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बच्चे को लग जाए 'मोबाइल' की लत तो ऐसे छुड़ाएं, पढ़िये

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| मई 24 , 2017 , 12:38 IST | नयी दिल्ली

आज हम विज्ञान और तकनीकी सफलताओं के आकाश पर क़दम रखने जा रहे हैं। दुनिया सच में हमारी हथेली पर रखे मोबाइल फोन में सिमट चुकी है। तकनीकी तरक़्क़ी ने हमारी ज़िन्दगी आरामदेह कर दी है। हम अपने बच्चों के हाथ में महँगे स्मार्ट फ़ोन थमा कर ख़ुद पर गुमान महसूस करते हैं। हमारे तीन साल के बच्चे इन जादू की खिड़कियों से अपने सपनों की दुनिया में टहलते हैं, अपना मनपसंद गाना यूट्यूब में चला सकते हैं।

थोड़े बड़े होते ही तरह-तरह के गेम्स खेलकर उनके लेवल्स जीत रहे हैं। लेकिन जैसा कि कहावत है हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। इस सामाजिक मोबाइलकरण का सबसे बड़ा नुक़सान हमारे बच्चे ही उठा रहे हैं। बाहर की हवा, बाग़-बगीचों की रौनक़ से वंचित होकर इस मोबाइल के तिलिस्म में कैद होकर रह गये हैं हमारे बच्चे। आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में स्मार्ट फोन इस्तेमाल करने से बच्चों को अनिद्रा, डिप्रेशन, बेचैनी यहाँ तक की नेटवर्क ना मिल पाने से झल्लाहट होती रहती है।

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मानसिक पहलू के साथ शारीरिक समस्याएँ जैसे गर्दन में दर्द, उँगलियों में दर्द, आँखों में परेशानी, भूख ना लगना और सबसे ज़्यादा दिल दहलाने वाला रिसर्च जो सामने आया है वह यह कि छोटे बच्चों के दिमाग़ पर मोबाइल से निकली रेडिएशन बड़े लोगों के मुक़ाबले दोगुना नुक़सान करती है। ब्रेन कैंसर की सम्भावना बढ़ जाती है। अब सवाल यह है कि अपने बच्चों को कैसे बचाए इस ख़ुद के बनाए भस्मासुर से।

अगर हम कोशिश करें तो ये बहुत आसान है, बस ज़रूरत है दुनिया की सबसे कीमती दो चीज़ें अपने बच्चों को दें-अपना वक़्त और प्यार। बच्चों को एक सही उदाहरण बनकर दिखाये। परिवार के साथ समय बिताये, बच्चों को बाहर खेलने के लिये उत्साहित करें। धूप,गरमी, हवा, बारिश सबका आन्नद लेना सिखाये। मोबाइल एक वरदान है इसे अभिशाप ना बनाये।

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