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जेंटलमैन गेम का अक्खड़ कप्तान!

icon कुलदीप सिंह | 1
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| जून 22 , 2017 , 20:31 IST | नई दिल्ली

वैसे ये लिखते वक्त थोड़ा अजीब लग रहा है कि जिस शख्सियत के लाखों फैन्स हों जिसे देश में ही नहीं विदेश में भी बल्ले का जादूगर माना जा रहा हो उसे अक्खड़ कहें तो कैसे कहें..ख़ैर इस झिझक को निकाल कर मैंने तो हिम्मत कर ली कि जिस तरह अच्छे प्रदर्शन पर देश भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान का अभिवादन और अभिनंदन करता है ठीक उसी तरह उनके अजीब व्यवहार पर सवाल उठाना कौन सी गलत बात है?

इंटरनेट विराट कोहली के क्रिकेटीय कारनामों और शोहरतों का गवाह है, 1988 में पैदा हुए विराट कोहली का अंतरराष्ट्रीय करियर अभी 10 साल का भी नहीं हुआ है लेकिन वो हिन्दुस्तान की टॉप -5 सेलिब्रिटी में शामिल हैं।

बचपन में सुना था फलदार वृक्ष (पेड़) हमेशा झुकता है, यानि समर्थ व्यक्ति का सबसे बड़ा गुण उसकी विनम्रता होती है। कोहली युवा और होनहार हैं लेकिन हद से ज्यादा जिद्दी भी हैं। ये कोहली की जिद ही थी कि आखिरकार भारतीय टीम के कोच अनिल कुंबले को पद छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।

ख़बरें हैं कि कोच कुंबले और कप्तान विराट कोहली दिसंबर 2016 में इंग्लैंड टेस्ट सीरीज़ के बाद से आपस में बात भी नहीं कर रहे थे। अंदाजा लगाइए कैसी संवादहीनता के बीच टीम और खिलाड़ी झूल रहे होंगे। साफ है 6 महीने से कुंबले और कोहली के बीच सामंजस्य नहीं बन पा रहा था, हालात इतने बिगड़ गए कि पाकिस्तान के हाथों चैंम्पियंस ट्रॉफी फाइनल हारने के बाद दोनों साथ बैठे और ये फैसला हुआ कि दोनों साथ साथ नहीं चल सकते।

अपुष्ट ख़बर के मुताबिक चैम्पियंस ट्रॉफी फाइनल में टॉस जीतने के बाद कुंबले ने विराट को बैटिंग करने की सलाह दी थी लेकिन उन्होंने फील्डिंग चुनी। बीसीसीआई के सूत्रों को कहना है कि कोहली को ऐसा लगता था कि कुंबले सलाह के नाम पर कप्तान के अधिकार क्षेत्र में दखल दे रहे हैं, जबकि कुंबले के करीबियों का कहना है कि कोच सलाह देता है उसपर अमल करना या न करना कप्तान का ही अधिकार होता है, यानि सलाह देना कोई गुनाह तो नहीं है।

बीसीसीआई ने टीम को सलाह देने के लिए एक सलाहकार समिति बना रखी है जिसमें सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण शामिल हैं, कुंबले के इस्तीफे के बाद भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने कहा है कि जब सारे फैसले विराट कोहली को ही करने हैं तो फिर CAC यानि सलाहकार समिति की जरूरत ही क्या है?

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कोच के इस्तीफे के बाद ख़बर आई है कि बीसीसीआई ने कोहली को साफ कर दिया है कि कुंबले के जाने के बाद टीम के प्रदर्शन का जिम्मा आप पर ही है अगर भविष्य में प्रदर्शन निराशाजनक रहा तो उन्हें हटाया भी जा सकता है। चैम्पियंस ट्रॉफी फाइनल के बाद कोहली ने सलाहकार समिति, कुंबले और बीसीसीआई के अधिकारियों के साथ एक बैठक में कहा कि उन्हें कोच पर भरोसा नहीं है लेकिन अगर उन्हें बाध्य किया जाएगा तो वो कुंबले के साथ काम करने को तैयार हैं।

सवाल ये है कि देशहित में क्या कप्तान को कोच से विवाद खत्म नहीं कर देना चाहिए था? जो क्रिकेट प्रेमी अनिल कुंबले के व्यक्तित्व से वाफिक हैं वो जानते हैं कि जम्बो बेहद शालीन और सरल इंसान हैं। अगर वो कप्तान को कोई सलाह दे भी रहे थे तो उसे सुनने में और जहां जरुरी था वहां मानने में क्या हर्ज़ था?

ख़बरों के मुताबिक सलाहकार समिति ने कोच के तौर पर कुंबले का कार्यकाल बढ़ाने की सिफारिश कर दी थी लेकिन कोहली इससे खुश नहीं थे। पाकिस्तान से फाइनल में हारने के बाद कोहली ने टीम को फाइनल तक पहुंचने की बधाई दी थी लेकिन कुंबले हार की वजहें गिना रहे थे शायद इसीलिए दोनो के बीच सुलह की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो गई।

क्या कोई कप्तान से पूछ सकता है कि कोच शब्द का मतलब क्या होता है? जवाब सभी जानते हैं सिखाने वाला, गाइड करने वाला। अब कोई कोच अपनी भूमिका निभाए और ये कप्तान को पसंद न आए तो इसमें किसी के विशेषाधिकार का हनन तो नहीं हो जाता।

कुंबले उम्रदराज़ हैं और अनुभवी भी इसीलिए उन्हें टीम का कोच बनाया गया था, वो बात की गहराई और कप्तान के अक्खड़पन को अच्छी तरह भांप गए थे और विवाद को ज्यादा हवा न देते हुए उन्होने 20 जून को ही इस्तीफा दे दिया।

कुंबले के ट्वीट में उन्होंने कप्तान के साथ विवाद का सही ब्योरा दिया है साफ लिखा है कप्तान उनकी स्टाइल से खुश नहीं थे इसलिए उन्होंने जाना ही ठीक समझा।

सब जानते हैं युवा कोहली में जबरदस्त ऊर्जा है, गुस्सा है वो मैदान पर झलकता भी है, शायद इसी ऊर्जा ने उन्हें बहुत कम वक्त में सितारा बना दिया है। एन्डोर्समेंट से भी वो करोड़ों कमा रहे हैं, लेकिन उनके व्यवहार के एक पहलू ने उन्हें चंद घंटों में एक ऐसे विवाद का केन्द्र बिन्दु बना दिया है जिसे वो समझदारी से टाल सकते थे।

सचिन तेंदुलकर सिर्फ रनों का पहाड़ खड़ा करके महान नहीं बने उनके महान बनने में उनके विनम्र स्वभाव की भी बड़ी भूमिका रही है। मैं कप्तान कोहली का बड़ा प्रशंसक हूं, कोच की तरह उन्हें कोई सलाह देने की हैसियत तो नहीं रखता लेकिन फिर भी मुफ्त की सलाह दे रहा हूं...

कप्तान साहब...निजी राय और अहम को देशहित और क्रिकेट-हित से ऊपर न रखें, इससे कुंबले का कोई नुकसान हो न हो जेंटलमैन गेम और करोड़ों उम्मीदों का नुकसान जरूर होगा।


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कुलदीप सिंह

लेखक www.Khabarnwi.com के Editorial Head हैं और News World India समाचार चैनल में executive editor हैं. आप उन्हें twitter पर @kuldeeps1980 पर फॉलो कर सकते हैं.

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