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बेईमान नहीं हैं पूर्व कोयला सचिव हरीश चंद्र गुप्ता- IAS एसोसिएशन

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मई 24 , 2017 , 21:45 IST | नई दिल्ली

पॉलिसी पैरालिसिस या प्रशासनिक गलती के लिए ब्यूरोक्रेट्स पर फौजदारी मुकदमे चलाना कहीं न कहीं नौकरशाहों को फैसले लेने से रोकता है। अगर ब्यूरोक्रेटस फैसले नहीं लेंगे तो फिर देश हित के लिए विकास के कार्य प्रभावित होंगे। उक्त बातें सेंट्रल IAS Association के सचिव संजय भुसरेड्डी ने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया से खास बातचीत के दौरान कहीं।

दरअसल, पूर्व आईएस अधिकारी और सेंट्रल आईएएस एसोसिएशन के सचिव ने कोल ब्लॉक आवंटन के एक मामले में सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा पूर्व कोयला सचिव हरीश चंद्र गुप्ता और मंत्रालय के दो पूर्व अधिकारियों को दो-दो साल की सजा सुनाए जाने की प्रक्रिया पर अपनी राय जाहिर करते हुए कहा कि कुछ फैसले लेने में प्रक्रिया से ज्यादा नतीजों पर हमारा फोकस होता है।

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(हरीश चंद्र गुप्ता)

उन्होंने कहा कि सीनियर ब्यूरोक्रेटस को सरकार जिम्मेदारी देती है और वो उसी अधिकार के तहत नीतिगत फैसले लेते हैं। सरकार सीनियर ब्यूरोक्रेटस से अपेक्षा रखती है कि वो नतीजे दें। अगर सीनियर ब्यूरोक्रेटस से नतीजे देने में कोई प्रशासनिक गलती होती है तो उसके लिए विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि हरीश चंद्र गुप्ता के बारे में सभी नौकरशाह जानते हैं कि वो बेदाग छवि के हैं। कोई नौकरशाह उ्न्हें बेईमान नहीं कहता है। हरीश चंद्र गुप्ता यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं, जिनकी छवि ईमानदार की रही है। 

बीते 22 मई को दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत ने कमल स्पॉन्ज एंड स्टील पावर लिमिटेड को कोल ब्लॉक आवंटित करने के मामले में हरीश चंद्र गुप्ता को दो साल की सजा सुनाई है। साल 2008 में मध्य प्रदेश में थेसगोड़ा-बी रूद्रपुरी कोयला ब्लॉक का आवंटन कमल स्पॉंन्ज एंड स्टील पावर लिमिटेड (केएसएसपीएल) कंपनी को किया गया था। सीबीआई ने आरोप लगाया कि कंपनी ने अपनी नेट वर्थ और मौजूदा क्षमता को गलत बताया।

Disclaimer: इस स्टोरी में प्रकाशित सभी तथ्य और बातें सेंट्रल आईएएस एसोसिएशन के सचिव संजय भुसरेड्डी से की गई बातचीत और जानकारी पर आधारित है।

यहां देखिये संजय भूसरेड्डी का पूरा इंटरव्यू 

 


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