ली गया था।

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ईद से पहले जुनैद के घर में मातम पसरा हुआ है। परिवार, पड़ोस और गांव के लोगों के चेहरे पर डर और हैरानी के भाव हैं। इंसाफ़ की उम्मीद है लेकिन उस उम्मीद के इर्द-गिर्द कई सुलगते सवाल भी हैं। सवालों के घेरे में हमलावर तो हैं ही, बड़ा सवाल उन लोगों के लिए भी है जो मौका-ए-वारदात पर तमाशबीन बने रहे।

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