राजनीति

कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर कसा तंज, कहा- देश और पार्टी के आगे GST पर झुकी सरकार

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| नवंबर 12 , 2017 , 07:44 IST | नई दिल्ली

कांग्रेस ने शुक्रवार को पेट्रोलियम उत्पादों, रियल एस्टेट और बिजली को वस्तु एवं सेवा कर(जीएसटी) के अधीन लाने की मांग की और दावा किया कि पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से भाजपा सरकार व जीएसटी परिषद पर दबाव बनाए जाने के बाद कई वस्तुओं को 28 प्रतिशत के अधिकतम कर दायरे से बाहर किया गया। पार्टी ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गब्बर सिंह टैक्स पूरी तरह से उनके अमीर दोस्तों की मदद और लाखों छोटे व्यापारियों को नुकसान पहुंचाने के लिए है।"

राहुल गांधी जीएसटी को मजाकिया लहजे में 'गब्बर सिंह टैक्स' कहते हैं, क्योंकि यह जीएसटी वैसा नहीं है, जिसकी परिकल्पना कांग्रेस ने की थी। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिह सुरजेवाला ने एक बयान जारी कर कहा कि, "कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी द्वारा लगातार बनाए गए दबाव की वजह से जीएसटी परिषद और भाजपा को रोजमर्रा के वस्तुओं पर कर दर घटाना पड़ा। राजनीतिक अनिश्चितता और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन से मोदी सरकार पूरी तरह घबरा गई और आंशिक रूप से पीछे हट गई।"

लेकिन, भारत के लोग खासकर दुकानदार, व्यापारी और छोटे, सूक्ष्म एवं मझोले उद्योग के लोगों ने असंतुलित तरीके से लागू किए गए मोदी जी के गब्बर सिंह टैक्स के प्रति नाराजगी दिखाई। सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा जीएसटी के अधिकतम कर दायरे को 18 प्रतिशत तक करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि, "अगर आप बिजली, पेट्रोलियम और रियल एस्टेट को जीएसटी के दायरे से बाहर रखते हो तो राजस्व का 50 प्रतिशत जीएसटी के दायरे से बाहर रहेगा। इसका मतलब है मोदी सरकार पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले टैक्स के लिए राजकोष में सालान 2,67,000 करोड़ रुपये देना जारी रख सकती है।"

कृषि क्षेत्र और कपड़ा उद्योग की ओर से जीएसटी के बाद आनी वाली परेशानियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, कि कपड़ा उद्योग कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार उत्पादक क्षेत्र था, जो काफी मुश्किलों से घिर गया है। फाइबर पर 12 प्रतिशत कर लगाया गया है, जबकि फैब्रिक पर 5 प्रतिशत का कर लगाया गया है।

उन्होंने कहा कि, "पहली बार कृषि क्षेत्र पर कर लगाया गया है। ट्रैक्टर और अन्य कृषि सामग्री पर 12 प्रतिशत, टायर, ट्यूबस, और ट्रांसमिशन पार्ट पर 18 प्रतिशत, कीटनाशाकों पर 18 प्रतिशत, खाद पर पांच प्रतिशत और कोल्ड स्टोरेज पर 18 प्रतिशत का कर लगाया गया है।" सुरजेवाला ने कहा, "कृषि से जुड़े 62 करोड़ लोगों को कोई राहत नहीं मिली है।"


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