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चीन का स्पेस स्टेशन हवा में ही जलकर हुआ नष्ट, प्रशांत महासागर में गिरे टुकड़े

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 2 , 2018 , 14:35 IST

चीन का स्पेस स्टेशन दुनिया भर में लोगों के चिन्ता का कारण बन गया था। इसके बारे में तमाम कयास लगाए जा रहे थे। वैज्ञानिकों के मुताबिक स्पेस स्टेशन तियानगोंग-1 सोमवार को क्रैश हो गया है। यह स्टेशन टूटकर दक्षिण प्रशांत महासागर में गिर गया। जहां किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ।

चीन के स्पेस ऐजेंसियों के मुताबिक यह स्पेस स्टेशन (तियानगोंग-1) 8 टन वजनी था और पृथ्वी के वायुमंडल में पहुंचते ही ज्यादातर हिस्सा समुद्र में गिरने से पहले ही जल गया था। वैज्ञानिकों ने भी स्पेस स्टेशन के धरती पर आने से किसी भी नुकसान की आशंका से इनकार किया था।

इसके पहले कहा जा रहा था कि यह ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के बीच गिर सकता है। रविवार को चाइना मैन्ड स्पेस इंजीनयरिंग ऑफिस (CMSEO) ने चेताया था कि 'तियांगोंग-1' अंतरिक्ष स्टेशन कुछ ही घंटे में वायुमंडल में प्रवेश कर जाएगा और इसके ऑस्ट्रेलिया से लेकर अमेरिका तक कहीं पर भी गिरने की आशंका है। CMSEO ने कहा था कि सोमवार को अंतरिक्ष प्रयोगशाला (स्पेस लैब) पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करेगा।

इसके अलावा CMSEO द्वारा हाल ही में प्रकाशित लेख में कहा गया था कि 'तियांगोंग-1' वायुमंडल में जल जाएगा और इससे जमीन पर किसी तरह के नुकसान होने की संभावना बेहद कम है। CMSEO ने यह पहले ही कह दिया था कि आठ टन वजन वाले इस स्पेस लैब से विमानन गतिविधि पर कोई प्रभाव पड़ने या जमीन पर कोई नुकसान पहुंचने की संभावना नहीं है। हालांकि लैब के मलबे का बहुत छोटा सा हिस्सा जमीन पर गिरेगा।

अलर्ट था अमेरिका-:

वहीं, अमेरिका के मिशिगन में अधिकारी इसको लेकर अलर्ट हैं, ताकि किसी भी स्थिति से निपटने निपटा जा सके। आपात टीमें भी तैयार की गई हैं। मालूम हो कि तियांगोंग-1 एक अंतरिक्ष लैब था, जिसे सितंबर 2011 में प्रक्षेपित किया गया था। इस लैब ने जून 2013 में अपना मिशन पूरा कर लिया था।

क्यों गिरा तियानगोंग..?

चीन ने तियानगोंग-1 सिर्फ दो साल की टाइम लिमिट तक काम करने की लिए बनाया था। पहले चीन की योजना थी कि वे स्पेस लैब को पृथ्वी की कक्षा से बाहर कर देंगे, जिससे तियानगोंग अपने आप अंतरिक्ष में खत्म हो जाएगा। हालांकि, मई 2011 से मार्च 2016 तक करीब 5 साल काम करने के बाद ये चीनी स्पेस एजेंसी के कंट्रोल से बाहर हो गया। जिसकी वजह से पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल ने इसे पृथ्वी के अंदर खींच लिया।

पृथ्वी पर पहले भी गिर चुके हैं स्पेस स्टेशन-:

तियानगोंग से पहले कई और स्पेस स्टेशन भी बेकाबू होकर धरती पर क्रैश हो चुके हैं। सबसे पहला था नासा का 85 टन वजनी स्काईलैब स्पेस स्टेशन, जो जुलाई 1979 में हिंद महासागर में गिर गया था। इसका कुछ हिस्सा ऑस्ट्रेलिया के एस्पेरैंस शहर में भी गिरा था। शहर में गंदगी फैलाने को लेकर नासा पर 400 डॉलर्स (करीब 26 हजार रूपए) का जुर्माना भी लगाया गया था।

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इसके अलावा फरवरी 1991 में सोवियत यूनियन का 22 टन वजनी सैल्युत 7 अपनी कक्षा छोड़कर धरती पर क्रैश हो गया था। हालांकि, स्काईलैब और सैल्युत दोनों के ही अनकंट्रोल होते वक्त उनमें कोई सवार नहीं था।

2001 में रूस का 140 टन वजनी स्पेस स्टेशन मीर अपनी कक्षा में काबू से बाहर हो गया था। हालांकि, वैज्ञानिकों ने उसे दोबारा कंट्रोल करके क्रैश कराया था। 1986 में अंतरिक्ष में भेजा गया मीर दुनिया का पहला स्थाई स्पेस स्टेशन था।

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