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दलाई लामा के अरुणाचल दौरे से भड़का चीन, भारत ने कहा - यात्रा धार्मिक है राजनीतिक नहीं

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अप्रैल 4 , 2017 , 15:36 IST | तवांग

दलाई लामा के अरुणाचल प्रदेश के दौरे से पहले चीन के विरोध के बाद भारत ने मंगलवार को कहा कि दलाई लामा पहले भी छह बार अरुणाचल प्रदेश का दौरा कर चुके हैं और उनकी पांच अप्रैल से शुरू इस यात्रा को अलग रंग नहीं दिया जाना चाहिए।

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विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है,

सरकार कई अवसरों पर स्पष्ट कर चुकी है कि दलाई लामा धर्मगुरु हैं और भारतीय उनका बहुत सम्मान करते हैं। उनकी धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों एवं देश के विभिन्न हिस्सों में उनके दौरों को अलग रंग नहीं दिया जाना चाहिए।



मंत्रालय के मुताबिक,

सरकार आग्रह करती है कि उनके मौजूदा अरुणाचल दौरे को लेकर किसी तरह का विवाद पैदा नहीं होना चाहिए।



चीन ने मार्च में चेतावनी दी थी कि यदि भारत दलाई लामा को अरुणाचल प्रदेश का दौरा करने देता है तो इससे उसके भारत के साथ संबंध बाधित होंगे।गौरतलब है कि चीन, अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता आया है।

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चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि चीन दलाई लामा को अरुणाचल प्रदेश का दौरा करने की मंजूरी देने को लेकर चिंतित है। गेंग ने कहा कि चीन दलाई लामा की इस यात्रा का पुरजोर विरोध करता है।

गेंग ने संवाददाता सम्मेलन में कहा,

"चीन दलाई लामा के विवादित क्षेत्रों का दौरा करने का पुरजोर विरोध करता है।"



गेंग ने कहा कि भारत दोनों देशों के बीच सीमा मुद्दों की संवेदनशीलता को समझता है और तब भी दलाई लामा को अरुणाचल का दौरा करने अनुमति दे रहा है, जिससे उसके चीन के साथ संबंध खराब होंगे।चीन, अरुणाचल पर अपना दावा करते हुए इसे दक्षिण तिब्बत बताता है। इसके अलावा वह दलाई लामा को तिब्बत में अलगाववादी गतिविधियों के लिए भी जिम्मेदार ठहराता है। विदेश मंत्रालय ने दलाई लामा की वेबसाइट के हवाले से कहा है कि दलाई लामा पहले भी छह बार अरुणाचल का दौरा कर चुके हैं। वह 1983, 1996, 1997 में और दो बार 2003 में, जबकि 2009 में अरुणाचल जा चुके हैं।

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दलाई लामा के कार्यालय के मुताबिक, वह पांच से सात अप्रैल तक तवांग के यीगा चोजिन में धार्मिक उपदेश देंगे। वह 10 अप्रैल को दिरांग के थुपसंग धारयेलिंग मठ में भी उपदेश देंगे।

वह 11 अप्रैल को बोमडिला के बुद्ध पार्क जाएंगे और 12 अप्रैल को ईटानगर के थुपतेन गाटसल लिंग जाएंगे।

गौरतलब है कि अरुणाचल का तवांग सबसे पवित्र बौद्ध मठों में से एक है।


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