विज्ञान/टेक्नोलॉजी

बस कुछ पलों का इंतजार, 'ब्लड मून' के दीदार के लिए हो जाइए तैयार, ऐसा होगा नजारा

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जनवरी 31 , 2018 , 16:15 IST

महज कुछ घंटों के बाद 31 जनवरी को आसमान में इस साल का पहला पूर्ण चंद्रग्रहण दिखाई देगा। लेकिन इस बार का चंद्रग्रहण बेहद खास होगा। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इस बार ब्‍लडमून और ब्‍लूमून या सुपरमून एक साथ दिखाई देने वाला है। अगर आपको इस बारे में जानकारी नहीं है तो हम आपको बता देते हैं कि यह सिर्फ चंद्रग्रहण ही नहीं बल्कि पूर्ण चंद्रग्रहण है, जो तीन सालों बाद दिखाई देने वाला है।

भारत,इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में साफ-साफ दिखाई देगा

भारत, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में यह पूर्ण चंद्रग्रहण साफ-साफ देखा जा सकेगा। भारत में यह शाम 5:58 मिनट से शुरू हो कर 8:41 मिनट तक मतलब 77 मिनट के लिए दिखाई देगा। इस बार यह चंद्रग्रहण इसलिए भी खास है क्‍योंकि इसको नंगी आंखों से देखा जा सकता है।

जब चांद धरती के एकदम नजदीक होगा

इससे पहले तीन दिसंबर 2017 और एक जनवरी 2018 को काफी नजदीक से ब्‍लूमून दिखाई दिया था। सुपरमून की झलक की इस तिकड़ी में शायद यह इस साल आखिरी मौका होगा। सुपरमून एक आकाशीय घटना है जिसमें चांद अपनी कक्षा में धरती के सबसे निकट होता है और संपूर्ण चांद का स्पष्ट रूप से इसको देखा जा सकता है। 31 जनवरी को होने वाली पूर्णिमा की तीन खासियत है। पहली यह कि यह सुपरमून की एक श्रंखला में तीसरा अवसर है जब चांद धरती के निकटतम दूरी पर होगा।

14 फीसदी ज्यादा चमकीला दिखेगा चांद

दूसरी यह कि इस दिन चांद सामान्य से 14 फीसदा ज्यादा चमकीला दिखेगा। तीसरी बात यह कि एक ही महीने में दो बार पूर्णिमा होगी, ऐसी घटना आमतौर पर ढाई साल बाद होती है और अकसर पूर्णिमा एक महीने में एक ही बार आती है। लेकिन कभी-कभी पूर्णिमा एक महीने में दो बार भी हो जाती है। पहली या दूसरी तारीख को पूर्णिमा होने पर ऐसा होता है। एक महीने में दूसरी बार आने वाली पूर्णिमा को ब्लू मून कहते हैं। यानि जब एक ही महीने में पूर्णिमा का चांद दूसरी बार नज़र आये तो वो ब्लू मून कहलाता है।
वर्ष 2018 खगोल विज्ञान में दिलचस्पी रखने वालों के लिए खास रहेगा। इनमें जनवरी में 31 तारीख को पूर्णिमा के दिन चंद्रमा नारंगी रंग का दिखेगा। इस दिन चंद्रग्रहण भी है। चूंकि चंद्रमा का रंग नारंगी होगा लेकिन खगोलीय भाषा में इसे ब्लड मून कहा जाता है। यह चंद्रमा सुपरमून की श्रेणी में भी शामिल है जो सामान्य दिनों की तुलना में 14 प्रतिशत बड़ा और 30 प्रतिशत ज्यादा चमकदार होगा। इसके बाद वर्षभर सुपरमून नहीं बनेगा।

