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राष्ट्रपति कोविंद के भाषण पर संसद में हंगामा, जेटली और आनंद शर्मा में नोक-झोंक

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जुलाई 26 , 2017 , 14:27 IST | नई दिल्ली

देश के 14वें राष्ट्रपति के रूप में मंगलवार को शपथ लेने वाले रामनाथ कोविंद के पहले भाषण पर राजनीति शुरू हो गई है। रामनाथ कोविंद के शपथग्रहण के बाद पढ़े गए भाषण को लेकर बुधवार को राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ। दरअसल राष्ट्रपति कोविंद ने अपने भाषण में  दीनदयाल उपाध्याय की तुलना महात्मा गांधी से की थी, जो कांग्रेस को रास नही आया।

बुधवार को राज्यसभा में आनंद शर्मा ने इस पर सवाल उठाए, जिसके जवाब में अरुण जेटली उन पर भड़क गए और दोनों के बीच काफ़ी देर तक नोक-झोंक हुई। राष्ट्रपति के भाषण में जवाहर लाल नेहरु और इंदिरा गांधी का नाम न लेने पर भी कांग्रेस भड़क गई। इन मुद्दो को लेकर कांग्रेस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आलोचना की और उन पर अपने पहले ही भाषण में देश और गांधी का अपमान करने के आरोप लगाए। 

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अरुण जेटली ने आनंद शर्मा के बयान को कार्यवाही से हटाने की मांग की, जिसके बाद सदन में हंगामा हो गया और कार्यवाही को 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

वहीं कांग्रेस ने भाषण में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू या किसी अन्य कांग्रेसी प्रधानमंत्री का जिक्र नहीं करने पर भी राष्ट्रपति की आलोचना की है। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, “पंडित दीन दयाल उपाध्याय की महात्मा गांधी से तुलना और जवाहरलाल नेहरू का जिक्र नहीं करना देश का अपमान है। यह महात्मा गांधी और अन्य स्वतंत्रा सेनानियों का भी अपमान है। यह बात भाषण में नहीं होनी चाहिए थी।”

उन्होंने आगे कहा, “हमें उम्मीद थी कि वह अब देश के राष्ट्रपति हैं न कि बीजेपी के उम्मीदवार, राष्ट्रपति सबके होते हैं। मगर यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के पहले प्रधानमंत्री का जिक्र नहीं हुआ। नेहरू एक स्वतंत्रता सेनानी के पुत्र थे। उनकी बेटी और पोते ने देश के लिए जान दी। मोतीलाल नेहरू से लेकर राजीव गांधी तक, किसी का भी जिक्र नहीं किया गया। यह जानबूझकर किया गया।”

क्या था मामला?

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शपथग्रहण के तुरंत बाद देश को संबोधित करते हुए कहा था, "हमें तेजी से विकसित होने वाली एक मजबूत अर्थव्यवस्था, एक शिक्षित, नैतिक और साझा समुदाय, समान मूल्यों वाले और समान अवसर देने वाले समाज का निर्माण करना होगा... एक ऐसा समाज, जिसकी कल्पना महात्मा गांधी और दीनदयाल उपाध्याय जी ने की थी... ये हमारे मानवीय मूल्यों के लिए भी महत्वपूर्ण है... ये हमारे सपनों का भारत होगा... एक ऐसा भारत, जो सभी को समान अवसर सुनिश्चित करेगा... ऐसा ही भारत, 21वीं सदी का भारत होगा..."

गौरतलब है कि राष्ट्रपति के रूप में अपने पहले भाषण में रामनाथ कोविंद ने राष्ट्र निर्माता की अपनी परिभाषा कई उदाहरणों के ज़रिये समझाई थी। कोविंद ने अपने भाषण में देश के आठ नेताओं का ज़िक्र किया, और उनमें छह कांग्रेस के ही नेता थे, लेकिन पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी का ज़िक्र नहीं होने पर कांग्रेस ने ऐतराज जताया था।


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