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अजमेर दरगाह के दीवान ने कहा- गोमांस ना खाएं मुसलमान, गोहत्या पर बनें सख्त कानून

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 5 , 2017 , 12:18 IST | अजमेर

अजमेर के ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के दीवान आबेदीन ने बड़ा बयान दिया है। दीवान ने खुद तो गोवंश के मांस का त्याग करने का एलान किया ही है, मुस्लिम समाज के लोगों से भी गोवंश का मांस नहीं खाने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि,

गोवंश हिन्दुओं की आस्था का प्रतीक है तो सभी धर्मो के मानने वालों को इसकी रक्षा करनी चाहिए

अजमेर में चल रहे सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 805वें सालाना उर्स का समापन चार अप्रैल को कुल की रस्म के साथ हो गया।

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इस सभा को संबोधित करते हुए दीवान आबेदीन ने कहा कि,

मैं और मेरा परिवार आज से ही गोवंश के मांस के सेवन को त्यागने की घोषणा करता है

उन्होंने कहा कि,

मैं इसके साथ ही देश के मुसलमानों से भी अपील करता हूं कि साम्प्रदायिक सद्भावना के खातिर कोई भी मुसलमान गोवंश का मांस न खाएं

उन्होंने कहा कि भारत में गंगा-जमुनी तहजीब है और हिन्दू और मुसलमान इसी तहजीब के साथ रहते हैं। ऐसे में मुसलमानों को किसी भी विवाद की जड़ को ही खत्म कर देना चाहिए।

गो मांस की ब्रिकी पर तत्काल लगे रोक

दीवान आबेदीन ने सरकार से भी मांग की कि वह गोवंश के पशुओं के मांस की बिक्री पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दे। उन्होंने कहा कि,

हाल ही में गुजरात सरकार ने गोमांस को लेकर उम्रकैद का जो प्रावधान किया है, उसे पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए

दरगाह के दीवान ने कहा कि सिर्फ गोवंश ही नहीं बल्कि सभी प्रकार के जानवरों की हत्या पर रोक लगनी चाहिए। मैं देशवासियों से अपील करता हूं कि वे किसी भी कारण से जानवर को नहीं काटे। उन्होंने कहा कि उनके पूर्वज ख्वाजा साहब ने भी देश की संस्कृति को इस्लाम के नियमों के साथ अपनाया और मुल्क में अमन और शांति का संदेश दिया।

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तीन तलाक कुरान की भावना के खिलाफ

दीवान आबेदीन ने स्पष्ट कहा कि तीन तलाक पवित्र कुरान की भावनाओं के खिलाफ है। कुरान में तलाक को अति अवांछनीय माना गया है। जब निकाह लड़के और लड़की की रजामंदी से होता है तो तलाक के मामले में भी स्त्री के साथ विस्तृत संवाद होना ही चाहिए।

उन्होंने कहा कि,

पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब ने कहा था कि अल्लाह को तलाक सख्त नापसंद है। कुरान की आयतों में कहा गया है कि अगर पति-पत्नी में क्लेश हो तो उसे बातचीत के द्वारा सुलझाने की कोशिश की जानी चाहिए

जरूरत पडऩे पर समाधान के लिए दोनों परिवारों से एक-एक मध्यस्थ भी नियुक्त करें। समाधान की यह कोशिश कम से कम 90 दिन होनी चाहिए।

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