35 साल के बाद दिखेगा टोटल लूनर इकलिप्स

इस साल 35 वर्ष के अंतराल के बाद टोटल लूनर इकलिप्स (पूर्ण चंद्रग्रहण)और ब्लू मून एक साथ होगा। इससे पहले 30 दिसंबर 1982 को यह एकसाथ हुआ था जब ग्रहण के साथ चंद्रमा का रंग भी बदला था। भारत तथा अन्य स्थानों जहां चंद्रग्रहण होगा वहां यह रस्टी आरेंज मून की तरह दिखेगा। पूर्ण चंद्रग्रहण 77 मिनट तक रहेगा। इस दौरान चंद्रमा का निचला हिस्सा ज्यादा चमकीला दिखेगा। जानकारों का कहना है कि 2018 में पृथ्वी-आकाश में बहुत कुछ रोचक देखने को मिलेगा। इसके बाद ब्लू मून 31 दिसंबर 2028 को फिर 31 जनवरी 2037 को दिखेगा।

साल की अन्य खगोलीय घटनाएं

15 फरवरी- आंशिक सूर्यग्रहण

27 जून- सेटर्न एट अपोजिशन

13 जुलाई- आंशिक सूर्य ग्रहण

धरती के सबसे पास होगा मंगल

इस साल 27 जुलाई को रेड प्लेनेट मार्स (मंगल)2003 के बाद पृथ्वी के सबसे पास होगा। इस दौरान मार्स एट अपोजिशन की घटना होगी यानी जब पश्चिम में सूर्य डूब रहा होगा तो पूर्व में पूर्णिमा के चंद्रमा के साथ मंगल उदय हो रहा होगा। इस समय बृहस्पति को भी उसी आकाश में देखा जा सकेगा। वही अगर बरसात बाधा न बनी तो 12,13 अगस्त की मध्य रात को परसिड मेटियोर शॉवर में प्रति मिनिट 60 उल्का बौछार हो सकती है। इसी तरह से 13,14 दिसंबर की मध्यरात्रि को प्रति मिनिट 120 जेमिनिड मेटियोर शॉवर का आनंद लिया जा सकेगा।

दो धूमकेतु की भी रहेगी धूम

दिसंबर के दूसरे पखवाड़े को दो धूमकेतु को देखा जा सकेगा। इन्हें देखने के लिए टेलिस्कोप की मदद लेनी होगी। जानकारों का है कि आने वाले समय में 2018 में पृथ्वी से आकाश में बहुत कुछ रोचक और रोमांचक देखने के लिए मिलेगा। ज्योतिषी डॉ.दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार इस साल का पहला चंद्र ग्रहण माघ शुक्ल पूर्णिमा, बुधवार 31 जनवरी को पड़ रहा है। जो 3 घंटे 24 मिनट तक रहेगा। ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण भारत समेत यूरोप, एशिया के कई देशों में दिखाई देगा। दूसरा ग्रहण 27 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल गुरु पूर्णिमा पर पड़ रहा है। यह 4 घंटे 4 मिनट तक रहेगा। इस दिन गुरु पूर्णिमा का भी संयोग है और साथ ही सावन माह की शुरुआत भी हो रही है। दोनों ही ग्रहण के प्रभाव से प्राकृतिक आपदाओं की संभावनाएं दिखाई दे रही है। साथ ही आतंकवाद, नक्सलवाद जैसी घटनाओं की भी संभावना है।

कुछ राशि वालों के लिए फलदायी कुछ के लिए कष्टदायी

चंद्र ग्रहण के प्रभाव से मिथुन, सिंह, वृश्चिक, मकर, धनु व मीन राशि वालों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा। वृष, कन्या, कुंभ, तुला राशि वालों के लिए लाभदायी रहेगा।

सूर्य ग्रहण जो दिखाई नहीं देगा, इसलिए कोई प्रभाव नहीं

इस साल तीन सूर्य ग्रहण भी पड़ेंगे लेकिन भारत में दिखाई नहीं देने से इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। पहला खंडग्रास सूर्यग्रहण 15 फरवरी को भारतीय समयानुसार दोपहर 12.25 बजे से शुरू होगा। दूसरा खंडग्रास सूर्यग्रहण 13 जुलाई को सुबह 7. 19 बजे शुरू होगा और तीसरा 11 अगस्त को दोपहर 1.30 बजे से शुरू होगा, लेकिन तीनों ही सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेंगे।


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