इंटरनेशनल

चीन ने साउथ चाइना सी में तैनात की क्रूज मिसाइलें, अमेरिका ने कहा- अंजाम भुगतना पड़ेगा

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
357
| मई 4 , 2018 , 12:53 IST

साउथ चाइना सी पर विवाद बढ़ता जा रहा है। विवादित क्षेत्र में अमेरिकी जहाजों की उड़ान के बाद चीन ने अपने जंगी जहाजों का सैन्य अभ्यास किया था। अब चीन ने इससे एक कदम और आगे बढ़कर इस इलाके की निगरानी के लिए एंटी शिप क्रूज मिसाइलें और सतह से हवा में मार करने वाले मिसाइल सिस्टम की तैनाती कर दी है। चीन ने दावा किया है कि इस इलाके पर निर्विवाद रूप से उसी का हक है।

चीन ने क्रूज मिसाइल की तैनाती का यह काम इतने गुपचुप तरीके से किया कि अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसियों को भी काफी समय बाद इसके बारे में पता चल सका। इंटेल रिपोर्ट के मुताबिक, मिसाइल तैनाती का कार्य बीते दिनों में किया गया।

सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार चीन ने वाय जे-12बी जहाजरोधी मिसाइल तैनात की हैं, जो 295 समुद्री मील की दूरी तक जहाजों पर हमला कर सकती है। सतह से हवा में मार करने वाली एच क्यू-9बी मिसाइल भी तैनात की गई है जो 160 समुद्री मील तक विमानों, ड्रोन और क्रूज मिसाइलों पर हमला कर सकती है।

इस इलाके में चीन के द्वारा घातक मिसाइलें तैनात करने पर अमेरिका ने अंजाम भुगतने की धमकी दी है। व्हाइट हाउस की मीडिया ब्रीफिंग के दौरान प्रेस सेक्रेटरी सारा सैंडर्स ने कहा कि अमेरिका को साउथ चाइना सी में चीन की सभी गतिविधियों के बारे में पता है। हमने सीधे तौर पर चीन से चिंता जाहिर की है। अब इस मुद्दे के कुछ दूरगामी परिणाम होंगे। बता दें कि चीन इस इलाके पर अपना हक जताता है। पिछले 30 दिनों में यहां के तीन द्वीपों पर मिसाइलें तैनात की हैं।

बता दें कि पिछले कई दिनों से कयास लगाए जा रहे थे कि चीन साउथ चाइना सी में अपना सैन्य तंत्र खड़ा करने में जुटा है। अमेरिकी मीडिया की कुछ हालिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया था कि चीन ने विवादित क्षेत्र में तीन जगहों पर मिसाइलें तैनात की हैं। गुरुवार को चीन ने खुद ही इन कयासों को पुख्ता करते हुए कहा कि साउथ चाइना सी पर उसकी निर्विवाद संप्रभुता है।

साउथ चाइना सी पर एक ओर जहां चीन अपना दावा करता रहा है, वहीं वियतनाम, फिलिपींस, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान इसके उलट दावा करते हैं।

बहरहाल, इन द्वीपों पर हक तो सभी जता रहे हैं, लेकिन इस बात में कोई शक नहीं है कि चीन साउथ चाइना सी में लगातार ताकत बढ़ा रहा है।

अमेरिका भी इस इलाके में नजर रखे हुए है। अप्रैल के आखिरी हफ्ते में इस इलाके में अमेरिकी वायुसेना के बमवर्षक विमानों (B-52 Stratofortress) ने एक प्रशिक्षण मिशन के तहत दक्षिण चीन सागर के ऊपर से उड़ान भरी थी। वायु सेना के अनुसार, बमवर्षक विमान ने गुआम द्वीप स्थित एंडरसन हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी, लेकिन इसका खुलासा नहीं हुआ था।

अमेरिकी सेना के एक अधिकारी ने बताया था कि अमेरिका के दो बम वर्षक विमानों ने स्प्रैटली द्वीप समूह पर उड़ान भरी। चीन ने स्प्रैटली की भोगौलिक विशेषताओं का इस्तेमाल कृत्रिम द्वीप समूह बनाने में किया है। इनमें से कुछ को बीजिंग ने सैन्य सुविधाओं से लैस किया है।

अधिकारी ने बताया कि चीनी सेना ने अमेरिकी विमान के मार्ग में कोई बाधा उत्पन्न नहीं की। एडमिरल फिलिप डेविडसन ने कांग्रेस को इस महीने बताया था कि चीन इन द्वीपों का इस्तेमाल दक्षिण चीन सागर पर अपना नियंत्रण स्थापित करने के लिए कर रहा है।

साउथ चाइना सी दक्षिणी-पूर्वी एशिया से प्रशांत महासागर के पश्चिमी किनारे तक स्थित है। इसमें करीब 1.4 मिलियन स्क्वेयर क्षेत्र पर द्वीप हैं। कई जगहों पर चट्टानें हैं। साउथ चाइना सी कई दक्षिणी-पूर्वी एशियाई देशों से घिरा है। इनमें चीन, ताइवान, फिलीपीन्स, मलेशिया, इंडोनेशिया और वियतनाम शामिल हैं। ये सभी देश साउथ चाइना सी पर अपने-अपने दावे कर रहे हैं। साउथ चाइना सी दुनिया का बेहद अहम व्यापार मार्ग है। ऐसा भी कहा जाता है कि दक्षिण चीन सागर में विशाल तेल के भंडार हैं। साउथ चाइना सी में तेल की खोज को लेकर चीन भी सक्रिय है। भारत भी वियतनाम के साथ मिलकर तेल की खोज में जुटा है। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी की ओर से लगाए गए अनुमान की मानें तो साउथ चाइना सी में 11 बिलियन बैरल्स ऑइल और 190 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस के भंडार हैं।


कमेंट करें