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दिल्ली के लैंडफिल साइट या हमारे कूड़े का क़ुतुब मीनार!

न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया | 0
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| सितंबर 5 , 2017 , 17:23 IST | नई दिल्ली

एक सितम्बर को जो दिल्ली के पूर्वी छोर पर हुआ वो इस आधुनिक युग में अकल्पनीय है। इंसानों दूारा बनाया गया कूड़े का पहाड़ गिर गया और दुनिया ने भी जाना कि हम किन हालातों में रहते हैं। एक ओर हम दिल्ली को विश्वस्तरीय शहर बनाने की बात तो करते हैं, लेकिन आज तक ठोस कचरा प्रबंधन की सुरक्षित व्यवस्था तक नहीं कर पाए हैं। शहर का कचरा फेंकने के लिए जो लैंडफिल साइट बनाए गए हैं वहां बड़े-बड़े पहाड़ खड़े हो गए हैं। गाजीपुर लैंडफिल साइट की क्षमता दस वर्ष पहले ही पूरी हो गई है। इसके बावजूद यहां कूड़ा डाला जा रहा है। ऐसे में इसे एक दिन टूटकर गिरना ही था। दुखद यह कि गिरे मलबे की चपेट में कई वाहन और लोग आ गए।

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आइए जाने इस काले पहाड़ का इतिहास

ईस्ट दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों का कचरा गाजीपुर में इकट्ठा किया जाता है। यह ढेर अब कूड़े के पहाड़ में तब्दील हो चुका है। डंपिंग ग्राउंड पर कूड़ा भरने की क्षमता पहले ही खत्म हो चुकी है। इसे नॉर्थ इंडिया का सबसे बड़ा डंपिंग ग्राउंड माना जाता है। इसकी ऊंचाई 25 मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए जबकि यह करीब 40 मीटर से अधिक हो चुकी है और कूड़ा कम करने के लिए इसमें आग भी लगाई जाती है। बदबू तो इस इलाके के लिए आम बात हो चुकी है लेकिन इस डंपिंग ग्राउंड की ऊंचाई लगातार बढ़ाई जा रही है।

कुतुब मीनार की ऊंचाई को छूने जा रही है लैंडफिल साइट

कुतुब मीनार की उंचाई 73 मीटर है। यहां के लैंडफिल साइट (कूड़ा डालने की जगह) की उंचाई 45 मीटर तक पहुंच गई है जो कि अब इससे सिर्फ 28 मीटर ही कम है। जल्द कोई उपाय नहीं खोजा गया तो कूड़े के पहाड़ों की ऊंचाई कुतुब मीनार से ज्यादा होगी। इससे निपटने के लिए सरकार के पास क्या योजना है? इलाके के विधायक क्या कर रहे हैं? वे भी जनता के प्रतिनिधि हैं। उन्हें कूड़े को लेकर काम करना चाहिए।'' पिछले साल पॉल्यूशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। तब इस डम्पिंग ग्राउंड का जिक्र किया गया था, और कोर्ट ने कहा था और ये भी कहा था कि कचरे का निपटारा नहीं होने से लोग मर रहे हैं। दिल्ली सरकार और सिविक एजेंसियों पर नाराजगी जाहिर कर इसके उपाय के लिए एक्शन प्लान देने का ऑर्डर दिया था।

सरकार और निगम के बीच नहीं है तालमेल

दिल्ली सरकार का कहना है कि नगर निगम कूड़ा निस्तारण के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल नहीं कर रही है। वहीं, पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने सरकार पर असहयोग का आरोप लगा दिया। उसका कहना है कि लैंडफिल साइट बनाने के लिए जमीन की मांग पर दिल्ली सरकार ध्यान नहीं दे रही है। इससे स्पष्ट है कि सरकार और निगम के बीच तालमेल नहीं है जिससे समस्या दूर करने के लिए बनाई गई योजनाओं पर सही ढंग से काम नहीं हो रहा है।दिल्ली में फिलहाल 13 डम्पिंग ग्राउंड हैं, जिनमें से गाजीपुर समेत 3 साइटों का ही ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। इन इलाकों में एयर पॉल्यूशन को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांग चुकी है।

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क्यों नहीं सड़क बनाने में हो रहा कूड़ों का इस्तेमाल

कूड़े का पहाड़ कम करने के लिए पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआइ) के साथ समझौता भी किया है। इसके तहत 75 फीसद कूड़े का इस्तेमाल सड़क बनाने में किया जाना है। एनएच 9 के चौड़ीकरण और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे का निर्माण हो रहा है लेकिन अब तक इसमें कचरे का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इस पर जल्द अमल किए जाने की जरूरत है। लोगों को भी इसमें सहयोग करना होगा। घर से ही गीला व सूखा कचरा अलग करने की जरूरत है। गीले कचरे से कंपोस्ट तैयार करने के साथ ही अन्य कचरे को रिसाइकिल कर दिल्ली को कूड़े के बोझ से बचाया जा सकता है।


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