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जन्मदिन विशेष: खुद रो कर दुनिया को हंसाने वाले चार्ली चैपलिन को पागल खाने में रहना पड़ा था

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 16 , 2017 , 15:42 IST | मुंबई

“मेरा दर्द किसी के लिए हंसने की वजह हो सकता है, पर मेरी हंसी कभी भी किसी के दर्द की वजह नहीं होनी चाहिए।” यह शब्द थे फ़िल्मकार और एक्टर चार्ली चैपलिन के। रविवार को सदी के महान हास्य कलाकार चार्ली चैपलिन का जन्मदिन है। खुद रोते हुए दुनिया को हंसाने की कला सिर्फ चार्ली चैपलिन को आती थी।

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चार्ली चैपलिन का जन्म 16 अप्रैल 1889 को लन्दन में हुआ था। चार्ली का बचपन बहुत मुश्किलों और ग़रीबी से भरा हुआ था। शराबी पिता के कारण चार्ली का परिवार बुरी तरह से बिखर गया था। चैपलिन की ग़रीब मां पागलपन की शिकार हो गई थीं। चैपलिन को सात साल की उम्र में एक आश्रम में जाना पड़ा था।

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चार्ली ने अपना पहला स्टेज शो पांच साल की उम्र में किया था। एक बार उनकी मां स्टेज पर गाना गा रही थीं। उसी समय गले की बीमारी के कारण उनकी आवाज बंद हो गई और वो आगे नहीं गा पायीं। वहां मौजूद दर्शक बेहद नाराज हुए और जोर जोर से चिल्लाने लगे। कॉन्सर्ट के मैनेजर ने पांच साल के चार्ली को मंच पर भेज दिया। छोेटे से चार्ली ने अपनी मासूम सी आवाज में अपनी मां का ही गाना गया। इससे वहां मौजूद दर्शक बहुत खुश हुए और सिक्कों की बारिश कर दी।

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चैपलिन अपने जीवन में महात्मा गांधी से बहुत प्रभावित थे। लंदन में महात्मा गांधी से मुलाकात के पहले चैप्लिन ने अपनी डायरी में लिखा था कि वो इस सोच में पड़ गए थे कि राजनीति के ऐसे माहिर खिलाड़ी से किस मुद्दे पर बात की जाए। मुलाकात के वक्त चैप्लिन ने महात्मा गांधी से पूछा कि आधुनिक समय में उनका मशीनों के प्रति विरोधी व्यवहार कितना जायज है। इसके जवाब में गांधी जी ने कहा था वो मशीनों के नहीं, बल्कि इस बात के विरोधी हैं कि मशीनों की मदद से इंसान ही इंसान का शोषण कर रहा है। इससे चैप्लिन इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इस मुद्दे पर 'टाइम मशीन' नाम की एक फिल्म बना डाली।

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चार्ली चैपलिन ने 1977 को 25 दिसंबर यानी क्रिसमस के दिन दुनिया को अलविदा कह दिया था। चार्ली की मृत्यु से जुड़ा भी एक बेहद रोचक किस्सा है। उनके निधन के बाद उनके शव को चोरी कर लिया गया था। उनके शव के बदले उनके परिवार से फिरौती की मांग की गई। 11 हफ्ते बाद उनका शव वापस मिला।

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चार्ली चैपलिन किसी से नहीं डरते थे। 1940 में चार्ली चैपलिन ने हिटलर पर 'द ग्रेट डिक्टेटर' फ़िल्म बनाई थी। इसमें उन्होंने हिटलर की नक़ल करते हुए उनका मज़ाक बनाया था। जब पूरा यूरोप आर्थिक महामंदी की समस्या से गुजर रहा था। हर तरफ तानाशाहों का आतंक था ऐसे वक्त में चार्ली ने हास्य को अपना हथियार बनाया। चार्ली ने लोगों को सिखाया कि डर को हास्य से हराया जा सकता है।

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1929 में ‘द सर्कस’ के लिए चार्ली चैपलिन ऑस्कर के ऑनरेरी अवार्ड से सम्मानित किए गए। 1972 में चार्ली को लाइफ टाइम ऑस्कर अवॉर्ड दिया गया। 1952 में बेस्ट ओरिजनल म्यूजिक स्कोर पुरस्कार लाइमलाइट के लिये प्राप्त हुआ। 1940 में द ग्रेट डिक्टेटर में किये अभिनय के लिये सर्वोत्तम अभिनेता पुरस्कार, न्यूयॉर्क फिल्म क्रिटिक सर्कल अवार्ड से सम्मानित किया गया। 1972 में करियर गोल्डन लायन लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। टाइम मैगजीन के कवर पर जगह पाने वाले पहले एक्टर चार्ली चैपलिन के जीवन पर खुद 82 फिल्में बनी हैं।

(देखें चार्ली चैपलिन की यादगार परफार्मेंस) 

 


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