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पीएम मोदी BRICS सम्मेलन के लिए चीन रवाना, इन 5 मुद्दों पर भारत का रहेगा फोकस

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 3 , 2017 , 13:46 IST | नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को शिएमेन में ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन रवाना हो गए। मोदी राष्ट्रपति भवन में शपथ ग्रहण समारोह के बाद चीन के लिए रवाना हो गए। बता दें कि पीएम मोदी ब्रिक्स सम्मेलन के बाद म्यांमार जाएंगे।

डोकलाम विवाद हल होने के छह दिन बाद नरेंद्र मोदी अब चीन दौरे पर गए हैं। वे 3 से 5 सितंबर के बीच शियामेन शहर में होने वाली नौंवी ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेंगे। इस दौरान सबकी नजर मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने वाली मुलाकात पर टिकी होंगी। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि दोनों नेताओं की द्विपक्षीय वार्ता होगी या नहीं। डोकलाम विवाद पर दोनों देशों की ओर से नरमी बरते जाने के बाद माना जा रहा है कि चीन को इस बात की आशंका थी कि अगर डोकलाम विवाद बना रहता है तो इसका असर ब्रिक्स समिट पर पड़ता। इसी वजह से उसने पहले ही अपने कदम पीछे खींच लिए।

चीन के लिए क्यों अहम हुआ भारत

BRICS ग्रुप में पांच देश हैं- ब्राजील, रूस, इंडिया, चीन और साउथ अफ्रीका। इनमें से साउथ अफ्रीका में प्रेसिडेंट जैकब जुमा का विरोध हो रहा है। ऐसे में वहां राजनीतिक संकट है। ब्राजील में पिछले साल दिल्मा रोसेफ को महाभियोग के बाद हटाया गया। अब माइकल टेमर वहां के राष्ट्रपति हैं। ब्राजील की इकोनॉमी में खासी गिरावट का दौर है। क्रीमिया पर कब्जे और युक्रेन से संघर्ष की वजह से रूस पर इकोनामिक बैन लगे हैं। ऐसे में चीन के लिए इस ग्रुप में भारत का साथ अहम हो रहा है।

ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की क्या है चिंता

भारत इस बात से चिंतित है कि चीन से उसका व्यापार घाटा करीब 50 अरब डॉलर (करीब 3 लाख 19 हजार करोड़ रुपए) तक पहुंच गया है। चीन का भारत में इम्पोर्ट पिछले साल 58.33 बिलियन डॉलर (करीब 3 लाख 72 हजार करोड़ रुपए) था। 2015 के मुकाबले इसमें 0.2% की बढ़ोत्तरी थी। दूसरी तरफ भारत से चीन को होने वाला एक्सपोर्ट 12% कम होकर 11.76 बिलियन डॉलर (करीब 75 हजार करोड़ रुपए) तक जा पहुंचा। दो देशों के बीच इम्पोर्ट ओर एक्सपोर्ट का अंतर ही व्यापार घाटा होता है।

इधर, भारत में चीन और चीनी सामान का विरोध होता रहा है, लेकिन इससे चीन को ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि उसके इम्पोर्ट में भारत की कुल हिस्सेदारी सिर्फ 2% है।

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ब्रिक्स में और देशों को शामिल करने पर पीछे क्यों हटा चीन

भारत के विरोध के बाद ब्रिक्स के विस्तार की योजना चीन को मजबूरन छोड़नी पड़ी। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि बीजिंग अपनी 'ब्रिक्स प्लस' योजना के बारे में समूह के दूसरे देशों को यकीन नहीं दिला पाया। जिसके चलते चीन को मजबूरन अपनी योजना छोड़नी पड़ी। एक्सपर्ट मानते हैं कि चीन ब्रिक्स में दूसरे देशों को इसलिए शामिल करना चाहता है, ताकि उनके नेचुरल रिसोर्स का इस्तेमाल कर सके। वह भारत के खिलाफ पाकिस्तान को भी इस ग्रुप में शामिल करने का हिमायती रहा है।

क्या मोदी-जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी

अभी इस पर स्थिति साफ नहीं है। शुक्रवार को हुआ चुनयिंग ने इस सवाल का कोई सीधा जवाब नहीं दिया। - उन्होंने कहा, ‘मल्टीलेटरल मीटिंग्स के दौरान बाइलेटरल मीटिंग्स करने की एक परंपरा है। अगर वक्त मिला तो चीन इसका इंतजाम करेगा।

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मसूद अजहर और एनएसजी मुद्दों पर भी रहेगी फोकस

मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किए जाने पर चीन बातचीत करना नहीं चाहता। चीन की ओर से आए बयान से ऐसा ही लगता है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने शुक्रवार को मीडिया से कहा, ‘हमने देखा है कि जब पाकिस्तान के आतंकवाद विरोधी कदम की बात आती है तो भारत कुछ चिंताएं सामने रखता है। मुझे नहीं लगता कि ब्रिक्स समिट में चर्चा के लिए यह सही सब्जेक्ट है।

बता दें कि यूनाइटेड नेशंस का परमानेंट मेंबर होने की वजह से चीन के पास वीटो पावर है। वह मसूद अजहर को इंटरनेशनल आतंकी डिक्लेयर किए जाने में अपने इस पावर का इस्तेमाल करके रोड़े अटकाता रहा है। उधर, डोकलाम मुद्दा हल होने के बाद माना जा रहा है कि भारत न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) मामले में चीन से अटकी बातचीत फिर शुरू कर सकता है। बता दें कि एनएसजी में भारत को शामिल करने का भी चीन लंबे समय से विरोध करता रहा है।

 


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