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चीन से युद्ध की आशंका के बीच रक्षा मंत्रालय ने मांगे 20,000 करोड़

श्वेता बाजपेई, न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| अगस्त 9 , 2017 , 13:25 IST | नई दिल्ली

चीन और भारत के बीच चल रहे सीमा तनाव के कारण रक्षा मंत्रालय ने केंद्र से जंग के लिए 20 हजार करोड़ रुपए के अतिरिक्त बजट की मांग की है। ये मांग ऐसे समय आई है जब डोकलाम विवाद को 8 हफ्ते पूर हो गए हैं।

सरकार ने इस साल रक्षा बजट में 6 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी करते हुए 2,74,113 करोड़ रुपए का रक्षा बजट तय किया था। लेकिन चीन के साथ जारी तनाव के बीच रक्षा मंत्रालय ने 20,000 करोड़ रुपए की और मांग की है।

रक्षामंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार बजट का आधा हिस्सा उन्हें मिल चुका है, जिसमें से एक तिहाई खर्च भी हो चुका है। गौरतलब है कि कुछ हफ्ते पहले ही रक्षा मंत्रालय ने सेना के उप-प्रमुख को युद्ध से जुड़े हथियारों को खरीदने को कहा था। सेना को किसी भी समय कम से कम 10 दिन के युद्ध के लिए तैयार रहना होता है।

2017 की शुरुआत में ही सेना के सामानों के आयात पर से कस्टम ड्यूटी को हटा दिया गया था। कस्टम ड्यूटी की वजह से सेना को काफी पैसा खर्च करना पड़ता था साथ ही इस फैसले को इसलिए भी लिया गया था, ताकि स्वदेशी सामानों और हथियारों का इस्तेमाल बढ़ सके। हाल ही में CAG की रिपोर्ट में बताया था कि युद्ध शुरू होने की स्थिति में सेना के पास महज 10 दिन का ही पर्याप्त गोला-बारूद है। साथ ही उसमें ये भी बताया गया था कि कुल 152 तरह के गोला-बारूद में से महज 31 का ही स्टॉक संतोषजनक है।

गौर करने वाली बात यह है कि भारतीय सेना के पास कम से कम इतना गोला-बारूद होना चाहिए, जिससे वह 20 दिनों के किसी सघन टकराव की स्थिति से निपट सकें। हालांकि इससे पहले सेना को 40 दिनों का सघन युद्ध लड़ने लायक गोलाबारूद अपने वॉर वेस्टेज रिजर्व (WWR) में रखना होता था, जिसे 1999 में घटा कर 20 दिन कर दिया गया था। ऐसे में कैग की यह रिपोर्ट गोलाबारूद की भारी किल्लत उजागर करती है।


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