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चीन का नया दांव- नक्शा जारी कर डोकलाम पर जताया दावा

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 1 , 2017 , 17:16 IST | नई दिल्ली

चीन ने सिक्कम सेक्टर के विवादित इलाके डोकलाम पर अपने दावे को बार फिर मजबूती से जाहिर किया है। भूटाने के दावे को खारिज करते हुए चीन के विदेश मंत्रालय ने चीनी सैनिकों द्वारा विवादित इलाके में किए जा रहे सड़क निर्माण कार्य को सही ठहराया है। चीन ने डोकलाम पर अपने दावे की पुष्टि करते हुए इसके लिए अपने नए नक्शे का हवाला दिया है।

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चीन ने भारत-चीन-भूटान त्रिकोणीय जंक्शन पर भी किया दावा

चीन ने नया नक्शा जारी किया है, जिसमें उसने गतिरोध वाली जमीन पर दावा किया है। साथ ही साथ चीन ने भारत-चीन-भूटान त्रिकोणीय जंक्शन पर भी दावा किया है। नकशे में दावा किया गया है कि भारतीय सेना ने डोकाला पास पर सीमा पार की। ये नक्शा शुक्रवार को जारी किया गया है। चीनी त्रिकोणीय जंक्शन को एक तीर द्वारा चिह्नित किया गया है, जो दावा करता है कि यह 1890 में ब्रिटिश-चीन संधि के अंतर्गत है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा है कि 'हम कई बार जोर देकर कह चुके हैं कि डोकलाम चीन का है और इसे लेकर कोई विवाद नहीं है। जिस इलाके में सड़क बनाई जा रही है, वह पूरी तरह चीन की सीमा के अंदर आता है। इतना ही नहीं चीन की सरकार ने फिर अपनी इस मांग को दोहराया है कि भारत को उस इलाके से अपने सैनिक वापस बुला लेने चाहिए।

डोकलाम का इस्तेमाल चीन चारागाह के रुप में करते हैं

लू ने आगे कहा, 'डोकलाम इलाके का इस्तेमाल तिब्बत के लोग पारंपरिक चारागाह के रूप करते रहे हैं और हमने इस इलाके अच्छे से प्रसाशन संभाला है। 1960 के दशक से पहले बॉर्डर पर रहने वाले भूटान के लोगों को यहां अपने मवेशी चराने के लिए चीन की इजाजत लेनी पड़ती थी।

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बना हुआ है भारत-चीन सीमा पर गतिरोध

बता दें कि विवादित इलाकों पर अपना दावा जताने के लिए चीन हमेशा से 'इतिहास के अपने संस्करण' का सहारा लेता रहा है। चाहे बात अरुणाचल की हो, जापान के साथ सीमा विवाद की हो या साउथ चाइना सी इलाके की, चीन हमेशा से यही करता आया है।
गौरतलब है कि चीन और भूटान के बीच के विवादित क्षेत्र डोकलाम में चीन द्वारा सड़क निमार्ण कार्य को भारतीय सैनिकों द्वारा अवरूद्ध किए जाने के बाद भारत और चीन के सैनिकों के बीच गतिरोध बना हुआ है।

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चीन के सैनिक जिस इलाके में सड़क बनाना चाह रहे थे, वह भूटान के साथ भारत के लिए कई सुरक्षा चिंताएं खड़ी करता है। उस इलाके से भारत के सिलिगुड़ी कॉरिडोर की दूरी काफी कम है, जो नॉर्थ ईस्ट को भारत के शेष इलाकों से जोड़ता है।

 


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