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बॉलीवुड का पहला डांसिंग स्टार जिसके 'याहू' के सभी दीवाने थे (शम्मी कपूर पुण्यतिथि विशेष)

आरती यादव, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 14 , 2017 , 12:42 IST | मुंबई

बॉलीवुड के दिवगंत अभिनेता शम्मी कपूर की सोमवार को पुण्यतिथि है। 50 के दशक में जब हीरो डांस के नाम पर घबराते थे, तब शम्मी कपूर ने संगीत की नब्ज कपड़ ली। हर कोई उनके गानों के खुमार में ऐसा डूबा कि आज तक बाहर नहीं आ पाया। शम्मी कपूर का जन्म 21 अक्टूबर 1931 को मुंबई में हुआ था। शम्मी के पिता पृथ्वीराज कपूर जाने माने अभिनेता थे शम्मी को अभिनय विरासत में मिली।

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फिल्म इंडस्ट्री में जमे-जमाए अभिनेताओं की तरह नए तरह के रोल किए और रील लाइफ की तरह रीयल लाइफ में भी बिंदाए रहे। शम्मी कपूर ने फिल्म जीवन ज्योति से बतौर बॉलीवुड में कदम रखा। फिल्म अभिनेता शम्मी कपूर किसी रॉकस्टार से कम नहीं थे। फिल्म जीवन ज्योति के बाद शम्मी ने 6 साल तक लगातार कई फिल्में की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। 1957 में फिल्म 'तुमसा नहीं देखा' से शम्मी की किस्मत ने करवट बदली।

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दर्शकों के बीच उनकी अपील 'ओ हसीना जुल्फों वाली', 'आज कल तेरे-मेरे प्यार के चर्चे' और 'आ जा आ जा मैं हूं प्यार तेरा' जैसे गानों के चलते थी, जिनमें उन्होंने बड़ी ही मस्तमौला शैली में थिरकते हुए अदायगी दी। हालांकि, कश्मीर की कली, राजकुमार, जानवर और एन इवनिंग इन पेरिस जैसी कुछ फिल्मों में उनकी अभिनय क्षमता पर सवाल उठे लेकिन जंगली, बदतमीज, ब्लफ मास्टर, पगला कहीं का, तीसरी मंजिल और ब्रह्मचारी की बेहतरीन सफलता के जरिए शम्मी ने अपने आलोचकों के मुंह बंद कर दिए।

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1968 में फि़ल्म ब्रह्मचारी के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्म फेयर पुरस्कार मिला था। चरित्र अभिनेता के रूप में शम्मी कपूर को 1982 में विधाता फिल्म के लिए श्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला।1995 में फि़ल्म फेयर लाइफ़ टाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला। 1999 में ज़ी सिने लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किए गए। 2001में स्टार स्क्रीन लाइफ़ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से नवाजे गए।

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शम्मी कपूर की जिंदगी में दो ‍पत्नियां आईं। गीता बाली और नीला देवी। गीता बाली 'रंगीला रतन' फिल्म के दौरान मिली। दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया। लेकिल कपूर खानदान में एक नियम था कि फिल्म एक्ट्रेस से कोई शादी नहीं करेगा। इसलिए कुछ महीने बाद मुंबई के एक मंदिर में दोनों ने शादी कर ली और उसके बाद ही अपने परिवार को बताया। उम्र में गीता, शम्मी से बड़ी थी और उस जमाने में इसे बेमेल जोड़ी माना जाता था।1965 में चेचक की वजह से गीता बाली की मृत्यु हो गई जिसका शम्मी को गहरा झटका लगा। उन्होंने अपने आप पर ध्यान देना छोड़ दिया। वजन बहुत बढ़ गया और इससे बतौर हीरो उनका करियर भी प्रभावित हुआ।

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पहली पत्नी की मौत के बाद घर वालों ने दूसरी शादी का दबाव बनाया क्योंकि शम्मी के बच्चे छोटे थे। शम्मी मान गए और गीता की मौत के चार वर्ष बाद 1969 में उन्होंने भावनगर की रॉयल फैमिली की नीला देवी से शादी कर ली। लेकिन शम्मी ने गीता के सामने शर्त रखी कि वह मां नहीं बनेंगी। उन्हें गीता के बच्चों को ही पालना होगा। नीला देवी मान गई। वे ताउम्र अपने बच्चों की मां नहीं बनी और गीता के बच्चों को ही अपना माना।

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अपनी खास याहू शैली के कारण बेहद लोकप्रिय रहे हिंदी फिल्मों के पहले सिंगिंग-डांसिग स्टार शम्मी कपूर ने 14 अगस्त, 2011 को मुंबई के ब्रीज कैंडी अस्पताल में सुबह 5 बजकर 41 मिनट पर अंतिम सांस ली। बॉलीवुड फिल्मों में अपने विशिष्ट नृत्य और रोमांटिक अदाओं से अभिनेत्रियों का दिल जीतने वाले दिग्गज कलाकार शम्मी कपूर अपने पीछे ऐसी शैली छोड़ गए हैं, जिसे उनके प्रशंसक हमेशा याद रखेंगे।

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यहां देखें शम्मी कपूर के बेहतरीन गानें


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