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अब 'पंचशील समझौते' को लेकर भारत से भिड़ा चीन, कहा- सीमा से सैनिक हटाए भारत

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 5 , 2017 , 20:32 IST | बीजिंग

चीन ने बुधवार को कहा कि 'चीनी क्षेत्र में दाखिल होकर भारत ने पंचशील समझौते को कुचला है।' साथ ही कहा कि 'सीमा पर हालात बद्तर होने' से पहले भारत अपने सैनिकों को वापस बुला ले। बीजिंग ने यह भी कहा कि भारत यह कहकर अपने नागरिकों को 'गुमराह' कर रहा है कि डोकलाम भारत, भूटान तथा चीन के ट्राई-जंक्शन पर स्थित है।

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा, "और जैसा कि हम सभी जानते हैं कि चीन, भारत तथा म्यांमार ने सन् 1950 में शांतिपूर्ण सह अस्तित्व के लिए संयुक्त तौर पर पांच सिद्धांतों का प्रस्ताव किया था। लेकिन, भारत ने सबको हैरत में डालते हुए अवैध रूप से दूसरे के क्षेत्र में घुसकर अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मानदंडों का उल्लंघन किया है।"

गेंग ने एक बार फिर दोहराया कि डोकलाम से भारतीय सैनिकों की वापसी ही बातचीत की शर्त है। उल्लेखनीय है कि सिक्किम सेक्टर के डोकलाम में भारतीय तथा चीनी सैनिकों के बीच गतिरोध उत्पन्न हो गया है।

पंचशील के सिद्धांत

एक दूसरे की अखंडता और संप्रभुता का सम्मान

परस्पर अनाक्रमण

एक दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना

समान और परस्पर लाभकारी संबंध

शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व

शांति के लिए किया गया समझौता

पंडित नेहरू ने अप्रैल 1954 में संसद में इस संधि का बचाव करते हुए कहा था कि ये वहाँ के मौजूदा हालात को सिर्फ एक पहचान देने जैसा है। ऐतिहासिक और व्यावहारिक कारणों से ये कदम उठाया गया। उन्होंने क्षेत्र में शांति को सबसे ज्यादा अहमियत दी और चीन में एक विश्वसनीय दोस्त देखा। इसके बाद भी जब भारत और चीन संबंधों की बात होती है तब इस सिद्धांत का उल्लेख जरूर होता है। इस संधि को भले ही 1962 में जबरदस्त चोट पहुँची हो मगर अंतर्रराष्ट्रीय संबंधों में इसका अमर दिशा-निर्देशक सिद्धांत हमेशा जगमगाता रहा परंतु अब एक बार फिर इस समझौते पर आंच आती नजर आ रहा है।

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उधर रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने बुधवार को यहां कहा कि भारत तथा चीन को सीमा पर जारी गतिरोध कूटनीति के जरिए सुलझाने चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि चीन को उस जगह पर बने रहना चाहिए, जहां वह अतीत में था। हालात के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि चीन को भूटान के क्षेत्र में नहीं घुसना चाहिए और भारत का यही रुख है।


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