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प्रतिभाएं तो बहुत जन्म लेती हैं लेकिन हर कोई 'किशोर' नहीं बन पाता

icon कुलदीप सिंह | 0
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| अगस्त 4 , 2017 , 12:46 IST | मुंबई

किशोर कुमार का जन्म मध्यप्रदेश के खंडवा में 4 अगस्त 1929 को मध्यवर्गीय बंगाली परिवार में हुआ। खंडवा के जाने माने वकील कुंजी लाल गांगुली के घर जब सबसे छोटे बालक ने जन्म लिया तो कौन जानता था कि आगे चलकर यह बालक एक महान गायक बन कर अपने देश और परिवार का नाम रोशन करेगा।

किशोर दा के जीवन की कुछ दिलचस्प बातें-

-किशोर कुमार का असली नाम आभास कुमार गांगुली था।

-अपने भाई बहनों में किशोर दा दूसरे नम्बर पर थे।

-आभास कुमार गांगुली उर्फ किशोर कुमार का रुझान बचपन से ही पिता के पेशे वकालत की तरफ न होकर संगीत की ओर था। महान अभिनेता एवं गायक के.एल. सहगल के गानों से प्रभावित किशोर कुमार उनकी ही तरह के गायक बनना चाहते थे।

-गायक के.एल. सहगल से मिलने की चाह लिए किशोर कुमार 18 वर्ष की उम्र मे मुंबई पहुंचे, लेकिन उनकी इच्छा पूरी नहीं हो पाई। उस समय तक उनके बड़े भाई अशोक कुमार बतौर अभिनेता अपनी पहचान बना चुके थे।

-किशोर कुमार इन्दौर के क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़े थे और उनकी आदत थी कॉलेज की कैंटीन से उधार लेकर खुद भी खाना और दोस्तों को भी खिलाना।

-कैंटीन का मालिक जब उनको अपने पाँच रुपया बारह आना चुकाने को कहता तो वे कैंटीन में बैठकर ही टेबल पर गिलास और चम्मच बजा बजाकर पाँच रुपया बारह आना गा-गाकर कई धुन निकालते थे और कैंटीन वाले की बात अनसुनी कर देते थे। बाद में उन्होंने अपने एक गीत में इस पाँच रुपया बारह आना का बहुत ही खूबसूरती से इस्तेमाल किया।

-किशोर दा ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा कभी किसी से नहीं ली थी। अशोक कुमार चाहते थे कि किशोर नायक के रूप में अपनी पहचान बनाएं, लेकिन खुद किशोर कुमार को अदाकारी की बजाय पार्श्व गायक बनने की चाह थी।

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-बॉलीवुड में अशोक कुमार की पहचान के कारण किशोर कुमार को बतौर अभिनेता काम मिल रहा था।

-किशोर कुमार की शुरुआत एक अभिनेता के रूप में फ़िल्म शिकारी (1946) से हुई। इस फ़िल्म में उनके बड़े भाईअशोक कुमार ने प्रमुख भूमिका निभाई थी।

-किशोर कुमार को पहली बार गाने का मौका मिला 1948 में बनी फ़िल्म जिद्दी में, जिसमें उन्होंने देव आनंद के लिए गाना गाया था। हालांकि फिल्म की सफलता के बावजूद उन्हें न तो पहचान मिली न कोई खास काम।

-1951 में फणी मजूमदार  द्वारा निर्मित फ़िल्म 'आंदोलन' में किशोर कुमार ने हीरो के रूप में काम किया मगर फ़िल्म फ़्लॉप हो गई। 

-किशोर कुमार को अपने करिअर में वह दौर भी देखना पड़ा, जब उन्हें फिल्मों में काम ही नहीं मिलता था। तब वह स्टेज पर कार्यक्रम पेश करके अपना जीवन-यापन करने को मजबूर थे।

-बंबई में आयोजित एक ऐसे ही एक स्टेज कार्यक्रम के दौरान संगीतकार ओ.पी. नैय्यर ने जब उनका गाना सुना तो उन्होंने भावविह्लल होकर कहा कि महान प्रतिभाएं तो अक्सर जन्म लेती रहती हैं, लेकिन किशोर कुमार जैसा गायक हजार वर्ष में केवल एक ही बार जन्म लेता है। उनके इस कथन का उनके साथ बैठी गायिका आशा भोंसले ने भी सर्मथन किया।

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-वर्ष 1969 में निर्माता निर्देशक शक्तिसामंत की फिल्म ‘आराधना’ के जरिए किशोर कुमार गायकी के दुनिया के बेताज बादशाह बने।

-आपको बता दें की रूप तेरा मस्ताना...; गाने के लिए किशोर कुमार को बतौर गायक पहला फिल्म फेयर पुरस्कार मिला।

-किशोर कुमार कई बार विवादों के भी शिकार हुए सन् 1975 में देश में लगाए गए आपातकाल के दौरान दिल्ली में एक सांस्कृतिक आयोजन में उन्हें गाने का न्योता मिला। किशोर ने पारिश्रमिक मांगा तो आकाशवाणी और दूरदर्शन पर उनके गायन को प्रतिबंधित कर दिया गया। आपातकाल हटने के बाद 5 जनवरी 1977 को उनका पहला गाना बजा ‘दुखी मन मेरे सुन मेरा कहना, जहां नहीं चैना वहां नहीं रहना।’ किशोर कुमार को उनके गाए गीतों के लिए 8 बार फिल्म फेयर पुरस्कार मिला।

-उन्होंने अपने सम्पूर्ण फिल्मी करिअर में 600 से भी अधिक हिंदी फिल्मों के लिए अपना स्वर दिया। इसके अलावा उन्होंने बंगला, मराठी, असामी, गुजराती, कन्नड़, भोजपुरी और उडिय़ा फिल्मों में भी अपनी दिलकश आवाज के जरिये श्रोताओं को भाव विभोर किया।

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-वर्ष 1987 मे किशोर कुमार ने निर्णय किया कि वह फिल्मों से संन्यास लेने के बाद वापस अपने खंडवा लौट जाएंगे। वह अक्सर कहा करते थे कि दूध, जलेबी खाएंगे खंडवा में बस जाएंगे, लेकिन उनका यह सपना अधूरा ही रह गया। 13 अक्तूबर 1987 को किशोर कुमार को दिल का दौरा पड़ा और वह इस दुनिया से विदा हो गए।

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-किशोर कुमार ने कई अभिनेताओं को अपनी आवाज दी, लेकिन कुछ मौकों पर मोहम्मद रफी ने उनके लिए गीत गाए थे। दिलचस्प बात यह है कि मोहम्मद रफी, किशोर कुमार के लिए गाए गीतों के बदले सिर्फ एक रुपया पारिश्रमिक लिया करते थे।

-हर दिल अजीज कलाकार किशोर कुमार ने अपने जीवन के हर क्षण में अपनी जन्म भूमि,खंडवा को याद किया, वे जब भी किसी सार्वजनिक मंच पर या किसी समारोह में अपना कर्यक्रम प्रस्तुत करते थे।                                                                                                                                                  

किशोर दा के कुछ लोकप्रिय गीत-


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कुलदीप सिंह

Editorial Head- www.Khabarnwi.com Executive Editor - News World India. Follow me on twitter - @KuldeepSingBais

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