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मानसरोवर यात्रा पर चीन मानेगा या नहीं? अब कहा- चल रही है बातचीत

अनुराग गुप्ता, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 26 , 2017 , 16:12 IST | नई दिल्ली

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर एक बार फिर चीन अपना अड़ंगा लगाता हुआ नजर आ रहा है। सिक्किम में नाथू ला दर्रे के जरिए कैलाश मानसरोवर की यात्रा को लेकर चीन का कहना है कि वो भारत के साथ बात कर रहा है। चीन के मुताबिक इस मुद्दे पर दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत हो रही है।

पिछले दिनों चीन ने तिब्बत में भूस्खलन और बारिश के चलते सड़कों के क्षतिग्रस्त होने होने के मद्देनजर श्रद्धालुओं के दो जत्थों को चीन के बॉर्डर से वापस लौटा दिया था। जिसके बाद से राजधानी दिल्ली में ठहरे हुए तीसरे जत्थे के यात्रियों की चिंता बढ़ गई थी।

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तीसरा जत्था 27 जून यानी कि मंगलवार को नाथू-ला के लिए रवाना किया जाएगा। गौरतलब है कि असम में अरुणाचल प्रदेश को जोड़ने वाली ब्रह्मपुत्र नदी पर बने देश के सबसे लंबे पुल का पीएम मोदी ने उद्घाटन किया था, जिसके बाद से ही चीन का रवैया बदला-बदला नजर आने लगा।

इसके बाद चीन ने नाथूला के रास्ते मानसरोवर यात्रा के लिए 8 जत्थों की अनुमति को कम करके 7 जत्थों तक सीमित कर दी थी और हाल ही में दो जत्थों को भूस्खलन और बारिश का हवाला देते हुए प्रवेश देने से इनकार कर दिया था। जिसके बाद करीब 90 यात्रियों को वापस गैंगटोक बुला लिया गया था।

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बता दें कि कैलाश मानसरोवर यात्रा दो रास्तों से पूरी की जा सकती है। पहला उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रा और दूसरा सिक्किम के नाथुला दर्रा । उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रा से होते हुए जाने पर कुछ ट्रेकिंग भी करना पड़ता है। इस रास्ते से यात्रा 24 दिनों की होती है।

यात्रा का दूसरा मार्ग सिक्किम के नाथु ला दर्रे से होकर जाता है और यह वरिष्ठ नागरिकों के लिए आसान रास्ता है क्योंकि इस रास्ते पर ट्रेकिंग नहीं करनी पड़ती है। इस रास्ते यात्रा करने पर 21 दिनों का वक्त लगता है।


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