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देश के गुरुदेव...जिनकी देन है 'जन-गण-मन', जानें रवीन्द्र नाथ टैगोर की अनकही बातें

आरती यादव, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 7 , 2017 , 10:36 IST | नई दिल्ली

महान साहित्यकार, राष्ट्रगान के रचयिता और नोबेल पुरुस्कार विजेता गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की 7 अगस्त को पुण्यतिथि है। रवीन्द्रनाथ जी एक कवि होने के साथ-साथ शिक्षक, चित्रकार और संगीतकार भी थे। रवीद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 में कलकत्ता में देवेंद्रनाथ टैगोर और शारदा देवी के यहां हुआ था। परिवार में साहित्य, कला, नृत्य, कला आदि के प्रति प्रेम था ऐसे में रवीद्रनाथ टैगोर पर इसका प्रभाव पड़ना स्वाभाविक था।

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टैगोर ने अपनी शुरुआती पढ़ाई स्कूल से नहीं बल्कि घर से से की थी। 6 साल घर पर पढ़ाई करने के बाद सेंट जेवियर स्कूल से शिक्षा प्राप्त की। उसके बाद वकील बनने की चाहत में इंग्लैंड चले गए लेकिन उसके बाद लंदन यूनिवर्सिटी में कानून की पढ़ाई बीच में ही छोड़ कर एक साल के अंदर ही बिना डिग्री लिए भारत वापस आ गए। सन् 1883 में मृणालिनी देवी के साथ परिणय सूत्र में बंध गए।

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रवीन्द्रनाथ टैगोर ने अपनी पहली कविता आठ साल की उम्र में लिखी थी और 1877 में केवल सोलह साल की उम्र में उनकी लघुकथा प्रकाशित हुई थी। भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नई जान फूँकने वाले युगदृष्टा टैगोर के सृजन संसार में गीतांजलि, पूरबी प्रवाहिनी, शिशु भोलानाथ, महुआ, वनवाणी, परिशेष, पुनश्च, वीथिका शेषलेखा, चोखेरबाली, कणिका, नैवेद्य मायेर खेला और क्षणिका आदि शामिल हैं।

देश और विदेश के सारे साहित्य, दर्शन, संस्कृति आदि उन्होंने आहरण करके अपने अन्दर समेट लिए थे। पिता के ब्रह्म-समाजी के होने के कारण वे भी ब्रह्म-समाजी थे। पर अपनी रचनाओं व कर्म के द्वारा उन्होंने सनातन धर्म को भी आगे बढ़ाया। उनकी काव्यरचना गीतांजलि के लिये उन्हे सन् 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला।

टैगोर ने करीब 2,230 गीतों की रचना की। रवींद्र संगीत बाँग्ला संस्कृति का अभिन्न अंग है। टैगोर के संगीत को उनके साहित्य से अलग नहीं किया जा सकता। उनकी अधिकतर रचनाएँ तो अब उनके गीतों में शामिल हो चुकी है। अलग-अलग रागों में गुरुदेव के गीत यह आभास कराते हैं मानो उनकी रचना उस राग विशेष के लिए ही की गई थी। प्रकृति के प्रति गहरा लगाव रखने वाला यह प्रकृति प्रेमी ऐसा एकमात्र व्यक्ति है जिसने दो देशों के लिए राष्ट्रगान लिखा। भारत के राष्ट्रगान 'जन गण मन' के साथ बांग्लादेश का राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’ टैगोर ने ही लिखा है।

आपको बता दें कि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने अपने जीवन में 500 से ज़्यादा विज्ञापन किए। उस दौर के कई उत्पादों के प्रिंट विज्ञापनों में टैगोर की बातें कोट रहती थीं। गोदरेज साबुन और रेडियम स्नो (क्रीम) की अच्छी क्वालिटी और विदेशी प्रोडक्ट्स से इनके बेहतर होने जैसी बातें कोट होती थीं।

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एक ऐसा व्यक्तित्व जिसने, अपने प्रकाश से, सर्वत्र रोशनी फैलाई। भारत के बहुमूल्य रत्न मे से, एक हीरा जिसका तेज चहु दिशा मे फैला। जिससे भारतीय संस्कृति का अदभुत साहित्य, गीत, कथाये, उपन्यास , लेख प्राप्त हुए। ऐसे व्यक्ति का निधन 7 अगस्त 1941 को कोलकाता में हुआ। रवीन्द्रनाथ टैगोर एक ऐसा व्यक्तित्व है जो, मर कर भी अमर है।


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