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शशिकला की कारस्तानी का खुलासा करने वाली महिला IPS का तबादला, जानिए कौन है डी रूपा

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 17 , 2017 , 14:35 IST | बैंगलुरु

एआईएडीएमके प्रमुख शशिकला की जेल में ऐशभरी जिंदगी की सच्चाई को चारदीवारी से बाहर लाकर तमिलनाडु और कर्नाटक में राजनीतिक भूचाल मचाने वाली आईपीएस अधिकारी डी रूपा को उसकी इमानदारी का इनाम सरकार ने उनका ट्रांसफर ट्रैफिक विभाग में कर के दे दिया है। 

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आपको बता दें कि रूपा ने खुलासा किया था कि शशिकला ने शानदार किचेन के लिए बैंगलुरु की परप्पाना अग्रहारा जेल प्रशासन को दो करोड़ की रिश्वत दी। रूपा के इस खुलासे के बाद तमिलनाडु की सत्ता में हड़कंप मच गया था। अपने फैसले से डी. रूपा ने साफ कर दिया था कि जो भी अब बेंगलुरू की जेल में चलता आ रहा है वो अब आगे नहीं चलेगा। क्योंकि अब डी. रूपा के जिम्मे जेल की जिम्मेदारी होगी। इस बात से खफा होकर सरकार ने उनका तबादला कर दिया। यह कोई उनका पहला खुलासा नहीं है। इससे पहले भी डी रूपा अपने साहसिक फैसलों की बदौलत सुर्खियों में रह चुकी हैं। आखिर कौन हैं डी रूपा आइये जानते हैं।

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डी रूपा को पुलिस में अपनी सेवा के लिए कई पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है। अपने मेहनत के दम पर डी रूपा ने सन् 2000 के यूपीएससी एग्जाम में 43वीं रैंक प्राप्त की थी। ट्रेनिंग के दौरान रूपा ने अपने बैच में पांचवां स्थान हासिल किया था और रूपा एक मात्र अधिकारी थीं जिन्हें कर्नाटक कैडर दिया गया। रूपा की ट्रेनिंग एनपीएस हैदराबाद में हुई। रूपा एक शार्प शूटर भी हैं और अपनी बेहतरीन कार्यशैली की चलते उन्हें कई अवॉर्ड भी मिल चुके हैं। कठोर फैसले और सराहनीय कार्यों के लिए इस सुपरकॉप को प्रेसिडेंट पुलिस मेडल से भी नवाजा जा चुका है।

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डीसीपी सिटी आर्म्ड रिजर्व के तौर पर रूपा ने पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा के साथ चलने वाले कारों के काफिले की संख्या भी कम कर दी थी। नेताओं की सुरक्षा में लगे गैरजरूरी पुलिस कर्मियों के बाद बिना परमिट के चल रहे वाहनों को हटाने का आदेश देकर रूपा ने खलबली मचा दी थी।

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हाल में उन्होंने कुछ समय पहले उन्होंने फेसबुक पोस्ट में मैसूर के सांसद प्रताप सिंह पर आरोप लगाया था कि नेता अपने पसंद के अफसरों की पोस्टिंग करवाते हैं। इनकी यह पोस्ट काफी चर्चाओं में रही थी।

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उमा भारती ने 15 अगस्त 1994 को कर्नाटक के हुबली शहर में ईदगाह पर में तिरंगा झंडा फहराया था। करीब 10 साल बाद अदालत ने उमा भारती के खिलाफ वारंट जारी किया था। उस वक्त उमा भारती मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री थी। अदालत से वारंट जारी होने के बाद उमा भारती को गिरफ्तार करने के लिए डी. रुपा भोपाल आई थीं।


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