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शराब पीकर गाड़ी चलाने वाले सावधान! अब होगा 10,000 रुपये का जुर्माना

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 7 , 2017 , 16:07 IST | नयी दिल्ली

शराब पीकर गाड़ी चलाना आने वाले दिनों में बहुत महंगा पड़ने वाला है। नशे की हालत में गाड़ी चलाते पकड़े गए तो अब दस हजार रूपये का जुर्माना भरना पड़ेगा। इस संबंध में लोकसभा में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया गया। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि वर्ष 1988 के मोटर यान कानून में 30 साल बाद संशोधन करने के लिए यह विधेयक लाया गया है।

उन्होंने विधेयक को जल्द से जल्द पारित करने की सदन से अपील करते हुए कहा कि देश में दुनिया में सबसे ज्यादा पांच लाख सड़क हादसे सालाना होते हैं जिनमें डेढ़ लाख लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है।

गडकरी ने इन हादसों के लिए कम प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस नियमों से लेकर यातायात नियमों को जिम्मेदार ठहराया और साथ ही कहा कि जनता में यातायात नियमों के प्रति न सम्मान है और न ही डर।

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उन्होंने बताया कि विधेयक में यातायात नियमों और ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के संबंध में राज्यों के लिए ई गर्वनेंस को अनिवार्य किया गया है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया कि दुनिया में भारत एक ऐसा देश है जहां ड्राइविंग लाइसेंस बहुत आसानी से मिल जाता है और एक व्यक्ति चार-चार राज्यों में जाकर ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लेता है।

गडकरी ने कहा कि अब लोग घर बैठे लर्निग लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकेंगे लेकिन स्थायी लाइसेंस बनवाने के लिए कम्प्यूटर के जरिए परीक्षा देनी होगी। उन्होंने कहा, ‘‘ नेता , अभिनेता या पत्रकार चाहे कोई भी हो, सबको परीक्षा देकर ही लाइसेंस मिल सकेगा।’’

गडकरी ने बताया कि देश में 22 लाख प्रशिक्षित ड्राइवरों की कमी है और मोटर यान कानून में संशोधन से लोगों को रोजगार के साथ ही सड़क हादसों में भी कमी लाने में मदद मिलेगी। अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने भी कहा कि सड़क हादसों में अधिकतर युवा लोगों की जान जाती है। गडकरी ने कहा कि नए कानून के प्रभावी होने के बाद यदि मंत्री भी यातायात नियमों का उल्लंघन करता है तो कैमरों के जरिए जुर्माना पर्ची डाक से घर पहुंचा दी जाएगी।

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उन्होंने साथ ही बताया कि जल्द ही सरकार एक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड का गठन करने जा रही है जिसके बाद सुरक्षित यातायात के संबंध में एक अभियान चलाया जाएगा। कांग्रेस के के सी वेणुगोपाल ने विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुए इसका समर्थन किया लेकिन साथ ही खराब सड़कों को सड़क हादसों का एक मुख्य कारण बताते हुए सड़कों का निर्माण करने वाले ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने के लिए विधेयक में प्रावधान किए जाने की मांग की।


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