ख़ास रिपोर्ट

दक्षिणपंथी विचारधारा की विरोधी रही हैं गौरी लंकेश, पढ़ें पूरी प्रोफाइल

icon कुलदीप सिंह | 0
483
| सितंबर 6 , 2017 , 12:00 IST

बेंगलुरु में हिंदुत्ववादी राजनीति की धुर विरोधी कही जाने वाली वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की मंगलवार रात को गोली मारकर हत्या कर दी गई। हमलावरों ने उनके घर में घुसकर उनकी हत्या कर दी।

कौन थी गौरी लंकेश

गौरी लंकेश कन्नड़ भाषा की साप्ताहिक पत्रिका की संपादक थीं। वह बेहद निर्भीक और बेबाक पत्रकार के रूप में जानी जाती थी। गौरी कर्नाटक की सिविल सोसायटी का एक चर्चित चेहरा थीं। गौरी  वामपंथी विचारधारा से काफी प्रभावित थीं और हिंदुत्ववादी राजनीति की मुखर आलोचक भी थीं। वह कन्नड़ पत्रकारिता में एक नए मानदंड स्थापित करने वाले पी. लंकेश की बड़ी बेटी थीं।

गौरी कई समाचार पत्र-पत्रिकाओं में विशेष कॉलम लिखती थीं। गौरी वैचारिक मतभेद को लेकर कुछ लोगों के निशाने पर थी। वह जिस साप्ताहिक पत्रिका का संचालन करतीं थी उसमें कोई विज्ञापन नहीं लिया जाता था। उस पत्रिका को 50 लोगों का एक ग्रुप चलाता था।

_gouri_lankesh

पिछले साल नवंबर में बीजेपी सांसद प्रह्लाद जोशी और पार्टी के लीडर उमेश दुशी की तरफ से गौरी के खिलाफ मानहानि का केस दायर किया था। जिसमें गौरी लंकेश को दोषी करार दिया गया था। हालांकि, उसी वक्त गौरी को बेल भी मिल गई थी। बता दें कि, 2008 में गौरी के पेपर में छपे एक आर्टिकल के लिए उनके खिलाफ याचिका दायर कराई गई थी। यह आर्टिकल बीजेपी नेताओं के खिलाफ लिखा गया था।

कलबुर्गी, पनसारे व दाभोलकर के बाद अब गौरी लंकेश की हत्या

आपको बता दें कि 2015 में साहित्यकार एमएम कलबुर्गी और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. गोविंद पंसारे की भी इसी तरह अज्ञात बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। डॉ. कलबुर्गी को भी अपने घर के बाहर खड़े थे जब उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कलबुर्गी की हत्या के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया था। वहीं, गोविंद पनसारे की हत्या के आरोप में दक्षिण पंथी संगठनों के दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

इसी तरह 2013 में पुणे में नरेंद्र दाभोलकर को भी गोलियों से छलनी किया गया था। वह अंधविश्वास के खिलाफ अपनी आवाज उठाते थे। इसलिए वह सनातन संस्था और अन्य दक्षिणपंथियों के निशाने पर थे।

कलबुर्गी, पंसारे और दाभोलकर और अब गौरी लंकेश की हत्या को एक ही तरह से अंजाम दिया गया है। उन्हें भी उनके पर निशाना बनाया गया था। इन सबकी मौत का कनेक्शन आपस में कुछ हद तक मिलता-जुलता नजर आ रहा है, लेकिन स्पष्ट रूप से कुछ भी कह पाना संभव नहीं है। ये सभी समाज की भलाई के लिए आवाज उठाते थे, जिनकी आवाज को दबा दिया गया है। 


author
कुलदीप सिंह

Executive Editor - News World India. Follow me on twitter - @KuldeepSingBais

कमेंट करें