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बड़ी ख़बर: स्वेज नहर के मुहाने पर चीन ने क्यों खोला सैनिक अड्डा?

कुलदीप सिंह, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 2 , 2017 , 11:50 IST | जिबूती

चीन ने पश्चिमी देशों खासतौर पर अमेरिका को चुनौती देते हुए विदेशी जमीन पर अपने पहले सैन्य अड्डे का उद्घाटन कर दिया है। एक अगस्त 2017 को अपनी 90वीं वर्षगांठ मनाती चीनी सेना ने जिबूती में झंडा लहराकर अपना सैन्य अड्डे का उद्घाटन किया।

अदन की खाड़ी में बसा जिबूती एक अफ्रीकी देश है। सैन्य अड्डा पश्चिमोत्तर हिंद महासागर में स्थापित किया गया है जो भारत के लिए भी एक सीधी चुनौती है।

 

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जिबूती में चीन ने पिछले साल लॉजिस्टिक बेस बनाने का काम शुरू किया था बीजिंग का कहना है कि जिबूती के सैन्य अड्डे का इस्तेमाल यमन और सोमालिया जैसे देशों में मानवीय मदद के लिए किया जाएगा। वहां चीनी नौसेना के पोत तैनात होंगे, जो इलाके में शांति बहाल करने में भी मदद देंगे।

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चीन के सरकारी रेडियो के मुताबिक मंगलवार को उद्धाटन समारोह में 300 लोग शामिल हुए। मेहमानों में चीनी नौसेना के कमांडर तियान झोंग और जिबूती के रक्षा मंत्री भी शामिल थे। सैन्य अड्डे की मदद से चीनी नौसेना पश्चिमोत्तर हिंद महासागर की निगरानी कर सकेगी।

जिबूती की लोकेशन उसे सामरिक नजर से बेहद अहम बनाती है। जिबूती स्वेज नहर के मुहाने पर है। जिबूती के पड़ोसी देशों इथियोपिया, इरीट्रिया और सोमालिया में पहले से ही अमेरिकी, जापानी और फ्रांसीसी सेना के अड्डे हैं। यह बात सबको पता है कि एशिया में विवाद की स्थिति में स्वेज नहर पर नियंत्रण कर पश्चिमी नौसैनिक बेड़ों को रोका जा सकता है।

भारत, बीजिंग के इस कदम से बिफरा हुआ है। भारत को लग रहा है कि चीन सैन्य रूप से उसे घेरने की कोशिश कर रहा है। चीन भारत के आस पास माला की तर्ज पर सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है। हाल के बरसों में बीजिंग ने बांग्लादेश, म्यांमार और श्रीलंका के साथ सैन्य व आर्थिक सहयोग बेहद गहरा किया है।

चीनी सेना के रुख से दुनिया में असहजता की स्थिति भी बन रही है। जापान के साथ चीन का पूर्वी चीन सागर विवाद है। दक्षिण चीन सागर को लेकर बीजिंग का सात देशों से विवाद चल रहा है। भारत के साथ चीन का सीमा विवाद बीते दो महीनों से चरम पर है। इसके अलावा ताइवान के मुद्दे पर भी चीन का रुख आक्रामक रहा है। इन तमाम विवादों के शांतिपूर्ण हल के बजाए चीन सेना की धमक दिखा रहा है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सेना के आधुनिकीकरण पर जोर दे रहे हैं।वह चाहते हैं कि चीनी सेना देश से दूर भी अपनी सैन्य क्षमताएं विकसित करें।

कूटनीतिक गलियारों में यह कयास भी लगाए जा रहे हैं चीन ऐसा ही सैन्य अड्डा पाकिस्तान में भी बनाना चाहता है, लेकिन फिलहाल चीन सरकार इससे इनकार कर रही है


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