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शिवराज से बोले पीड़ित किसान- 10 करोड़ और नौकरी नहीं, दोषियों पर कार्रवाई चाहिए

सतीश वर्मा, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 1
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| जून 14 , 2017 , 16:58 IST | मंदसौर

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधवार को मंदसौर पहुंचे। वे किसान आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में मारे गए लोगों के परिजनों से मिले। सीएम के दौरे से पहले मंदसौर में धारा 144 को हटा लिया गया था। जब शिवराज एक मृतक के परिजन से मिले तो उन्होंने कहा कि हमें सरकारी नौकरी या मदद नहीं चाहिए। हम बस दोषियों पर कार्रवाई चाहते हैं।

इसके बाद सीएम ने कहा कि इस मामले को वे खुद देख रहे हैं और दोषियों को नहीं छोड़ा जाएगा। उधर, कांग्रेस भी सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने जा रही है।

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युवा नेता और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ दूसरे नेताओं ने भोपाल में 72 घंटे का सत्याग्रह शुरू कर दिया है। सिंधिया को एक दिन पहले ही मंदसौर में एंट्री नहीं मिली थी।

किस बात पर खामोश हुए सीएम शिवराज

सीएम पुलिस कार्रवाई में मारे गए घनश्याम (32) के पिता दर्गालाल से मिले। लाठीचार्ज में घायल होने के बाद घनश्याम को इंदौर ले जाया गया था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। पिता ने कहा कि दोषियों पर सख्त से सख्त कारवाई हो। हमें सरकारी नौकरी या सहायता राशि नहीं चाहिए। बस दोषियों पर कार्रवाई हो।

इसके बाद सीएम महिलाओं से मिलने घर के भीतर पहुंचे। मृतक घनश्याम की रेखा ने आक्रोश में आकर कहा कि आप पुलिस को गोली चलाने का आदेश दे सकते हो क्या? इस पर सीएम खामोश हो गए। इसके बाद उन्होंने कहा कि मैं खुद इस मामले का देख रहा हूं, दोषियों को दंड मिलेगा।

बता दें कि मंदसौर में पुलिस फायरिंग में 6 किसानों की मौत हो गई थी। 32 साल के घनश्याम बड़वन से थे। इसके अलावा 40 साल के कन्हैयालाल चिल्लौद पिपलिया के रहने वाले थे।

5 साल के बबलू टकरावद और 17 साल के अभिषेक बरखेड़ापंत से थे। वहीं, चैनराम नयाखेड़ा के रहने वाले थे। शांति की अपील करते हुए शिवराज ने अनशन भी किया था।

चैनराम के परिवार को नौकरी देने का वादा

सीएम नीमच के नयाखेड़ा में चैनराम पाटीदार के घर पहुंचे। परिवार के साथ छोटे भाई गोविंद से कामकाज के बारे में जानकारी ली। जवाब में गोविंद ने कहा- " मैं 10वीं पास हूं।" इसके बाद सीएम ने कहा कि विधायक दिलीप सिंह परिहार के साथ भोपाल आ जाना आपको नौकरी दे दी जाएगी।

बाद में मीडिया से कहा कि मैं किसानों को सुनने निकला हूं। मंदसौर की घटना के बाद सरकार ने किसान हित में कई फैसले लिए हैं।

इससे पहले वे बड़वन से सीएम सीधे लोध पहुंचे। यहां वे मारे गए सत्यनारायण के परिजनों से मिले। सीएम ने कहा कि मैं दुख की इस घड़ी में आपके साथ हूं, पूरी सरकार आपके साथ खड़ी है। सरकार आपका कर्ज माफ कर रही है। आपके खाते में एक करोड़ रुपए आ जाएंगे।

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किसान आंदोलन के दौरान मध्य प्रदेश के मंदसौर में हुई पुलिस फायरिंग में ज़िले के टकरावत गांव में रहने वाले बबलू पाटीदार की मौत हो गई थी। बबलू पाटीदार की पत्नी अनीता ने कहा है कि मैं ये कहना चाहती हूं कि मेरा पति आंदोलन में गया था क्योंकि न तो उनको लहसुन के पैसे मिले थे, न धनिये के मिले थे। मेरी सास का ऑपरेशन हुआ था। गांव में से पैसे लेकर इनका ऑपरेशन करवाया था।

