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बाबा रामदेव की जिंदगी पर आधारित किताब पर कोर्ट ने लगाया बैन, जानिये वजह

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 12 , 2017 , 13:07 IST | नई दिल्ली

दिल्ली की एक स्थानीय अदालत ने योग गुरु बाबा रामदेव पर लिखी गई एक किताब पर अंतरिम रोक लगा दी है। किताब का नाम ‘गॉडमैन टू टाइकून: दि अनटोल्ड स्टोरी ऑफ बाबा रामदेव’ है। आरोप है कि इस किताब में बाबा रामदेव के जीवन को गलत तरीके से पेश किया गया है।

दरअसल बाबा रामदेव ने ही खुद पर लिखी किताब पर रोक लगवाने के लिए अदालत में गुहार लगाई थी। जिसपर सिटी जज निपुन अवस्थी ने पब्लिशर को बिना नोटिस दिए किताब पर रोक लगा दी। कोर्ट ने ये भी कहा है कि आदेश लागू होने से पहले भी यदि कोई किताब खरीदने की इच्छा जाहिर कर चुका है तो उसे भी किताब न दी जाए और वेबसाइट से भी यह किताब हटाई जाए । वहीं पब्लिशर का कहना है कि उन्हें कोर्ट का आदेश 10 अगस्त (2017) को मिला है।

कंपनी ने कहा कि 'कोर्ट रोक लगाने से पहले न ही पब्लिशर का पक्ष सुना और न ही लेखक का। कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ कंपनी जल्द ही याचिका दायर कर सकती है। बता दें कि यह किताब रामदेव के जीवन पर आधारित है जिसमें उनके योग गुरु बनने से लेकर पतंजलि तक के सफर को बताया गया था।

कई साल से बाबा रामदेव पर रिसर्च कर रही अंग्रेजी पत्रकार प्रियंका पाठक नारायण ने इस किताब में बाबा के वो भेद खोलें हैं जो पतंजलि के समर्थकों को स्वीकार नहीं होंगे। प्रियंका कहती हैं कि इस किताब के लिए सबूत जुटाते वक़्त उन्हें ऐसा महसूस हुआ किया कि हादसे बाबा का लगातार पीछा कर रहे थे। उनके फर्श से अर्श तक पहुँचने के सफर में हादसों का अहम किरदार है। 

उन्होंने आगे बताया, 'मैं किताब लिखने के दौरान बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण से मिली थी। उस मुलाकात के दौरान रामदेव काफी सहज थे। इस किताब में बाबा रामदेव के हरियाणा में जन्म से लेकर उनके पतंजलि को एक आयुर्वेदिक कंपनी के तौर पर शुरू करके इसे कामयाबी के शिखर तक पहुंचाने की कहानी है। इसमें रामदेव के सहयोगी के तौर बालकृष्ण और अन्य लोगों की भूमिका का विस्तृत विवरण है।

ट्विटर पर रामदेव के इस कदम की आलोचना का जा रही है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पब्लिशर के समर्थन में ट्वीट करते हुए लिखा कि हमें प्रेस की स्वतंत्रता को बचाने की जरूरत है। पब्लिशर का कहना है कि वह इस आदेश के खिलाफ जल्द ही कोर्ट में याचिका दाखिल करने की सोच रहे हैं। हालांकि इस बारे में रामदेव के वकील प्रमोद नागर से संपर्क नहीं हो सका।


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