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रमजान की सहरी छोड़ आतंकियों को मारने भागे CRPF कमांडेंट इकबाल, गृहमंत्री ने की तारीफ

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| जून 6 , 2017 , 14:38 IST | बांदीपुरा

रमजान का महीना चल रहा है। ऐसे में हर मुसलमान की तरह सीआरपीएफ कमांडेंट इकबाल अहमद भी रोजा रख रहे हैं। सोमवार की सुबह भी वो हर रोज की तरह सहरी के लिए जल्दी जाग गए। लेकिन जबतक कमांडेंट इकबाल अहमद रोजा शुरू करने से पहले सहरी खा पाते.. उनके वायरलेस पर एक आपात मैसेज आता है.. सर, जल्दी कुछ कीजिए कैंप पर आतंकी हमला हुआ है। फिर क्या था। एक झटके में कमांडर के लिए हर रोज की तरह की आम सुबह किसी बड़े ऑपरेशन में बदल चुकी थी। खतरा बड़ा था और वक्त कम था। ऐसे में कमांडेंट के सामने सहरी खाने या कैंप पर आतंकियों से मुकाबला करें? दो ऑपशन थे। कमांडेंट ने वही किया जो ऐसे वक्त पर हर सैनिक करता है। कमांडेंट इकबाल ने शहरी खाना मुनासिब नहीं समझा और दौड़ पड़ें कैंप की ओर जहां कुछ आतंकी अपने खतरनाक मंसूबों के साथ पहले ही पहुंच चुके थे।

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ऑपरेशन में निभाई अहम जिम्मेदारी

कमांडेंट इकबाल को देखते ही वहां पहले से मोर्चा संभाल रहे सैनिकों के हौसले बुलंद हो गए। फिर क्या था। कमांडेंट आदेश देते गए और जवान गोलियां दागते गए। देखते ही देखते सभी चार आतंकी ढेर हो गए। बताया जा रहा है कि इस ऑपरेशन को पूरा करने में कमांडेंट इकबाल ने अहम भूमिका निभाई। आपको बता दें कि ये वही सीआरपीएफ का कैंप है जहां के पूर्व कमांडेंट चेतन चीता ने आतंकियों से लड़के हुए बहादुरी की मिसाल पेश की है। चेतन चीता के बाद ही कैंप की जिम्मेदारी कमांडेंट इकबाल के कंधों पर है। ऐसे में आतंकियों का ये हमला कमांडेंट इकबाल के लिए नाक का सवाल था।

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गृहमंत्री ने भी की तारीफ 

कमांडेंट इकबाल के हौसले और उनकी कर्त्तव्यनिष्ठा की हर तरफ प्रशंसा हो रही है। देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कमांडेट इकबाल की तारीफ की है। राजनाथ सिंह ने इस ऑपरेशन के लिए सुरक्षाबलों की तारीफ की। राजनाथ सिंह ने हमला नाकाम करने में सीआरपीएफ कमाडेंट इकबाल अहमद की बहादुरी का विशेष रूप से जिक्र किया। साथ ही उन्होंने कंपनी कमांडर शंकरलाल जाट और पंकज हल्लू के अलावा गार्ड कमांडर पंकज कुमार की भी तारीफ की। कांस्टेबल दिनेश राजा और प्रफुल्ल कुमार की बहादुरी को भी गृहमंत्री ने सराहा।

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आवारा कुत्तों ने भी की जवानों की मदद

आपको जान कर हैरानी होगी की कैंप के बाहर घूमने वाले दो आवारा कुत्तों ने भी जवानों की खूब मदद की। एक वक्त पर आतंकी जवानों की जवाबी कार्रवाई से डरकर छिप गए थे। ऐसे में आतंकियों के भाग खड़े होने का डर था। लेकिन तभी दोनों आवारा कुत्ते जोर-जोर से भोंकने लगे। जवानों के लिए इशार काफी था। कुत्ते की आवाज सुनकर जनावों ने वहां फायर टार्च जलाया और रोशनी में आतंकियों के ठिकाने का टोह लिया। जिसके जवानों ने गोलियों की बौछार कर दी और सभी आतंकी ढेर हो गए।
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