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केन्द्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- निजता का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 27 , 2017 , 17:59 IST | नयी दिल्ली

निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है या नहीं इस पर सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की बेंच के सामने केंद्र सरकार सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार के लेवल पर नहीं ले जाया जा सकता। संविधान बनाने वाले ने जानबूझकर निजता को मौलिक अधिकार के दायरे से बाहर रखा था। केंद्र ने कहा कि आधार एक्ट के तहत निजता को संरक्षित करने का प्रावधान किया गया है और इससे ये भी साफ होता है कि प्रत्येक निजता मौलिक अधिकार नहीं है। केंद्र की ओर से दलीलें पूरी कर ली गई।

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केके वेणुगोपाल की दलील

एमपी शर्मा और खड़ग सिंह के मामले में सुप्रीम कोर्ट के दो अलग-अलग फैसले में कहा गया है कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है। दोनों ही जजमेंट का कुछ पार्ट उन्होंने पढ़कर कोर्ट में सुनाया। कहा कि निजता का अधिकार जूरिस नहीं है ये सामाजिक धारणा है। निजता मौलिक अधिकार नहीं है। अगर इसे स्वतंत्रता के अधिकार से जोड़ कर भी देखा जाए तो भी इसके कई आयाम हैं और प्रत्येक पहलू और आयाम मौलिक अधिकार नहीं हो सकता। अगर निजता के अधिकार का दावा किया गया तो दूसरे के मौलिक अधिकार प्रभावित होने लगेंगे। इस दौरान उन्होंने यूएस जज स्कैलिया और थॉमस का उद्धरण पेश किया।

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अटॉर्नी जनरल ने नौकरी के लिए भरे जाने वाले फॉर्म का हवाला दिया कि किस तरह से जानकारी वहां दी जाती है। जस्टिस जे. चेलामेश्वर ने कहा कि जस्टिस स्कैलिया का विचार था कि सरकार के साथ साझा किए जाने वाले सूचनात्मक निजता, निजता के अधिकार के दायरे में नहीं है। लेकिन बहुमत का ये तर्क नहीं था। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस आर. एस. नरिमन ने कहा कि यूएस के जो भी ऐतिहासिक फैसले हुए हैं उसमें कहा गया है कि निजता का अधिकार प्रक्रिया का हिस्सा है और संविधान के तहत संरक्षित है।

वेणुगोपाल ने कहा कि यूएस जजमेंट सूचनात्मक निजता की बात है और कहा कि यूएस न्याय शास्त्र में काफी आगे है। लेकिन तब जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि लेकिन सूचनात्मक निजता के मामले में यूरोपियन यूनियन से यूएस पीछे है। तब वेणुगोपाल ने कहा कि यूएस में बड़ी संख्या में जजों ने ईयू जजमेंट पर विचार नहीं करते क्योंकि सामाजिक और पर्यावरणीय तौर पर दोनों देश अलग हैं। ऐसे में देश की समाजिक और सांस्कृतिक परिदृष्य निजता के अधिकार के मामले में ज्यादा महत्वपूर्ण है। वेणुगोपाल ने कहा कि अमेरिकी संविधान वैसे अधिकार को संरक्षित करता है जो अमेरिकी राष्ट्रीय इतिहास और संस्कृति से ताल्लुक रखता है। भारत में भी वही स्थिति होनी चाहिए।


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