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पाटीदार की पत्नी अनीता कहती हैं कि,

सरकार क्यों नहीं सुन रही है? हमारे अनाज के पैसे क्यों नहीं बढ़ रहे हैं? परेशान थे पैसों की वजह से, इसलिए आंदोलन में गए थे। तो पुलिसवालों ने फायरिंग करके उनको मार डाला। क्या होगा अब हमारा

अनीता ने कहा कि,

सरकार कोई सुनवाई नहीं कर रही है। क्या वो मेरा पति लाकर मेरे को देगी अब? सरकार ये बोल रही है कि हमें एक करोड़ रुपये देगी। मेरा कहना है कि मैं 10 करोड़ रुपये दे दूं… मेरा पति लाकर दे रही है क्या सरकार

सिंधिया और हार्दिक को लिया था हिरासत में

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को जावरा के रास्ते मंदसौर जाने की कोशिश की थी। पुलिस ने उन्हें मंदसौर-जावरा सीमा पर टोल के पास रोककर हिरासत में ले लिया था। सिंधिया के अलावा सांसद कांतिलाल भूरिया और पूर्व मंत्री महेंद्रसिंह कालूखेड़ा को भी पुलिस ने हिरासत में लिया गया था। एडमिनिस्ट्रेशन ने सिंधिया को सेक्शन 144 लागू होने के चलते मंदसौर में घुसने की मंजूरी नहीं दी।

इससे पहले हार्दिक मंगलवार सुबह करीब 10 बजे राजस्थान-एमपी बॉर्डर से सटे नयागांव पहुंचे थे। उनके साथ जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव अखिलेश कटियार भी मौजूद थे। हार्दिक ने जैसे ही मध्य प्रदेश में एंट्री की वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। हार्दिक को रोकने के लिए पुलिस ने महू-नसीराबाद हाईवे बंद कर दिया था।

क्या हैं किसानों की मांगें, क्यों अनशन पर बैठे थे शिवराज

महाराष्ट्र के बाद जून की शुरुआत में मध्य प्रदेश में भी किसानों ने आंदोलन शुरू किया था। मध्य प्रदेश के किसानों की मांग है कि उन्हें कर्ज माफी दी जाए, फसलों पर मिनिमम सपोर्ट प्राइस मिले, जमीन के बदले मुआवजे पर कोर्ट जाने का हक मिले और दूध के रेट बढ़ाए जाएं।

3 जून को इंदौर में यह आंदोलन हिंसक हो गया था। बाद में मंदसौर, उज्जैन और शाजापुर जैसे राज्य के बाकी हिस्सों में फैल गया। मंदसौर में पुलिस की फायरिंग में 6 किसानों की मौत हो गई थी। शांति की अपील करते हुए शिवराज ने अनशन भी किया था।

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मध्य प्रदेश में किसानों की मांग

मध्य प्रदेश के किसान कर्ज माफी, मिनिमम सपोर्ट प्राइस, जमीन के बदले मिलने वाले मुआवजे और दूध के रेट को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। सबसे पहले 3 जून को इंदौर में यह आंदोलन हिंसक हुआ था। बाद में मंदसौर और राज्य के बाकी हिस्सों में भी फैल गया। इस दौरान हुई फायरिंग में 7 किसानों की मौत हो गई।

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कर्ज माफी और दूध के दाम बढ़ाने जैसे मुद्दे पर किसानों का आंदोलन महाराष्ट्र में 1 जून से शुरू हुआ था। वहां अब तक 7 लोगों की मौत हुई है।

मध्य प्रदेश सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए

सीएम चौहान ने किसानों पर केस खत्म करने, जमीन मामले में किसान विरोधी प्रावधानों को हटाने, फसल बीमा को ऑप्शनल बनाने, मंडी में किसानों को 50% कैश पेमेंट और 50% आरटीजीएस से देने का एलान किया था। यह भी कहा था कि सरकार किसानों से इस साल 8 रु. किलो प्याज और गर्मी में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदेगी। खरीदी 30 जून तक चलेगी।

सरकार ने यह भी एलान किया था कि एक आयोग बनेगा जो फसलों की लागत तय करेगा। उस पर किसानों को फायदा होने लायक कीमत मिले, यह सरकार सुनिश्चित कराएगी।

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