बिज़नेस

बजट 2018: 3 लाख तक की इनकम हो सकती है टैक्स फ्री, कॉरपोरेट टैक्स में भी कटौती!

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
95
| जनवरी 31 , 2018 , 08:48 IST

उद्योग व आर्थिक क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी बजट में कर मुक्त आय की सीमा ढाई से बढ़ाकर तीन लाख रुपये की जा सकती है और कंपनी कर की दर को मौजूदा 30-34 प्रतिशत से घटाकर 28 प्रतिशत पर लाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी बजट में कृषि क्षेत्र में निवेश और बड़ी ढांचागत परियोजनाओं पर खर्च बढ़ाने पर जोर होगा ताकि रोजगार के नये अवसर पैदा किये जा सकें।

3 लाख तक की इनकम हो सकती है टैक्स फ्री

देश के आम आदमी यानी मिडिल क्लास टैक्स सीमा में 100 फीसदी तक छूट की उम्मीद लगाए बैठे हुए हैं। आने वाले बजट में मिडिल क्लास बड़ी राहत मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हुए हैं। खासकर व्यक्तिगत आयकर छूट सीमा को मौजूदा 2.5 लाख रुपये के स्लैब से बढ़ाकर 3 लाख रुपये करने की भी चर्चा जोरों पर है। हालांकि यह छूट सीमा पांच लाख रुपये तक बढ़ाने की मांग भी समय-समय पर उठती रही है।

सरकार आम नागरिकों के बीच बचत के स्कीम में निवेश को प्रोत्साहित करने और पूंजी निर्माण के लिए सेक्शन 80 सी के तहत मिलने वाले छूट की सीमा को भी 1.5 लाख से बढ़ाकर 3 लाख कर सकती है।

कॉरपोरेट टैक्स 30 से घटकर आ सकता है 25% पर

अर्थव्यवस्था में और तेजी लाने के लिए सरकार से कॉरपोरेट हाउस भी कारपोरेट टैक्स घटाने के रोडमैप मिलने के इंतजार में है। जैसा कि वित्त मंत्री के द्वारा 2015 के आम बजट में कॉरपोरेट टैक्स की दर को 30 फीसद से घटाकर 25 फीसद पर लाने का प्रस्ताव दिया किया था। यह काम चार वर्ष में किया जाना था। हालांकि इसके तहत उद्योगों को मिल रही सभी तरह की टैक्स रियायतों को समाप्त करने का प्रावधान भी था। इस दिशा में सरकार कुछ आगे बढ़ी और नीति आयोग ने भी तीन साल का एक्शन एजेंडा लाते हुए कई तरह की टैक्स रियायतों की सिफारिश की थी जिसमें कॉरपोरेट टैक्स की दर को भी घटाकर 25 फीसदी करने की बात थी। मोदी सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार विदेशी कंपनियो पर लागू टैक्स दर की वर्तमान सीमा 40 फीसदी को घटा कर 35 फीसदी कर सकती है।

मिनिमम अल्टरनेट टैक्स को बनाया जा सकता है लचीला

इकोनॉमी के लिए यह शुभ संकेत है कि वर्ल्ड बैंक की ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ टैली में भारत की रैकिंग पिछले कई सालों से कई पारामीटर पर बेहतर हुई है। रैंकिंग में हो रहे सुधार से सीख लेकर सरकार इस वित्तीय साल में कई और बड़े कदम उठाएगी ताकि देश की इकोनॉमी की रैंकिंग में और इजाफा हो। सरकार इस वित्तीय बजट में ‘इनकम कंप्यूटेशन एंड डिस्कलोजर स्टैंडर्ड’ (ICDS) को खत्म करने के अलावा मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (MAT) को तर्कसंगत, टीडीएस (TDS) के लिमिट में बढ़ोतरी के साथ उसे सुविधानुकूल और तर्कसंगत बनाना चाहती है ताकि कॉस्ट में कमी लाई जा सके और कागजी कार्रवाई में वक्त जाया नहीं हो। यकीनन मिनिमम अल्टरनेट टैक्स के प्रावधानों में बदलाव अगर लाया जाए, MAT की दर को कम किया जाए खासकर विदेशी लाभांश पर और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, स्पेशल इकोनोमिक जोन से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट में लगे उद्धमियों पर लगने वाले MAT को खत्म कर दिया जाए तो इंफ्रास्ट्रक्टर सेक्टर में निवेश के कई आकर्षक ऑफर आएंगे।

इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को भी टैक्स रियायत की उम्मीद

इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को और बढ़ावा देने के लिए रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को भी कई तरह की टैक्स रियायतें देनी होगी। खासकर सेक्शन 10(23G) के तहत मिलने वाले टैक्स छूट को फिर से लागू कर। जोकि वित्तीय वर्ष 2006-07 में लागू था। यह टैक्स रियायत ब्याज दरों में छूट देकर दी जाती थी जिससे इंफ्रास्ट्रक्टर कंपनियों को लांग टर्म में काफी मुनाफा और पूंजी का निर्माण होता था। अभी सबसे ज्यादा जरूरत इंफ्रास्ट्रक्टर सेक्टर को बढ़ावा देने की। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर ब्याज दरों का जो बोझ है अगर उसमें कमी लाई जाए तो इस सेक्टर में निवेश की बाढ़ आ जाएगी और कई बड़े निवेशक इस सेक्टर में निवेश करने को वापस आएंगे। सरकार की नजर इस पर है और यही वजह है कि इस सेक्टर को और मजबूती प्रदान करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि वित्त मंत्री के कार्ड में इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को इस बजट में कई तरह की टैक्स रियायतें मिल सकती है।
हाल ही में वित्त मंत्री अरूण जेटली ने प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा था कि देश का आर्थिक विकास तब तक न्यायसंगत समान नहीं होगा जब तक कि देश के अर्थव्यव्स्था की रीढ़ कृषि क्षेत्र में इसका स्पष्ट फायदा होता नहीं दिखे। जाहिर है जेटली ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वित्तीय वर्ष 2018-19 के बजट में कृषि क्षेत्र और किसानों के आमदनी को बढ़ाने को लेकर सरकार का सबसे ज्यादा फोकस रहेगा और कृषि क्षेत्र को बजट में सबसे ज्यादा तवज्जो दी जाएगी।

कुल मिला कर लब्बोलुआब यह है कि सरकार किसी भी सेक्टर को इस बजट में निराश नहीं करना चाहती है ताकि आने वाले 2019 के आम चुनाव में सत्ताधारी पार्टी को कोई नुकसान उठाना पड़े। लिहाजा हम अभी यह नहीं अनुमान लगा सकते हैं कि कोई आमूलचूल बदलाव बजटीय प्रावधानों में होगा। हां हम यह उम्मीद कर सकते हैं कि इस बजट में सबके लिए सकारात्मक प्रावधानें होंगी।

 

 


कमेंट करें